
बिहार जहानाबाद के काको प्रखंड के ग्राम पंचायत बढ़ौना में बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य बाधित हो गया है। इसके पीछे मुख्य कारण करीब 200 वर्ष पुराना बरगद का पेड़ है, जो निर्माण स्थल पर स्थित है।
ग्रामीणों ने इस मुद्दे को लेकर वन विभाग से लिखित आवेदन देकर पेड़ को हटाने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत वन विभाग की अनुमति के बिना वृक्ष काटना दंडनीय है, जिससे यह मुद्दा और जटिल हो गया है।
बैठक में हुआ सर्वसम्मति से निर्णय
ग्राम सभा की बैठक पंचायत सरकार भवन निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले सरपंच युगेश कुमार के नेतृत्व में आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए बाधक बरगद के पेड़ को हटाया जाए। सरपंच ने बताया कि ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन पहले ही वन विभाग को सौंपा जा चुका है, लेकिन विभाग की निष्क्रियता के कारण कार्य ठप है।
वन विभाग की अड़चन
वन विभाग ने बरगद के पेड़ का मूल्य तीन लाख रुपये निर्धारित किया है, जिससे निर्माण कार्य पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सदस्य बृज नंदन शर्मा ने आरोप लगाया है कि कुछ व्यक्तियों के स्वार्थ के कारण यह कार्य रुका हुआ है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सरकार भवन निर्माण से क्षेत्र के विकास और सुविधाओं में वृद्धि होगी। पेड़ को हटाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प न होने के कारण वे वन विभाग की देरी से नाराज हैं।
सरकार की योजना और बाधाएं
बिहार सरकार ने राज्य के सभी पंचायतों में पंचायत सरकार भवन बनाने की योजना शुरू की है ताकि ग्रामीणों को सभी सरकारी सेवाएं एक ही स्थान पर मिल सकें। लेकिन बढ़ौना गांव में बरगद का पेड़ इस महत्वाकांक्षी योजना में बड़ी बाधा बन गया है।
अपील
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि इस मुद्दे का शीघ्र समाधान निकालकर पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य शुरू किया जाए।
Author: AK
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