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लोकतंत्र के मंदिर का ऐतिहासिक दिन: संविधान पर दो दिवसीय चर्चा, संसद हमले की बरसी पर विशेष स्मरण

लोकतंत्र के मंदिर का ऐतिहासिक दिन: संविधान पर दो दिवसीय चर्चा, संसद हमले की बरसी पर विशेष स्मरण
A Significant Day for the Temple of Democracy: Two-Day Debate on Constitution in Parliament, Marks Anniversary of Terrorist Attack on Parliamen
A Significant Day for the Temple of Democracy: Two-Day Debate on Constitution in Parliament, Marks Anniversary of Terrorist Attack on Parliamen

पिछले महीने शुरू हुए शीतकालीन सत्र में आज और कल महत्वपूर्ण है। देश में संविधान लागू हुए 75 साल पूरे हो चुके हैं। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में 2 दिन संविधान के विषय पर चर्चा होगी। वहीं आज संसद पर हुए आतंकी हमले की 23वीं बरसी भी है। आतंकियों ने 13 दिसंबर साल 2001 को संसद भवन पर हमला किया था। आतंकी हमले में जान गंवाने वाले शहीदों को आज सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद श्रद्धांजलि देंगे। वहीं संविधान दिवस पर भी सदन में आज चर्चा होनी है। भारत सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस पर पुराने संसद भवन के सेंट्रल हॉल और संविधान सदन में साल भर चलने वाले राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की थी। संविधान लागू होने के 75 साल को समर्पित अभियान के तहत ही लोकसभा में संविधान के विषय पर चर्चा तय की गई है। शुक्रवार व शनिवार को होने वाली दो दिवसीय चर्चा के मद्देनजर गुरुवार को बीजेपी व कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी कर दोनों दिनों में सदन के भीतर रहने का निर्देश दिया है।

लोकसभा में जहां 13-14 दिसंबर को चर्चा होनी है तो वहीं राज्यसभा में आगामी 16-17 को इस पर चर्चा होगी। इन तारीखों को तय करने के पीछे संविधान के निर्माण से जुड़ा एक ऐतिहासिक तथ्य भी है। 13 दिसंबर, 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ पेश किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को लोकसभा में संविधान पर दो दिवसीय बहस का जवाब देंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लोकसभा में संविधान पर चर्चा की शुरुआत करेंगे, जबकि राज्यसभा में इसी तरह की चर्चा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शुरू किए जाने की संभावना है। इससे पहले शाह ने संसद भवन स्थित अपने कार्यालय में नड्डा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू सहित भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक बैठक की। कांग्रेस के संसदीय रणनीतिक समूह ने भी संसद के शीतकालीन सत्र और संविधान पर चर्चा को लेकर बातचीत की।संविधान पर चर्चा को सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों ही अपने अपने तरीके से अपने प्रतिपक्षी को घेरने का एक मौके के तौर पर देख रहे हैं।

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दरअसल, जिस तरह से राज्यसभा में सभापति के रुख को लेकर राज्यसभा में टकराव व अविशवास प्रस्ताव मुद्दे को लेकर विपक्ष आक्रामक दिख रहा था और सोरोस, अदाणी जैसे मुद्दों पर संसद में लगातार गतिरोध व हंगामा चल रहा था, उसके मद्देनजर संविधान चर्चा मौके पर सदन में हंगामे का खतरा दिख रहा था, लेकिन बुधवार को जिस तरह से राहुल गांधी ने स्पीकर से मिलकर सदन चलाने के लिए अपील करते हुए सहयोग का हाथ बढ़ाया और उसके बाद पिछले दो दिनों से सदन का कामकाज चला, उससे साफ है कि विपक्ष इस मौके को गंवाना नहीं चाहता। संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर को समाप्त होगा। विपक्ष की ओर से राहुल गांधी द्वारा विपक्ष के नेता के रूप में लोकसभा में संविधान पर चर्चा शुरू किए जाने की संभावना थी लेकिन कुछ नेताओं ने रणनीति में बदलाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा विपक्षी खेमे के लिए बहस की शुरुआत कर सकती हैं जो लोकसभा में उनका पहला भाषण होगा।

