DW Samachar – Header
BREAKING

बिहार बोर्ड 10वीं-12वीं में बड़ा बदलाव, अब फेल नहीं होंगे छात्र

बिहार में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के नियम बदलने की तैयारी है। फेल शब्द हटाने, शनिवार को हाफ डे और सप्लीमेंट्री छात्रों के लिए नई योजना। Bihar Board Exams: No More Fail? बिहार के बोर्ड छात्रों के लिए बड़ी खबर बिहार में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए … Read more

Bihar Board Exams: No More Fail?

बिहार में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के नियम बदलने की तैयारी है। फेल शब्द हटाने, शनिवार को हाफ डे और सप्लीमेंट्री छात्रों के लिए नई योजना।

Bihar Board Exams: No More Fail?

बिहार के बोर्ड छात्रों के लिए बड़ी खबर

बिहार में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। परीक्षा को लेकर छात्रों के तनाव और फेल होने के डर को कम करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से कई बदलावों की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित बदलावों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने पर छात्र को सीधे ‘फेल’ नहीं कहा जाएगा।

नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल परीक्षा के नतीजे पर ध्यान देने के बजाय छात्रों की क्षमता और उनके कौशल को महत्व देना है। इसके तहत मार्कशीट में इस्तेमाल होने वाली भाषा में भी बदलाव किया जा सकता है।

इसके अलावा स्कूलों में शनिवार को पढ़ाई के समय को कम करने और नो-बैग डे शुरू करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। वहीं सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं चलाने की तैयारी है।

हालांकि इन बदलावों को लागू करने के लिए संबंधित विभाग की औपचारिक प्रक्रिया और आदेश जरूरी होंगे।

मार्कशीट से हट सकता है ‘फेल’ शब्द

छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करने की कोशिश

बोर्ड परीक्षा का नाम आते ही कई छात्रों के मन में सबसे बड़ा डर फेल होने का होता है। खासकर 10वीं और 12वीं की परीक्षा को लेकर परिवार और समाज की अपेक्षाएं भी छात्रों पर दबाव बढ़ा देती हैं।

शिक्षा विभाग अब इसी दबाव को कम करने की दिशा में काम कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने वाले छात्र को केवल उसके कम अंकों के आधार पर असफल मानने के बजाय उसके आगे की क्षमता और कौशल पर ध्यान देने की बात कही गई है।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर परीक्षा प्रमाणपत्र और मार्कशीट की भाषा में दिखाई दे सकता है।

बताया गया है कि ‘फेल’ शब्द की जगह ‘कौशल के लिए पात्र’ जैसी भाषा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य छात्र को यह संदेश देना है कि परीक्षा में कम अंक आने का मतलब यह नहीं है कि वह जीवन में सफल नहीं हो सकता।

शिक्षा मंत्री ने परीक्षा के तरीके को लेकर कही बड़ी बात

शिक्षा मंत्री की ओर से साझा किए गए संदेश में परीक्षा में अपेक्षा के अनुसार अंक नहीं आने को छात्र की सीमित प्रतिभा का संकेत नहीं मानने की बात कही गई है।

इस सोच के पीछे यह विचार है कि हर छात्र की क्षमता एक जैसी नहीं होती। कोई छात्र पढ़ाई में अच्छा हो सकता है तो कोई खेल, कला, तकनीक, संगीत, हस्तकला या दूसरे व्यावहारिक क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

इसी वजह से परीक्षा परिणाम को छात्र की पूरी क्षमता का अंतिम पैमाना नहीं माना जाना चाहिए।

यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो छात्रों को परीक्षा में कम प्रदर्शन के बाद भी आगे बढ़ने के लिए कौशल आधारित शिक्षा का रास्ता दिया जा सकता है।

‘कौशल के लिए पात्र’ का क्या मतलब होगा?

पढ़ाई के साथ स्किल पर भी ध्यान

‘कौशल के लिए पात्र’ शब्द का उद्देश्य छात्र को असफल घोषित करने के बजाय उसके लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करना है।

उदाहरण के तौर पर यदि कोई छात्र किसी विषय में निर्धारित स्तर के अंक हासिल नहीं कर पाता है, तो उसे आगे विशेष प्रशिक्षण या कौशल आधारित कक्षाओं से जोड़ा जा सकता है।

इसमें कंप्यूटर, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, डिजाइन, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कौशल या स्थानीय रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण शामिल हो सकते हैं।

इस तरह छात्र को केवल परीक्षा दोबारा देने के लिए मजबूर करने के बजाय उसके लिए दूसरी सीखने की व्यवस्था तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

हालांकि कौन-कौन से कौशल सिखाए जाएंगे और यह व्यवस्था किस कक्षा या स्तर पर लागू होगी, इसका अंतिम स्वरूप आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होगा।

शनिवार को स्कूल में सिर्फ हाफ डे?

