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नई दिल्ली, 18 जुलाई। आम आदमी पार्टी के विधायक हैं अमानतुल्लाह खान। अक्सर चर्चाओं में बने रहते हैं चाहे वह विवाद हो या फिर उनका कोई बयान। एक बार फिर से उनकी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मामला है दिल्ली वक्फ बोर्ड में हुई नियुक्तियों में धांधली और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाना। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष व वर्तमान में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान और बोर्ड के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी महबूब आलम के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।
सक्सेना ने जिस आधार पर यह अनुमति दी है उसके अनुसार, अमानतुल्लाह खान और महबूब आलम पर नियमों, विनियमों और कानून के जानबूझकर और आपराधिक उल्लंघन, पद का दुरुपयोग और सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप है। उपराज्यपाल ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19 और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 197 के तहत यह अनुमति दी है।
जिस भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई यह जांच जांच कर रही थी वह 2016 में सबके सामने आया था। लेकिन तब से यह ठंडे बस्ते में है। इसी साल मई के महीने में यह मामला तूल पकड़ा। सीबीआई की जांच सरकार के राजस्व विभाग के एसडीएम (मुख्यालय) ने नवंबर 2016 में वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद शुरू की गई थी आरोप था कि अमानतुल्लाह खान बोर्ड में स्वीकृत और गैरस्वीकृत पदों पर मनमाने ढंग से नियुक्तियां कर दी हैं।
सीबीआई की जांच जब पूरी हो गई है और आरोप को लेकर उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं। सीबीआई ने मई 2022 में उपराज्यपाल (ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी ) से आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी। जिसके बाद अब अमानतुल्लाह खान की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है।
सीबीआई ने जो रिपोर्ट सौंपी है उसके अनुसार, अमानतुल्लाह खान ने महबूब आलम के साथ मिलकर अपने पद का दुरुपयोग किया, जानबूझकर नियमों की अनदेखी की और हजारों योग्य व्यक्तियों की अनदेखी कर भर्ती प्रक्रियाओं में हेरफेर कर मनमाने ढंग से अपने चहेतों की नियुक्ति की। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। अगर नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होती तो योग्य लोगों को रोजगार मिल सकता था। अपने खास और पहचान वाले व्यक्तियों को अवांछनीय और अनधिकृत लाभ पहुंचाने के लिए अमानतुल्ला खान ने समानता और अवसर के अधिकार के मूल सिद्धांत को दरकिनार कर दिया था। मतलब ये इसमें आशंका भी है कि इस पूरी प्रक्रिया में पैसों की भी लेन देन खूब जोरो से हुई है।
अगर मुक़दमा चलना शुरू होता है तो सीबीआई के अनुसार, उनके पास खान और आलम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1) (डी) और धारा 13 (2) के तहत भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 120-बी के तहत अदालत में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
Author: AK
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