
जहानाबाद: बिहार सरकार सर्वे को सही ढंग से कराने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले में अंचल कार्यालय से लेकर जिला रिकॉर्ड कार्यालय तक किसानों की भीड़ लगी हुई है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी खतियान और अन्य ज़रूरी कागजात उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
चार महीने से खतियान के लिए भटक रहे किसान
समाहरणालय स्थित रिकॉर्ड रूम के बाहर रोजाना किसानों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन उन्हें सिर्फ टहलाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि “पिछले चार महीने से हम खतियान के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।”
किसानों को जो पर्चा दिया गया था, वह अक्टूबर 2024 का था, लेकिन जनवरी 2025 तक भी खतियान नहीं मिल सका। ठंड के इस मौसम में दूर-दराज के गांवों से किसान रोजाना जिला मुख्यालय आ रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
कर्मचारियों पर आरोप: पैसे वालों का काम तुरंत, बाकी सिर्फ चक्कर लगाएं
किसानों ने आरोप लगाया कि जो लोग पैसे देकर काम करा रहे हैं, उन्हें खतियान जल्दी मिल रहा है, जबकि बाकी किसानों को केवल टरकाया जा रहा है।
“हमसे कहा जाता है कि अगले हफ्ते आओ, लेकिन महीनों से बस तारीखें बढ़ाई जा रही हैं,” एक किसान ने गुस्से में कहा।
जिला रिकॉर्ड कार्यालय में रोजाना हंगामा
किसानों की नाराजगी अब हंगामे में बदल रही है। रिकॉर्ड रूम के बाहर हर दिन किसानों का गुस्सा फूट रहा है, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
प्रशासन चुप, किसान बेहाल – आखिर कब मिलेगा समाधान?
किसानों की परेशानी को लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सवाल यह है कि सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही रहेंगी या किसानों को उनका हक मिलेगा?
Author: AK
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