बिहार में 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है। 1000 छात्राओं को हर महीने ₹10 हजार PhD फेलोशिप और महिला विश्वविद्यालय की घोषणा हुई।
Bihar Jobs for 1 Crore Women, PhD Fellowship

बिहार में महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को पटना में बिहार राज्य महिला आयोग के 25वें स्थापना दिवस समारोह में कहा कि सरकार का लक्ष्य एक करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ना है। इसके साथ ही हर साल 1,000 छात्राओं को पीएचडी की पढ़ाई और शोध के लिए हर महीने 10,000 रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए एक अलग विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। इसके अलावा छात्राओं की सुरक्षा के लिए स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती और ‘पुलिस दीदी’ व्यवस्था का भी जिक्र किया गया।
एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें रोजगार और आय से जुड़ी गतिविधियों में शामिल करने पर जोर दे रही है। सरकार का लक्ष्य एक करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ना है।
इसके लिए स्वयं सहायता समूहों और जीविका से जुड़ी महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। महिलाएं सिलाई, मुर्गी पालन, बकरी पालन और दूसरी आर्थिक गतिविधियों के जरिए आमदनी बढ़ा रही हैं।
सरकार का कहना है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देने के बजाय उन्हें ऐसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिनसे नियमित आय का रास्ता बन सके। इसी क्रम में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया।
बिहार सरकार के पहले के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाओं के खातों में वित्तीय सहायता भेजी जा चुकी है। फरवरी 2026 तक सरकार ने 1.81 करोड़ लाभुक महिलाओं के खातों में कुल 18,100 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाने की जानकारी दी थी।
रोजगार के साथ स्वरोजगार पर जोर
महिला रोजगार की योजना में केवल पारंपरिक नौकरियों पर जोर नहीं है। सरकार महिलाओं को स्वरोजगार और छोटे स्तर की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं पहले से कई गतिविधियों में शामिल हैं। सिलाई, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और दूसरे छोटे कारोबार महिलाओं की आय का जरिया बन रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य इन गतिविधियों का दायरा बढ़ाना है, ताकि अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके।
छात्राओं को हर महीने मिलेंगे 10 हजार रुपये
महिलाओं की उच्च शिक्षा और शोध को लेकर भी सरकार ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बालिका पीएचडी फेलोशिप के तहत हर साल 1,000 छात्राओं को 10,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य छात्राओं को पीएचडी और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करना है।
इस फेलोशिप की घोषणा अगस्त 2026 में भी की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चयनित छात्राओं को चार साल तक हर महीने 10,000 रुपये की सहायता देने की योजना है।
इस हिसाब से अगर किसी छात्रा को पूरी चार साल की अवधि के लिए सहायता मिलती है, तो उसे कुल 4.8 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिल सकती है।
पीएचडी फेलोशिप का उद्देश्य क्या है?
उच्च शिक्षा में लंबे समय तक पढ़ाई और शोध करने के लिए आर्थिक संसाधनों की जरूरत होती है। पीएचडी करने वाली छात्राओं के लिए फीस, किताबें, शोध सामग्री, यात्रा और रोजमर्रा के खर्च बड़ी चुनौती हो सकते हैं।
ऐसे में Bihar PhD Fellowship का उद्देश्य छात्राओं को आर्थिक सहायता देकर शोध जारी रखने में मदद करना है। सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा और रिसर्च में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यह योजना खासतौर पर उन छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा जारी रखने में कठिनाई महसूस करती हैं।
बिहार में बनेगा महिला विश्वविद्यालय
महिलाओं की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बिहार में एक अलग महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना भी सामने आई है।
मुख्यमंत्री ने पहले अगस्त में घोषणा की थी कि राज्य में ऐसा विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा, जहां विश्वविद्यालय के प्रमुख पदों से लेकर शिक्षक, कर्मचारी और छात्राओं तक महिलाओं की भागीदारी होगी।
इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के अतिरिक्त अवसर तैयार करना बताया गया है।
महिला विश्वविद्यालय की घोषणा ऐसे समय हुई है जब सरकार उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए फेलोशिप जैसी योजनाओं पर भी जोर दे रही है।
मैट्रिक से लेकर ग्रेजुएशन तक छात्राओं के लिए योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मैट्रिक, इंटरमीडिएट और स्नातक स्तर पर प्रोत्साहन योजनाएं चल रही हैं।
इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई।
सरकार का फोकस केवल स्कूल स्तर तक सीमित नहीं है। छात्राओं को उच्च शिक्षा और शोध तक पहुंचाने के लिए भी अलग योजनाएं लाई जा रही हैं।
पीएचडी फेलोशिप इसी कड़ी का हिस्सा है। इसका लक्ष्य छात्राओं को उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने और शोध के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए आर्थिक सहायता देना है।
छात्राओं के लिए ‘पुलिस दीदी’ व्यवस्था
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने कई कदमों का उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में ‘पुलिस दीदी’ की व्यवस्था की गई है।
