बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में लालू यादव ने एनडीए पर तीखा हमला बोला। कहा, 6 और 11 नवंबर के मतदान के बाद एनडीए की विदाई तय है।
Bihar Election 2025: Lalu’s Sharp Attack on NDA
परिचय: बिहार की सियासत में फिर गरमाहट
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की घोषणा के साथ ही सियासी पारा तेजी से चढ़ गया है। राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने मोर्चे संभाल लिए हैं। लेकिन इस बीच, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बयानों ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग की घोषणा के तुरंत बाद एनडीए पर तीखा हमला करते हुए कहा, “छह और ग्यारह NDA नौ दो ग्यारह”, यानी 6 और 11 नवंबर के मतदान के बाद एनडीए की विदाई तय है।
यह बयान न केवल एनडीए के खिलाफ विपक्ष की रणनीति को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लालू यादव और राजद 2025 के चुनाव में पूरी ताकत से उतरने के मूड में हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: कार्यक्रम और चरणवार विवरण
चुनाव आयोग ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है।
- पहला चरण: 6 नवंबर 2025 को 121 सीटों पर मतदान
- दूसरा चरण: 11 नवंबर 2025 को 122 सीटों पर मतदान
- मतगणना: 14 नवंबर 2025
- चुनावी प्रक्रिया पूर्ण: 16 नवंबर 2025
यह चुनाव दो चरणों में आयोजित होगा और राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों पर मुकाबला होगा। राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार चयन और प्रचार अभियान को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
लालू यादव के बयान का राजनीतिक अर्थ
“6 और 11, NDA नौ दो ग्यारह” — एक प्रतीकात्मक तंज
लालू यादव का यह बयान, “छह और ग्यारह NDA नौ दो ग्यारह”, बिहार की जनता के बीच तेजी से वायरल हो गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि 6 और 11 नवंबर को मतदान के बाद एनडीए का सफाया हो जाएगा। लालू यादव के इस बयान को उनके राजनीतिक आत्मविश्वास और एनडीए-विरोधी लहर की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार और एनडीए पर सीधा हमला
लालू यादव ने अपने भाषणों और सोशल मीडिया पर लगातार नीतीश कुमार को निशाने पर लिया है। उनका कहना है, “मुख्यमंत्री बदलेंगे, सरकार बदलेंगे।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनडीए सरकार पिछले 20 वर्षों में बिहार को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में असफल रही है और जनता अब बदलाव चाहती है।
बिहार की जनता का मूड: बदलाव की चाहत या निरंतरता?
राज्य के मतदाताओं के बीच इस बार चुनावी हवा कुछ अलग है। पिछले चुनावों में एनडीए और महागठबंधन के बीच मुख्य मुकाबला रहा था, लेकिन अब जन सुराज पार्टी, तेजप्रताप यादव का स्वतंत्र मोर्चा, और कई क्षेत्रीय दल भी मैदान में हैं।
जनता के बीच यह चर्चा आम है कि इस बार सत्ता परिवर्तन संभव है या नहीं।
- एक वर्ग का मानना है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में स्थिरता और अनुभव है।
- वहीं, दूसरा वर्ग लालू यादव और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में नई उम्मीदें देख रहा है।
बदलाव की यह भावना बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।
एनडीए बनाम महागठबंधन: दो ध्रुवों की जंग
एनडीए की स्थिति
एनडीए में इस बार जदयू, भाजपा, लोजपा (रामविलास), हम और रालोसपा शामिल हैं। हालांकि अंदरूनी मतभेदों और नेतृत्व के मुद्दों पर कुछ असहमति की खबरें भी सामने आ रही हैं।