23 साल पहले आज ही के दिन 13 दिसंबर, 2001 को संसद पर आतंकी हमला हुआ था–

23 साल पहले आज ही के दिन यानी 13 दिसंबर, 2001 को संसद पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें सुरक्षाकर्मियों समेत नौ लोग मारे गए थे और 18 लोग घायल हुए थे। बस गनीमत ये रही कि कोई सांसद इनका निशाना नहीं बना। 13 दिसंबर 2001 का दिन था। संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा था। महिला आरक्षण विधेयक पर बहस के दौरान हंगामे के चलते सुबह 11:02 बजे लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी।इस कारण उस वक्त के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी समेत कई मंत्री संसद भवन से जा चुके थे, लेकिन उस वक्त के देश के गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी, प्रमोद महाजन, कई मंत्री, सांसद और पत्रकार समेत 100 से ज्यादा वीआईपी संसद भवन के भीतर मौजूद थे। घड़ी में करीब 11:30 बज रहे थे। उपराष्ट्रपति कृष्णकांत के सिक्योरिटी गार्ड उनके बाहर आने का इंतजार कर रहे थे। तभी गृह मंत्रालय का फर्जी स्टीकर लगाए एक सफेद रंग की एंबेसडर कार गेट नंबर-12 से संसद भवन में घुस आई। कार में हथियारों का जखीरा था और पांच आतंकी बैठे थे।


कारण कारण गेट नंबर-12 पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को चकमा देने में सफल हो गई। कार आगे बढ़ी तो अचानक सुरक्षाकर्मियों को कुछ अजीब लगा तो वे उस एंबेसडर कार के पीछे दौड़े। इस बीच, आतंकियों की कारण उपराष्‍ट्रपति की खड़ी कार से टकरा गई। घबराकर आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों के पास एके-47, पिस्टल और हैंड ग्रेनेड था, जबकि उस वक्त सिक्योरिटी गार्ड निहत्थे हुआ करते थे।गोलियां की आवाज सुनकर सीआरपीएफ की बटालियन एक्टिव हो गई। उपराष्ट्रपति कृष्णकांत के सिक्योरिटी गार्ड्स और सुरक्षाकर्मियों ने पलटवार किया। आनन-फानन सभी कंपाउंड के गेट बंद कर दिए गए। संसद में मौजूद सभी मंत्री, सांसद और अधिकारियों को भीतर ही सुरक्षित रहने के लिए कहा गया। इधर एक आतंकी ने गेट नंबर-1 से संसद में घुसने की कोशिश की तो सुरक्षाकर्मियों ने उसे वहीं मार गिराया। इस दौरान उसके शरीर पर लगे बम फट गया।संसद भवन जंग का मैदान बन गया था। दोनों ओर से गोलीबारी जारी थी।

अन्‍य चार आतंकियों ने गेट नंबर-4 से सदन में घुसने की कोशिश की। इनमें से तीन को सुरक्षाकर्मियों ने मार गिराया। आखिरी आतंकी गेट नंबर-5 की ओर भागा, लेकिन वो भी सुरक्षाकर्मियों की गोली का शिकार हो गया। जवानों और आतंकवादियों के बीच सुबह 11:30 बजे शुरू हुई मुठभेड़ शाम 4 बजे तक चली। संसद हमले में मारे गए पांचों आतंकियों की पहचान- हमजा, हैदर उर्फ तुफैल, राणा, रणविजय और मोहम्‍मद के तौर पर हुई। आतंकी हमले की दिल्‍ली पुलिस ने जांच की। दिल्‍ली पुलिस ने दो दिन बाद यानी 15 दिसंबर 2001 को जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी और संसद हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु को पकड़ा। उसके साथ ही एसएआर गिलानी, अफशान गुरु और शौकत हुसैन को गिरफ्तार किया। हमला लश्‍कर और जैश-ए-मोहम्‍मद आतंकियों ने किया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद गिलानी और अफशान को बरी कर दिया, जबकि अफजल गुरु को फांसी की सजा बरकरार रखी। शौकत हुसैन की मौत की सजा को घटाकर 10 साल की जेल की सजा दी। 9 फरवरी 2013 को अफजल गुरु को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया।

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Author: AK

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