
कहो वो कौन सी चोटी जहां पहुंची न हो बेटी,
जहानाबाद आज बेटी दिवस के अवसर पर पुरे भारत में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय रेलवे यातायात सेवा के अधिकारी कवि मनीष सौरभ ने बेटी दिवस के अवसर पर अपनी कविता पाठ के माध्यम से लोगों को जागरूक करते हुए, बेटियों को काव्य संग्रह समर्पित किया है। उन्होंने अपनी उदगार व्यक्त कर बेटियों के प्रति बड़ी ही मार्मिक शब्दों का प्रयोग करते हुए उत्साहित करने के लिखा है, जो।
समाज के ठेकेदारों ने रोका बहुत है रास्ता,
कभी सेफ्टी तो कभी इज्जत का देकर वास्ता,
मगर वो भूल जाते हैं मैं दुर्गा भी मैं काली भी,
चला सकती हूं देश को चलाती घर की भी रोटी,
कहो वो कौन सी चोटी जहां पहुंची न हो बेटी।
न मारो पेट में मुझको मुझे आगाज करने दो,
मौका तो दो कि कुछ करूं तुम्हें नाज करने को,
बेटों से बेहतर हूं मगर समता तो दो मुझको,
वरदान हूं शिव का मगर ममता तो दो मुझको,
वो मेरी कोख है जहां पल रही जीवन सृजन ज्योति,
कहो वो कौन सी चोटी जहां पहुंची न हो बेटी।
कवि भारतीय रेलवे यातायात सेवा के अधिकारी हैं और आईआईटी बॉम्बे के छात्र रहे हैं।
Author: AK
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