केंद्र सरकार ने लू और बिजली गिरने को प्राकृतिक आपदाओं की सूची में शामिल किया है। जानें नया नियम, मुआवजा प्रक्रिया, SDRF-NDRF सहायता और इससे आम लोगों को क्या लाभ मिलेगा।
केंद्र सरकार ने लू और बिजली गिरने जैसी घटनाएं अब एनडीआरएफ प्रोटोकॉल के तहत प्राकृतिक आपदाओं की यानी की नेचुरल डिजास्टर के सूची में शामिल करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी है। जिसके बाद अब इन घटनाओं से प्रभावित लोगों और राज्यों को सरकारी आपदा कोष यानी SDRF और NDRF से आर्थिक मदद और मुआवजा मिलेगा।

बता दें कि अब तक हिटवेव और बिजली गिरने को राष्ट्रीय स्तर पर आपदा सूची में शामिल नहीं किया गया था। अब शामिल होने से पीड़ितों को मुआवजा मिलना आसान हो जाएगा। राज्य और केंद्र सरकारें अपने आपदा राहत कोष के पैसों का इस्तेमाल इन आपदाओं से निपटने में कर सकेंगी। मौसम में आ रहे बदलावों और लगातार बढ़ती गर्मी-बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए 16वें वित्त आयोग (2026-31) ने इसे सूची में जोड़ने की सलाह दी थी, जिसे मान लिया गया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि के सवालों का जवाब देते हुए यह जानकारी दी है।
मार्च-जुलाई 2026 के बीच हीट स्ट्रोक के हजारों मामले
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि इन सुझावों के आधार पर गृह मंत्रालय ने 2026-31 की अवधि के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के नियमों में गर्मी की लहरों और बिजली गिरने को प्राकृतिक आपदाओं की सूची में शामिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस साल मार्च से जुलाई 2026 के बीच देश में हीट स्ट्रोक के 4853 मामले सामने आए। इसी दौरान हीट स्ट्रोक से 20 लोगों की मौत हुई। सबसे ज्यादा मामले तेलंगाना में (915), उसके बाद बंगाल में (733) और छत्तीसगढ़ में (660) दर्ज हुए। अब SDR-NDRF के जरिए राहत देने के लिए एक नीति तैयार हो गई है।
अधिसूचित आपदाओं की लिस्ट में अब 14 घटनाएं शामिल
आपको बता दें कि अभी तक अधिसूचित आपदाओं की लिस्ट में चक्रवात, सूखा, भूकंप, आग, बाढ़, सुनामी, ओला, भूस्खलन, हिमस्खलन, बादल फटना, कीड़ों का हमला और पाला-ठंड की लहरें शामिल थीं। मगर अब इसमें हीटवेव यानी लू और बिजरी गिरने की घटनाओं को भी शामिल किया गया है। इससे राज्य सरकारें एसडीआरएफ (राज्य आपदा राहत कोष) का पैसा लू (हीटवेव) और बिजली गिरने से प्रभावित लोगों की मदद के लिए भी इस्तेमाल में आएगी।
Author: AK
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