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दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर एक-एक कर भ्रष्टाचार के आरोप लगातार लगते जा रहे हैं। ताजा मामला 1000 लो फ्लोर बसों की खरीद फरोख्त में घोटाले का है। उपराज्यपाल ने इस पूरे मामले में सीबीआई की जांच के आदेश भी दे दिए हैं क्योंकि यह मामला साल 2018 से ही चला आ रहा है। भाजपा ने इस पर आरोप लगाया था कि सभी बसों की कीमत 870 करोड़ रुपये है, लेकिन उसकी मरम्मत के नाम पर 3500 करोड़ रुपये निजी कंपनी को देने की बात तय हुई। भाजपा को इस बात से आपत्ति थी कि जब बस, कंडक्टर, डिपो, सीएनजी और अन्य सब कुछ दिल्ली सरकार की है तो सिर्फ इसकी मरम्मत के लिए निजी कंपनी को 3500 करोड़ रुपये क्यों दिए गए जो पूरे टेंडर से चार गुना से ज्यादा है। भाजपा ने मांग की है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा इस पूरे भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की मांग की।
आज प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि नोटों की गुलाबी गड्डियो के बदले टेंडर देना केजरीवाल की राजनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। दिल्ली के इतिहास में पहली बार हुआ है जब डीटीसी का चेयरमैन ऐसे आदमी को बनाया गया है जो पॉलिटिकल पार्टी से ताल्लुक रखता हो। उन्होंने आरोप लगाया कि लो फ्लोर बसों का टेंडर की बात केजरीवाल ने एल-1 कंपनी से करने की बजाय अपने खास लोगों की जेबीएम कम्पनी को टेंडर दिया ताकि मोटी कमाई होने में कोई समस्या न हो।
भाजपा ने आरोप लगाया कि नई बसों की खरीद में तीन साल तक मेंटेनेंस तो उस टेंडर के साथ ही मुफ्त होता है, लेकिन केजरीवाल ने अतिरिक्त मरम्मत शुल्क देने की बात कही ताकि वह पैसा घुमा फिराकर उनके जेब में आ सके। केजरीवाल की सरकार स्वराज से शराब और फिर शराब से भ्रष्टाचार में इतनी डूब चुकी है कि अब उसका कोई भी काम बिना भ्रष्टाचार के नहीं होता। केजरीवाल सीवीसी नहीं मानते बल्कि वे मानते हैं सिर्फ ‘डीसीसी’ मतलब डायरेक्ट कैश कलेक्शन। आप का पाप सिर्फ भ्रष्टाचार को अंजाम देते रहना है।
दरअसल आम आदमी पार्टी का कहना है कि आज केजरीवाल की बबेहतर शिक्षा नीति और स्वस्थ्य से भाजपा बौखला चुकी है और साथ ही नरेंद्र मोदी के साथ केजरीवाल को 2024 के प्रधानमंत्री के तौर पर देखकर घबरा गई है। इसलिए ऐसे आरोप लगा रही है। आज लो फ्लोर बसों में घोटाला की बात कर रहे हैं जब बस खरीदी ही नहीं गई तो घोटाला कहाँ से हो गया? सवाल के जवाब में भाजपा ने कहा कि भ्रष्टाचार तो हो चुका है बस जनता के लिए जो बस आनी थी उसपर फिलहाल के लिए रोक लगाया गया है।कुछ ऐसा ही हाल आबकारी नीति के वक्त भी था।आबकारी नीति लागू करने से पहले आम आदमी पार्टी चीख-चीख कर बता रही थी कि यह दिल्ली के राजस्व को फायदा पहुँचाने वाली नीति है और जब इसपर जांच बैठी तो इसे तुरंत वापस ले लिया। जब फायदे की नीति टहि तो केजरीवाल इसे वापस क्यों ले लिया।



















