BRICS Summit 2026 में भारत वैश्विक दक्षिण, आर्थिक सहयोग और ग्लोबल गवर्नेंस पर अपनी भूमिका मजबूत करेगा। जानें अमेरिका और पश्चिम की नजर क्यों है।
BRICS Summit 2026: Why India Matters
भारत आने वाले चंद दिनों के भीतर 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। 12-13 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाली इस बैठक पर दुनिया की नजर है। भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और समिट में सदस्य देशों के नेताओं के साथ पार्टनर और आउटरीच देशों के नेता भी शामिल हो सकते हैं।
इस बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मौजूदगी इसे भारत के लिए और भी महत्वपूर्ण बना रही है। वहीं, BRICS के बढ़ते प्रभाव के बीच अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की भी इस समूह पर नजर है। ऐसे में सवाल है कि भारत के लिए आखिर इतना अहम क्यों है BRICS सम्मेलन? आईए जानते हैं इसके बारे में विशेष विस्तार से….
2 Days to Go!
— BRICS 2026 (@BricsIndia2026) September 10, 2026
📍 Bharat Mandapam, New Delhi
Almost time.#BRICS2026 #BRICSIndia2026 #IndiaBRICSChairship pic.twitter.com/KJimfSQ4xu
क्या है BRICS और कैसे बना?
BRICS उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है। इसका गठन 2006 में BRIC के रूप में हुआ था, जिसमें B ब्राजील, R रूस, I भारत और C चीन को दर्शाता है। इन सभी देशों को मिलाकर BRIC बनाया गया। 2009 में पहला शिखर सम्मेलन हुआ। 2010 में S यानी की (South africa) दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। बाद में समूह का विस्तार हुआ और अब इसमें 11 सदस्य हैं। इन देशों का उद्देश्य आर्थिक सहयोग, विकास और वैश्विक मुद्दों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना है।
BRICS में अब कौन-कौन से देश हैं?
आज BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। यानी यह समूह सिर्फ चार-पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है। इसमें एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण अमेरिका के महत्वपूर्ण देश शामिल हैं। यही वजह है कि BRICS का आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है और दुनिया इसके फैसलों को गंभीरता से देखती है।
Different strengths. One shared purpose.
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 8, 2026
India’s BRICS Chairship 2026 is deepening partnerships across diverse areas, including customs and standards, energy, agriculture and seeds, asset recovery, digital capacity building, science, traditional medicine and mental wellness,… pic.twitter.com/Nfgd8SsDb4
दिल्ली में होने वाली समिट में क्या होगा?
18वीं BRICS समिट 12 और 13 सितंबर 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में होगी। दो दिनों की बैठक में सदस्य देशों के नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा व्यापार, वित्त, विकास, तकनीक, जलवायु और आपसी सहयोग जैसे विषय भी एजेंडे में रह सकते हैं। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक BRICS देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने और साझा प्राथमिकताओं पर सहमति बनाने का बड़ा मंच होगी।
शी जिनपिंग का आना भारत के लिए क्यों अहम?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मौजूदगी BRICS समिट को भारत के लिए खास बना रही है। भारत और चीन के बीच सीमा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर लंबे समय से तनाव रहा है। ऐसे में एक ही मंच पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी बातचीत और रिश्तों को सामान्य बनाने का अवसर दे सकती है। हालांकि BRICS समिट मुख्य रूप से बहुपक्षीय मंच है, लेकिन इसके दौरान द्विपक्षीय बातचीत की संभावना भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ट्रंप और अमेरिका की नजर भी BRICS पर
BRICS के बढ़ते विस्तार ने अमेरिका समेत पश्चिमी देशों का ध्यान भी खींचा है। यह समूह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की बात करता है। BRICS देशों की संयुक्त आर्थिक ताकत बढ़ने के साथ डॉलर, व्यापार और वैश्विक वित्तीय संस्थाओं जैसे मुद्दों पर इसकी चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी BRICS को लेकर कई बार अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। इसलिए दिल्ली समिट के फैसले दुनिया के लिए अहम होंगे।
भारत के लिए BRICS इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

BRICS सम्मेलन भारत को एक ही मंच पर चीन और रूस जैसे देशों के साथ बातचीत का अवसर देता है। साथ ही भारत ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, सऊदी अरब, UAE और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंध मजबूत कर सकता है। इससे भारत खुद को ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज के तौर पर मजबूत कर सकता है। खास बात यह है कि भारत BRICS के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ भी अपनी रणनीतिक साझेदारी जारी रख सकता है।
BRICS किन वैश्विक संस्थाओं में बदलाव चाहता है?
BRICS लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र, IMF और वर्ल्ड बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग करता रहा है। समूह का तर्क है कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकासशील देशों का महत्व काफी बढ़ चुका है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी पर्याप्त नहीं है। BRICS चाहता है कि वैश्विक फैसलों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा भूमिका मिले। इसी सोच के तहत BRICS देशों ने अपना New Development Bank भी बनाया है।
Author: AK
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