नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को खीर, मिश्री, बताशा और शहद का भोग लगाएं। जानें पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र और आराधना का महत्व।
Maa Chandraghanta Bhog: 5 Offerings for Navratri Day 3

Navratri Day 3: आज मां चंद्रघंटा को लगाएं इन चीजों का भोग
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। देवी का यह स्वरूप साहस, शक्ति और निडरता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है और मन में सकारात्मकता आती है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ देवी को प्रिय भोग अर्पित करने की भी परंपरा है।
मान्यता है कि मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाइयां, खीर, मिश्री, बताशा और शहद अर्पित करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु देवी को सफेद रंग की मिठाइयों का भोग भी लगाते हैं। पूजा के दौरान लाल फूल, अक्षत, रोली और सिंदूर अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि तथा भोग की सामग्री में अंतर हो सकता है।
आइए जानते हैं कि Navratri Day 3 पर मां चंद्रघंटा को किन चीजों का भोग लगाया जाता है, उनकी पूजा कैसे की जाती है और देवी के इस स्वरूप का धार्मिक महत्व क्या है।
मां चंद्रघंटा कौन हैं और उनकी पूजा क्यों होती है?
मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरा स्वरूप हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक चित्रों में देवी को शेर या बाघ पर सवार दिखाया जाता है। उनके अनेक हाथों में अस्त्र-शस्त्र और अन्य प्रतीकात्मक वस्तुएं होती हैं।
देवी का यह स्वरूप शक्ति और करुणा, दोनों का संदेश देता है। एक ओर मां चंद्रघंटा को दुष्ट शक्तियों का सामना करने वाली देवी माना जाता है, तो दूसरी ओर भक्तों के प्रति उनकी कृपा और संरक्षण की भावना भी जुड़ी है।
नवरात्रि के तीसरे दिन श्रद्धालु देवी की पूजा करके साहस, आत्मविश्वास और सुख-शांति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की आराधना से भय और नकारात्मक विचारों पर विजय पाने की प्रेरणा मिलती है।
मां चंद्रघंटा के नाम का क्या अर्थ है?
‘चंद्रघंटा’ नाम दो शब्दों से मिलकर बना है—चंद्र और घंटा। देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण उनका यह नाम पड़ा। घंटा धार्मिक परंपराओं में जागरूकता, शुभता और साधना से जुड़ा माना जाता है।
देवी के इस स्वरूप का एक संदेश यह भी है कि शक्ति का उपयोग अन्याय और कठिनाइयों का सामना करने के लिए किया जाना चाहिए। इसलिए मां चंद्रघंटा की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि साहस और दृढ़ता के आदर्श का स्मरण भी है।
मां चंद्रघंटा को लगाएं इन 5 चीजों का भोग
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को कई प्रकार के सात्विक खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। इनमें दूध से बनी मिठाइयां और मीठे प्रसाद को विशेष स्थान दिया जाता है। नीचे कुछ प्रचलित भोग के विकल्प दिए गए हैं।
1. दूध और दूध से बनी मिठाइयां
मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजें अर्पित करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। श्रद्धालु देवी को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगा सकते हैं। पूजा में भोग का उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करना होता है।
घर पर खीर तैयार करते समय दूध, चावल और थोड़ी चीनी का इस्तेमाल किया जा सकता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसमें मेवे भी मिलाए जा सकते हैं। भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बांटा जा सकता है।
2. बताशा और मिश्री
बताशा और मिश्री भी देवी पूजा में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक मीठे प्रसाद हैं। इन्हें अर्पित करना सरल है और इनके लिए विशेष तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती।
कई घरों में पूजा की थाली में बताशा, मिश्री और फल रखे जाते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा तथा उपलब्ध सामग्री के अनुसार इनमें से किसी एक या दोनों का भोग लगा सकते हैं।
धार्मिक मान्यता में मिठास को शुभता और प्रसन्नता से जोड़ा जाता है। इसीलिए पूजा में मीठा प्रसाद चढ़ाने की परंपरा अनेक धार्मिक अवसरों पर देखने को मिलती है।
3. मखाने की खीर
मां चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगाना भी कई श्रद्धालु शुभ मानते हैं। यह नवरात्रि के लिए एक सात्विक प्रसाद का विकल्प हो सकता है।
मखाने की खीर बनाने के लिए दूध, मखाने और स्वादानुसार चीनी की जरूरत होती है। मखानों को हल्का भूनकर छोटे टुकड़ों में तोड़ा जा सकता है। इसके बाद उन्हें दूध में पकाकर खीर तैयार की जाती है। जरूरत के अनुसार इलायची भी मिलाई जा सकती है।
यदि घर में कोई व्यक्ति दूध या मेवों से एलर्जी रखता है, तो उसके लिए उपयुक्त विकल्प चुनना चाहिए। प्रसाद तैयार करते समय स्वच्छता और सामग्री की ताजगी का ध्यान रखना भी जरूरी है।
4. शहद
मां चंद्रघंटा की पूजा में शहद अर्पित करने की परंपरा भी कुछ स्थानों पर प्रचलित है। श्रद्धालु पूजा की थाली में थोड़ी मात्रा में शहद रखकर देवी को अर्पित कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में शहद को शुभता और मधुरता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, शहद चढ़ाने से किसी बीमारी के ठीक होने या स्वास्थ्य संबंधी विशेष लाभ मिलने का दावा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। इसे धार्मिक आस्था और पूजा की परंपरा के रूप में ही देखना चाहिए।
एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए। प्रसाद बांटते समय बच्चों और अन्य लोगों की उम्र तथा स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का ध्यान रखना उचित है।
5. सफेद रंग की मिठाइयां
मां चंद्रघंटा को सफेद रंग की मिठाइयां अर्पित करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। श्रद्धालु खीर, रसमलाई या दूध से बनी अन्य मिठाइयों को भोग के रूप में रख सकते हैं।
सफेद रंग को कई धार्मिक परंपराओं में शांति, पवित्रता और सादगी से जोड़ा जाता है। पूजा में इस रंग की मिठाइयां रखने का उद्देश्य देवी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है। जरूरी नहीं कि भोग के लिए महंगी मिठाई ही खरीदी जाए। घर में तैयार किया गया सरल प्रसाद भी श्रद्धा के साथ अर्पित किया जा सकता है।
Navratri Day 3 Puja Vidhi: मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें?
