कला शिक्षक को टोंक में 20वें अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव के दौरान मिला ‘राष्ट्रीय युवा कला रत्न सम्मान’
जहानाबाद। बिहार की पारंपरिक टिकुली कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रहे जहानाबाद के कला शिक्षक दीपू कुमार को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय युवा कला रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। श्री ब्रजनंदन मेमोरियल प्रवेशिका प्लस-2 विद्यालय, मांदिल में कला शिक्षक के रूप में कार्यरत दीपू कुमार को यह सम्मान राजस्थान के टोंक में आयोजित 20वें अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव के दौरान प्रदान किया गया।अंतरंग कला एवं एजुकेशन वेलफेयर सोसायटी, टोंक तथा राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कला महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और रूस के 250 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया। इस दौरान अलग-अलग विधाओं में कलाकारों ने अपनी कला और रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
टिकुली कला ने दिलाई अलग पहचान
दीपू कुमार बिहार की पारंपरिक टिकुली कला को अपने हुनर और रचनात्मकता के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं। लकड़ी की सतह पर रंगों और सूक्ष्म बिंदुओं के बारीक संयोजन से तैयार की जाने वाली यह कला बिहार की समृद्ध लोक कला परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। कला महोत्सव के दौरान दीपू कुमार ने अपनी हाथों से तैयार की गई टिकुली कला की कलाकृतियां मुख्य अतिथियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों को भेंट कीं। उनकी कलाकृतियों को कला प्रेमियों और उपस्थित कलाकारों ने सराहा।
विद्यार्थियों को भी पारंपरिक कला से जोड़ रहे
विद्यालय में कला शिक्षक के रूप में दीपू कुमार विद्यार्थियों को कला की बारीकियां सिखाने के साथ उन्हें बिहार की पारंपरिक कला और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि लोक कलाओं को संरक्षित रखने के लिए नई पीढ़ी को इनसे जोड़ना जरूरी है। दीपू कुमार ने कहा कि टिकुली कला बिहार की पहचान और समृद्ध पारंपरिक विरासत का हिस्सा है। इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने में योगदान देना उनके लिए गर्व की बात है। राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान से कला के क्षेत्र में काम करने का उत्साह और बढ़ा है।
Jehanabad News: Jehanabad’s Deepu Kumar rises from Tikuli art to the national stage.

