नीतीश कुमार के नेतृत्व पर कुछ सवाल उठाए जा रहे हैं, खासकर युवाओं और नए मतदाताओं के बीच। वहीं भाजपा अपने संगठन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के सहारे मैदान में उतर रही है।
महागठबंधन की रणनीति
राजद, कांग्रेस और सीपीआई(एमएल) इस बार भी एक साथ चुनाव लड़ने जा रहे हैं। महागठबंधन का फोकस भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, और महंगाई जैसे मुद्दों पर है। लालू यादव के बयान और तेजस्वी यादव की युवा छवि इस गठबंधन के लिए मजबूती का आधार बन सकते हैं।
लालू यादव बनाम नीतीश कुमार: पुरानी प्रतिद्वंद्विता, नया अध्याय
बिहार की राजनीति लालू और नीतीश की प्रतिद्वंद्विता के बिना अधूरी है। दोनों नेताओं ने पिछले तीन दशकों में राज्य की सियासत को आकार दिया है।
- लालू यादव का राजनीतिक आधार ग्रामीण और पिछड़े वर्गों में मजबूत है।
- नीतीश कुमार प्रशासनिक अनुभव और विकास के एजेंडे के लिए जाने जाते हैं।
2025 का चुनाव इस राजनीतिक मुकाबले का नया अध्याय साबित हो सकता है, जहां दोनों नेताओं की साख दांव पर होगी।
जन सुराज और तीसरा मोर्चा: नई राजनीतिक चुनौती
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और तेजप्रताप यादव का स्वतंत्र राजनीतिक रुख, इस बार के चुनाव को बहु-कोणीय बना सकता है। प्रशांत किशोर लगातार ग्रामीण इलाकों का दौरा कर रहे हैं और लोगों से सीधे संवाद स्थापित कर रहे हैं।
तीसरे मोर्चे का असर खासकर शहरी और मध्यवर्गीय मतदाताओं पर पड़ सकता है, जो पारंपरिक दलों से निराश हैं। यह संभव है कि कुछ सीटों पर तीसरे मोर्चे के उम्मीदवार परिणाम को प्रभावित करें।
चुनावी मुद्दे: जनता किस बात पर वोट देगी?
1. बेरोजगारी और शिक्षा
बिहार में युवाओं के बीच रोजगार का मुद्दा सबसे बड़ा चुनावी एजेंडा है। लालू और तेजस्वी लगातार इसे उठाते रहे हैं, जबकि एनडीए सरकार अपने कौशल विकास और रोजगार सृजन योजनाओं का हवाला देती है।
2. भ्रष्टाचार और सुशासन
लालू यादव एनडीए सरकार को भ्रष्ट बताते हैं, वहीं नीतीश कुमार “सुशासन बाबू” के नाम से अपनी साफ छवि को सामने रखते हैं।
3. विकास और बुनियादी ढांचा
एनडीए सरकार सड़क, बिजली, और शिक्षा में सुधार के आंकड़े पेश कर रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि ये केवल प्रचार हैं, ज़मीनी हकीकत अलग है।
सोशल मीडिया पर लालू का प्रभाव
लालू यादव के बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं। “छह और ग्यारह NDA नौ दो ग्यारह” वाला ट्वीट अब चुनावी नारा बन चुका है। ट्विटर और फेसबुक पर उनके समर्थक इसे एनडीए के खिलाफ एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
निष्कर्ष: बिहार चुनाव 2025 की जंग दिलचस्प होगी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का मैदान पूरी तरह सज चुका है। एक ओर एनडीए अपने अनुभव और नेतृत्व पर भरोसा जता रहा है, तो दूसरी ओर लालू यादव का महागठबंधन बदलाव की लहर पर सवार है।
लालू का “6 और 11, NDA नौ दो ग्यारह” वाला बयान इस चुनाव की दिशा तय कर सकता है। जनता अब यह देखना चाहती है कि क्या वाकई बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा या फिर एनडीए एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी।
इतना तय है कि बिहार चुनाव 2025 केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जनभावनाओं की जंग भी साबित होगा — जहां एक ओर पुराने अनुभव होंगे, वहीं दूसरी ओर नए सपने और उम्मीदें।
- बिहार चुनाव 2025
- लालू यादव
- एनडीए
- नीतीश कुमार
- महागठबंधन
यह भी पढ़े: TRAI ने जारी किए नए सिम कार्ड Rule, अब नहीं करवाना पड़ेगा महंगा रिचार्ज, यहां देखें पूरी डिटेल्स
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !











