
जहानाबाद सदर अस्पताल में एक बड़ी दुर्घटना होते-होते टल गई। अस्पताल परिसर में चाइल्ड केयर यूनिट SNCU के बाहर परिजनों के लिए बनाई गई बैठने की जगह का लोहे का शेड अचानक भरभराकर गिर पड़ा। घटना के वक्त करीब आधा दर्जन लोग शेड के नीचे बैठे थे और खाना खाने की तैयारी कर रहे थे। तभी गनीमत यह रही कि उस समय वहां एक एंबुलेंस खड़ी थी, जो कोरोना सैंपल लाने और पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होती है। एंबुलेंस ने शेड का पूरा भार अपने ऊपर ले लिया, जिससे वह सीधे लोगों पर नहीं गिरा। हालांकि, इस हादसे में एंबुलेंस का अगला शीशा टूट गया। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यदि एंबुलेंस नहीं होती, तो शेड पूरी तरह से लोगों पर गिरता और गंभीर हादसा हो सकता था। एक महिला, जिसका बच्चा इनक्यूबेटर में है, ने कहा, “हम खाना निकाल रहे थे तभी अचानक हवा चली और शेड गिर गया। एंबुलेंस ने बचा लिया, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।” इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां रोजाना सैकड़ों लोग आते हैं, वहां ऐसी बुनियादी संरचनाओं की निगरानी क्यों नहीं होती? यह आशंका जताई जा रही है कि शेड के रखरखाव में लापरवाही हुई है। सवाल यह है कि क्या अस्पताल प्रशासन को किसी बड़ी घटना का इंतजार है, ताकि वे इस ओर ध्यान दें? जांच और सुधार की जरूरत है। स्थानीय लोगों ने इस घटना की आधिकारिक जांच और अस्पताल की अन्य कमजोर संरचनाओं के मरम्मत की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
यह हादसा अस्पताल प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समय पर मरम्मत और निरीक्षण किए जाएं। आखिरकार, अस्पताल जैसी जगहें लोगों की जान बचाने के लिए होती हैं, न कि उन्हें खतरे में डालने के लिए। बाकी यह जांच का विषय है इसकी जांच होनी आवश्यक है
Author: AK
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