इसके तहत स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है, ताकि छात्राओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस तरह की व्यवस्था लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य है।
अगस्त 2026 में बिहार सरकार ने ‘पुलिस दीदी’ के लिए 4,700 दोपहिया वाहनों को भी शुरू किया था। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य महिला पुलिसकर्मियों की पहुंच और निगरानी को बेहतर बनाना है।
स्कूल-कॉलेज के आसपास सुरक्षा पर जोर
छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा खासतौर पर स्कूल और कॉलेज आने-जाने के दौरान महत्वपूर्ण होता है। सरकार का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलेगी।
‘Police Didi Bihar’ पहल को इसी उद्देश्य से जोड़ा जा रहा है।
हालांकि, किसी भी सुरक्षा योजना की सफलता केवल पुलिस की तैनाती से नहीं बल्कि नियमित निगरानी, शिकायतों पर कार्रवाई और स्थानीय स्तर पर पुलिस-प्रशासन की सक्रियता पर भी निर्भर करती है।
जीविका दीदियों के लिए रोजगार के नए अवसर
मुख्यमंत्री ने सरकारी योजनाओं में जीविका से जुड़ी महिलाओं की भूमिका बढ़ाने की बात भी कही।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को पोशाक के लिए राशि देने के बजाय जीविका दीदियों द्वारा तैयार पोशाक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इससे एक तरफ विद्यार्थियों को पोशाक मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के लिए उत्पादन और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
इस मॉडल में महिला स्वयं सहायता समूहों को सरकारी मांग से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
अगर बड़े स्तर पर ऐसे ऑर्डर महिला समूहों को मिलते हैं तो इससे ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पंचायत और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से उनकी राजनीतिक भागीदारी मजबूत हुई है।
बिहार लंबे समय से स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाली नीतियों के लिए जाना जाता है।
इसका असर गांवों और शहरों के स्थानीय प्रशासन में महिला प्रतिनिधियों की संख्या पर पड़ा है। अब सरकार आर्थिक और सामाजिक भागीदारी के साथ राजनीतिक भागीदारी को भी महिला सशक्तिकरण का हिस्सा बता रही है।
महिला आयोग से क्या कहा मुख्यमंत्री ने?
बिहार राज्य महिला आयोग के 25वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने आयोग की भूमिका को लेकर भी बात की।
उन्होंने कहा कि महिला आयोग को केवल महिलाओं की शिकायतों के समाधान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आयोग को महिलाओं की स्थिति बेहतर बनाने के लिए सरकार को नियमित सुझाव भी देने चाहिए।
उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय बनाने और महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक सशक्तिकरण में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही।
समारोह में आयोग की 25 वर्षों की यात्रा पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। डाक विभाग के सहयोग से विशेष डाक टिकट जारी किया गया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा समेत कई लोग मौजूद रहे।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस
बिहार में महिलाओं से जुड़ी हालिया घोषणाओं को देखें तो सरकार का फोकस तीन प्रमुख क्षेत्रों पर दिखाई देता है—रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा।
रोजगार के लिए एक करोड़ महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षा के क्षेत्र में Balika PhD Fellowship के तहत हर साल 1,000 छात्राओं को 10,000 रुपये प्रतिमाह देने की बात कही गई है। उच्च शिक्षा के लिए महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना भी सामने आई है।
सुरक्षा के लिए ‘पुलिस दीदी’ और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती का जिक्र किया गया है।
इन योजनाओं का असर कितना व्यापक होगा, यह इनके क्रियान्वयन और पात्र महिलाओं व छात्राओं तक लाभ पहुंचने पर निर्भर करेगा।
महिलाओं के लिए आगे क्या?
सरकार की इन घोषणाओं के बाद अब नजर इनके लागू होने के तरीके पर रहेगी। एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ना बड़ा लक्ष्य है। इसके लिए केवल योजनाओं की घोषणा ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, बाजार, वित्तीय सहायता और रोजगार के स्थायी अवसर भी जरूरी होंगे।
इसी तरह पीएचडी फेलोशिप में छात्राओं के चयन, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और भुगतान की नियमितता महत्वपूर्ण होगी।
महिला विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भी बुनियादी ढांचे, पाठ्यक्रम, शिक्षकों और प्रवेश व्यवस्था को लेकर आगे विस्तृत जानकारी सामने आनी बाकी है।
फिलहाल बिहार सरकार ने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, उच्च शिक्षा और सुरक्षा को लेकर कई घोषणाएं की हैं। Bihar Women Jobs, Bihar PhD Fellowship, Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana और महिला विश्वविद्यालय जैसी पहलें आने वाले समय में राज्य की महिला-केंद्रित नीतियों का अहम हिस्सा रहेंगी।
सरकार की घोषणाओं के अनुसार लक्ष्य बड़ा है—एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ना, हर साल 1,000 छात्राओं को पीएचडी के लिए आर्थिक सहायता देना और महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के नए संस्थान तैयार करना। अब इन योजनाओं के जमीन पर लागू होने और उनके वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने पर सबकी नजर रहेगी।
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !



















