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चिन्नास्वामी स्टेडियम बोले तो गेंदबाजी के लिए एकदम कब्रगाह जहाँ बॉलर सिर्फ मैच का महज हिस्सा होते हैं क्योंकि यह पूरा का पूरा मैच हाई स्कोरिंग मैच होता है और वह हुआ चेन्नई और आरसीबी के बीच हुए मैच में।चेन्नई ने टॉस हारकर पहले बैटिंग की और क्या खूब की। ओपनर डेवन कॉन्वे ने 45 गेंदों पर 83 रन बनाए। जबकि शिवम दुबे ने सिर्फ़ 27 गेंदों पर 52 रन बना डाले. अजिंक्य रहाणे तो इस बार के आईपीएल में एक अलग ही रूप में दिख रहे हैं उन्होंने ने 20 गेंदों पर 37 रन की पारी खेली और स्कोर बोर्ड पर CSK ने अपने 20 ओवर्स में छह विकेट खोकर 226 रन टांग दिए।
मोहम्मद सिराज, वेन पर्नेल, विजय कुमार, ग्लेन मैक्सवेल, वानिंदु हसरंगा और हर्षल पटेल सबको एक एक विकेट मिला। फिर बारी आई आरसीबी की अपने 227 रनों के लक्ष्य का पीछा करने लेकिन विराट कोहली पहले ओवर में ही बोल्ड हो गए। कप्तान फाफ डू प्लेसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया और उनका साथ दिया मैक्सवेल ने। जवाब में RCB के दो सीनियर ओवरसीज बैटर्स ने चेन्नई को बोलर्स को जमकर धुना। दोनों ने 61 गेंदों पर 126 रन की पार्टनरशिप कर डाली। मैक्सवेल और डु प्लेसी की बैटिंग देखकर लग रहा था कि मैच 20 ओवर से पहले ही खत्म हो जाएगा क्योंकि यह साझेदारी आईपीएल की तीसरी सबसे तेज शतकीय साझेदारी थी।

लेकिन फिर चला महेंद्र सिंह धोनी का कमाल और बॉलिंग चेंज करते ही मैक्सवेल पवेलियन लौट चले और धोनी से शानदार कैच लिया क्योंकि इससे पहले फाफ के दो दो कैची छुट चुके थे। मैक्सवेल 36 गेंदों पर 76 रन बनाकर आउट हुए। धोनी यहीं नहीं रुके. उन्होंने 14वें ओवर की आखिरी गेंद पर RCB की बची-खुची उम्मीदें भी ध्वस्त कर दीं. इस बार बोलर मोईन अली थे. डु प्लेसी ने इस गेंद पर वही गलती की, जो मैक्सी से हुई थी. और गेंद एक बार फिर से खड़ी हो गई. स्टंप्स की लाइन पर पड़ी इक गेंद को डु प्लेसी स्लॉग स्वीप करना चाहते थे. एज लगा, गेंद बहुत ऊपर गई. धोनी फिर से आए और एक आसान से कैच पकड़ डु प्लेसी को वापस भेज दिया।
हालंकि इसके बाद भी उम्मीदें बची थी और धोनी का एक स्टंपिंग विवाद का कारण बना हालांकि वह स्टंपिंग नहीं मानी गई लेकिन पंद्रहवें ओवर की पांचवीं गेंद विकेट के पीछे नहीं, आगे से कलेक्ट की थी यानी कार्तिक को स्टंप करने की जल्दी में माही नियम भूल गए थे। विकेट के आगे कलेक्ट की गई गेंद अपने आप नो बॉल हो जाती है लेकिन तमाम रीप्लेज के बावजूद अंपायर ने यह नहीं देख पाए और RCB वाले इतने होपलेस थे, कि उन्होंने रिव्यू ही नहीं लिया। क्योंकि MCC के नियम संख्या 27.3 के मुताबिक,
‘गेंद खेल में आने से लेकर जब तक बल्ले या स्ट्राइकर को ना छू ले, या फिर विकेट ना क्रॉस कर जाए, या फिर स्ट्राइकर रन लेने की कोशिश ना करे, स्ट्राइकर एंड पर विकेटकीपर को पूरी तरह से विकेट के पीछे ही रहना है. अगर विकेटकीपर इस नियम का पालन करने में असमर्थ रहता है, तो स्ट्राइकर एंड का अंपायर इसे नो बॉल करार दे दे।
इस तरह से सीएसके ने यह मैच बड़ी मुश्किल से 8रनों से जीता है। इस मैच में सीएसके की तरफ से 17 छक्के और आरसीबी की तरफ से 16छक्के लगे मतलब कुल 33 छक्को के साथ यह मैच पूरी तरह से दर्शकों को रोमांच करने वाला था।
अमन पाण्डेय
Author: AK
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