Bihar Education Department की ओर से स्कूलों में शनिवार के कार्यक्रम को लेकर भी बदलाव की तैयारी है।

प्रस्तावित योजना के अनुसार शनिवार को छात्रों को केवल करीब 3 घंटे 30 मिनट पढ़ाई करनी होगी। यानी शनिवार को स्कूल में पढ़ाई का समय सामान्य दिनों की तुलना में कम रहेगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को सप्ताह के अंत में कुछ राहत देना और उन्हें किताबों के अलावा दूसरी गतिविधियों के लिए समय देना है।

अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो शनिवार को छात्रों के लिए पढ़ाई का दबाव कम हो सकता है।

शनिवार को होगा ‘नो-बैग डे’

किताबों की जगह गतिविधियों पर जोर

शनिवार के बदलावों में सबसे दिलचस्प योजना ‘नो-बैग डे’ की है।

इस दिन छात्रों को सामान्य दिनों की तरह भारी स्कूल बैग लेकर आने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय स्कूल में अलग-अलग गतिविधियां कराई जाएंगी।

इन गतिविधियों में खेल, कला, संगीत, नाटक, कहानी लेखन, चित्रकारी, हस्तकला, विज्ञान से जुड़े प्रयोग, स्थानीय संस्कृति और अन्य रचनात्मक कार्यक्रम शामिल किए जा सकते हैं।

इसका उद्देश्य बच्चों को केवल किताबों और परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय उनकी दूसरी प्रतिभाओं को भी सामने लाना है।

उदाहरण के लिए किसी बच्चे की रुचि चित्रकारी में है तो वह नो-बैग डे पर चित्र बनाने की गतिविधि में हिस्सा ले सकता है। किसी छात्र की रुचि खेल में है तो वह खेल गतिविधि में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

नो-बैग डे से छात्रों को क्या फायदा होगा?

स्कूल में लगातार कई घंटे पढ़ाई करने के बाद बच्चों के लिए रचनात्मक गतिविधियां जरूरी होती हैं। ऐसी गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में मदद कर सकती हैं।

नो-बैग डे का उद्देश्य भी इसी तरह का वातावरण तैयार करना है।

यह दिन छात्रों के लिए केवल आराम का दिन नहीं होगा। उन्हें अलग-अलग गतिविधियों के जरिए कुछ नया सीखने का अवसर मिलेगा।

इससे उन छात्रों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकता है जो पारंपरिक परीक्षा में ज्यादा अच्छे अंक नहीं ला पाते।

10वीं के छात्रों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा में नई तैयारी

एक महीने की विशेष कक्षाओं की योजना

Bihar Board 10th Exam से जुड़े छात्रों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी की जा रही है।

प्रस्तावित योजना के अनुसार जो छात्र मुख्य परीक्षा में किसी विषय में सफल नहीं हो पाते और सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल होते हैं, उन्हें विशेष कक्षाओं का लाभ दिया जा सकता है।

इसके तहत छात्रों के लिए करीब एक महीने की विशेष क्लास चलाने की योजना बताई गई है।

इन कक्षाओं में छात्रों को उन विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिनमें उन्हें परेशानी हुई है। शिक्षकों की मदद से परीक्षा के महत्वपूर्ण हिस्सों को दोबारा समझाया जाएगा और छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार किया जाएगा।

इसका उद्देश्य यह है कि छात्र सप्लीमेंट्री परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें और अपना परिणाम सुधार सकें।

सप्लीमेंट्री परीक्षा वाले छात्रों को क्यों फायदा होगा?

कई बार छात्र किसी एक विषय में कमजोर होने के कारण पूरी परीक्षा में परेशानी का सामना करते हैं। कुछ छात्रों को विषय समझने में समस्या होती है तो कुछ परीक्षा के दबाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते।

एक महीने की विशेष कक्षाओं से ऐसे छात्रों को दोबारा तैयारी करने का समय मिलेगा।

मान लीजिए कोई छात्र गणित में कमजोर है। मुख्य परीक्षा के बाद उसे सामान्य पढ़ाई के बजाय गणित के कठिन अध्यायों पर विशेष अभ्यास कराया जा सकता है।

इसी तरह विज्ञान, अंग्रेजी या किसी अन्य विषय में कमजोर छात्र को संबंधित विषय के अनुसार सहायता दी जा सकती है।

इस व्यवस्था से छात्रों को केवल परीक्षा दोबारा देने के बजाय परीक्षा से पहले व्यवस्थित तैयारी का मौका मिलेगा।

12वीं के छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव

Bihar Board 12th Exam छात्रों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसके बाद उच्च शिक्षा और करियर के कई रास्ते खुलते हैं।

12वीं के बाद छात्र कॉलेज, विश्वविद्यालय, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

ऐसे में परीक्षा का दबाव कम करने की कोशिश छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

अगर परीक्षा में कम अंक आने को छात्र की पूरी क्षमता का अंतिम परिणाम नहीं माना जाता है, तो इससे छात्रों को मानसिक रूप से राहत मिल सकती है।

लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी होगा कि नई व्यवस्था में छात्रों की पढ़ाई का स्तर और विषयों की समझ कमजोर न हो।

क्या इससे परीक्षा आसान हो जाएगी?

