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आज नीति आयोग के शासकीय परिषद की सातवीं अहम बैठक राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में होने वाली है। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्रियान्वयन के साथ ही देश को तिलहन-दलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने व शहरी प्रशासन के मामले पर विचार-विमर्श किया जायेगा।
वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) रविवार को होने वाली नीति आयोग की 7वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का बहिष्कार करेंगे। राज्यों के प्रति केंद्र की भेदभावपूर्ण प्रवृत्ति के खिलाफ उन्होंने यह कदम उठाया। इस संबंध में केसीआर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा। उन्होंने कहा कि मैं विरोध के रूप में दिल्ली में होने वाली नीति आयोग की 7वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का हिस्सा नहीं बनूंगा।
बता दें कि केसीआर ने इस बैठक में ना शामिल होने के बाद के साथ-साथ यह भी कहा है कि राज्यों के साथ केंद्र द्वारा भेदभाव करने और समान भागीदार के रूप में नहीं मानने के विरोध में नीति आयोग की बैठक में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं, नीति आयोग ने कहा, नीति आयोग के गवर्निंग काउंसिल की बैठक में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के नहीं शामिल होने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। आयोग ने कहा, नीति आयोग की टीम केसीआर से हैदराबाद में मिली थी और राज्य के विकास के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की थी। इसके बाद से नीति आयोग की ओर से बैठक के अनुरोधों पर सीएम ने जवाब नहीं दिया।
नीति आयोग के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में भारत सरकार ने तेलंगाना राज्य के लिए जल जीवन मिशन के तहत 3982 करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन राज्य ने केवल 200 करोड़ रुपये निकालने का फैसला किया। इसके अलावा 2014-2015 से 2021-2022 के दौरान PMKSY-AIBP-CADWM के तहत तेलंगाना को 1195 करोड़ रुपये जारी किए गए।
नीति आयोग ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री तेलंगाना ने नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भाग नहीं लेने का फैसला किया। गवर्निंग काउंसिल एक ऐसा मंच है जहां सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व विकास संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है और राष्ट्रीय विकास के लिए उचित समाधान पर सहमत होता है।
Author: AK
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