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“भारत की बेटी” कविता: ममता प्रिया की प्रेरणादायक रचना

Sunita williams returns to earth

जहानाबाद, बिहार। सामाजिक कार्यकर्ता, रक्तसेविका और लेखिका ममता प्रिया द्वारा रचित कविता “भारत की बेटी” ने समाज में बेटियों की शक्ति और आत्मनिर्भरता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। इस कविता में उन्होंने नारी की कोमलता के साथ-साथ उसकी अदम्य शक्ति को भी उजागर किया है।

कविता की मुख्य पंक्तियाँ:
“वो जौहर कर सकती है तो इतिहास भी रच सकती है, वो भारत की बेटी है हर तूफ़ान फतह कर सकती है।”

“उलझोगे तो उलझा देगी, बिखरे को सुलझा देगी, सुकोमल सी दिखने वाली फौलादी भी बन सकती है।”

“हो मन में दृढ़ शक्ति तो क्या कैसी कठिनाई, धीर धैर्य हो मन में तो चट्टान सी मजबूत बनते जाती है।”

समाज में प्रभाव:
ममता प्रिया की यह कविता समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और सशक्तिकरण की भावना को प्रोत्साहित करती है। उनकी रचना ने यह सिद्ध किया है कि महिलाएँ न केवल परिवार की धुरी हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

लेखिका का परिचय:
ममता प्रिया जहानाबाद, बिहार की निवासी हैं। वह एक समर्पित रक्तसेविका, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका हैं, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

उनकी कविता “भारत की बेटी” समाज में बेटियों की महत्ता और उनकी असीम क्षमताओं को रेखांकित करती है, जो निस्संदेह प्रेरणादायक है।

AK
Author: AK

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