नई व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि छात्रों को पढ़ाई नहीं करनी होगी या परीक्षा में बिना तैयारी के पास कर दिया जाएगा।

परीक्षा में छात्रों की विषय संबंधी समझ का मूल्यांकन जरूरी रहेगा। बदलाव का मुख्य उद्देश्य परीक्षा में असफल होने के बाद छात्र को पूरी तरह पीछे छोड़ने के बजाय उसे आगे बढ़ने का दूसरा रास्ता देना है।

इसलिए छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखनी होगी और परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए मेहनत करनी होगी।

शिक्षकों की भूमिका भी बढ़ेगी

सिर्फ परीक्षा नहीं, छात्र की क्षमता पहचानना जरूरी

अगर ये बदलाव लागू होते हैं तो शिक्षकों की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगी।

शिक्षकों को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने के बजाय छात्रों की अलग-अलग क्षमताओं पर भी ध्यान देना होगा।

किस छात्र की रुचि किस क्षेत्र में है, कौन सा छात्र किस विषय में कमजोर है और किस बच्चे को अतिरिक्त सहायता की जरूरत है, इन चीजों को पहचानना जरूरी होगा।

नो-बैग डे जैसी गतिविधियों में भी शिक्षकों की सक्रिय भूमिका होगी।

अभिभावकों के लिए भी बदल सकती है सोच

बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने पर कई बार अभिभावक बच्चों पर ज्यादा दबाव डालते हैं। नई व्यवस्था का एक उद्देश्य यह संदेश देना भी है कि बच्चे की पूरी क्षमता केवल उसकी मार्कशीट से तय नहीं होती।

अगर किसी छात्र को पढ़ाई में परेशानी है लेकिन वह किसी कौशल में अच्छा है तो परिवार को उसकी उस क्षमता को भी पहचानना चाहिए।

हालांकि पढ़ाई का महत्व कम नहीं होगा। जरूरी यह है कि पढ़ाई के साथ छात्र की दूसरी प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले।

छात्रों को अभी क्या करना चाहिए?

जब तक Bihar Board New Rules को लेकर अंतिम आदेश जारी नहीं होता, छात्रों को अपनी पढ़ाई में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

10वीं और 12वीं के छात्रों को पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने, नियमित रिवीजन करने और मॉडल पेपर का अभ्यास करने पर ध्यान देना चाहिए।

सप्लीमेंट्री परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को भी अपनी कमजोरियों की पहचान करके तैयारी शुरू करनी चाहिए।

अगर विशेष कक्षाओं को लेकर औपचारिक आदेश जारी होता है तो छात्रों को उसका पूरा लाभ उठाना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा

इन प्रस्तावित बदलावों को केवल परीक्षा के नियमों में परिवर्तन के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसका संबंध शिक्षा के तरीके में बदलाव से भी है।

पारंपरिक व्यवस्था में परीक्षा और अंक को छात्रों की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है। लेकिन नई सोच में पढ़ाई के साथ कौशल, रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान पर भी जोर दिया जा रहा है।

शनिवार का नो-बैग डे इसी दिशा में एक कदम हो सकता है।

वहीं ‘फेल’ शब्द की जगह सकारात्मक भाषा इस्तेमाल करने का उद्देश्य छात्रों के आत्मविश्वास को बनाए रखना है।

निष्कर्ष

बिहार में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को लेकर प्रस्तावित बदलाव छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ‘फेल’ शब्द को हटाकर ‘कौशल के लिए पात्र’ जैसी भाषा का इस्तेमाल करने, शनिवार को करीब 3 घंटे 30 मिनट की पढ़ाई और नो-बैग डे जैसी योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

इसके साथ ही मैट्रिक के सप्लीमेंट्री छात्रों के लिए एक महीने की विशेष कक्षाओं की योजना भी सामने आई है।

इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करना और उन्हें पढ़ाई के साथ अपनी दूसरी क्षमताओं को विकसित करने का मौका देना है।

हालांकि इन नियमों को लेकर अंतिम स्थिति विभागीय आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए।

फिलहाल छात्रों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि वे परीक्षा की तैयारी जारी रखें। नई व्यवस्था का उद्देश्य मेहनत को खत्म करना नहीं, बल्कि परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने वाले छात्रों को आगे बढ़ने का एक और अवसर देना है।

AK
Author: AK

! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !

Relates News

Advertisement

Rudra enterprises - Devanshu Deepak Jehanabad
⚡ लाइव अपडेट
खबरें लोड हो रही हैं…

लेटेस्ट न्यूज़