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा श्रद्धा और स्वच्छता के साथ की जाती है। पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य रूप से श्रद्धालु इन चरणों का पालन कर सकते हैं।
- सुबह स्नान करें: दिन की शुरुआत स्नान और स्वच्छ वस्त्र पहनकर करें।
- पूजा स्थल तैयार करें: मां दुर्गा या मां चंद्रघंटा की प्रतिमा अथवा तस्वीर को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
- दीपक जलाएं: देवी का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं और पूजा का संकल्प लें।
- रोली और अक्षत अर्पित करें: अपनी परंपरा के अनुसार रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें।
- लाल फूल चढ़ाएं: मां चंद्रघंटा की पूजा में लाल फूल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है। गुड़हल के फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं।
- भोग लगाएं: खीर, मिश्री, बताशा, शहद या अपनी परंपरा के अनुसार तैयार सात्विक प्रसाद अर्पित करें।
- मंत्र-जप और आरती करें: मां चंद्रघंटा के मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करके प्रसाद बांटें।
पूजा के दौरान मन को शांत रखना और श्रद्धा के साथ देवी का स्मरण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसी कारणवश सभी पूजन सामग्री उपलब्ध न हो, तो सरल तरीके से भी पूजा की जा सकती है।
मां चंद्रघंटा की पूजा में किन बातों का रखें ध्यान?
नवरात्रि के तीसरे दिन पूजा करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जा सकता है।
- पूजा स्थल और भोग तैयार करने वाली जगह को साफ रखें।
- प्रसाद ताजा और स्वच्छ सामग्री से तैयार करें।
- फूल और पूजन सामग्री अपनी परंपरा के अनुसार चुनें।
- पान के पत्ते, सुपारी या अन्य सामग्री अर्पित करने की परंपरा हो, तो सामग्री को साफ और सही अवस्था में रखें।
- पूजा के समय जल्दबाजी से बचें और मंत्र-जप श्रद्धापूर्वक करें।
- व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत के अनुसार भोजन और पानी का ध्यान रखें।
धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि किसी को मधुमेह, अन्य स्वास्थ्य समस्या या नियमित दवा लेने की जरूरत है, तो उपवास के तरीके को अपनी स्थिति के अनुसार तय करना चाहिए।
मां चंद्रघंटा का मंत्र और उसका महत्व
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना के लिए यह मंत्र प्रचलित है:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। कुछ पूजा पद्धतियों में मंत्र-जप की निश्चित संख्या रखी जाती है, लेकिन सभी के लिए एक ही संख्या अनिवार्य नहीं मानी जानी चाहिए। पूजा में श्रद्धा, एकाग्रता और नियमितता को महत्व दिया जाता है।
मां चंद्रघंटा की स्तुति में यह श्लोक भी प्रचलित है:
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
मंत्र या श्लोक का पाठ करते समय उसके भाव को समझना भी उपयोगी है। देवी का स्मरण भक्तों को साहस, संयम और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा दे सकता है।
मां चंद्रघंटा की पूजा में कौन से रंग के कपड़े पहनें?
नवरात्रि में हर दिन के लिए विशेष रंगों का उल्लेख कई क्षेत्रीय परंपराओं और पंचांग आधारित सूचियों में मिलता है। मां चंद्रघंटा की पूजा के दौरान कुछ श्रद्धालु लाल, पीले, सफेद या सुनहरे रंग के कपड़े पहनना पसंद करते हैं।
हालांकि, नवरात्रि के दिन से जुड़े रंगों की सूची हर परंपरा में एक जैसी नहीं होती। इसलिए अपने परिवार या स्थानीय पूजा परंपरा के अनुसार वस्त्र चुन सकते हैं। पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात स्वच्छता, सहजता और श्रद्धा है।
मां चंद्रघंटा की आराधना से क्या संदेश मिलता है?
मां चंद्रघंटा का स्वरूप साहस, धैर्य और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा के माध्यम से भक्त कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर निर्णय लेने और अन्याय के सामने मजबूती से खड़े होने की प्रेरणा लेते हैं।
देवी का संदेश रोजमर्रा के जीवन में भी उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, किसी विद्यार्थी को परीक्षा के दबाव में नियमित पढ़ाई और आत्मविश्वास बनाए रखने की जरूरत होती है। किसी कामकाजी व्यक्ति को कठिन परिस्थिति में धैर्य से निर्णय लेना पड़ सकता है। परिवार में भी कई बार संवाद, संयम और समझदारी से समस्याओं का समाधान निकलता है।
इस तरह मां चंद्रघंटा की कथा धार्मिक आस्था के साथ-साथ जीवन में साहस और जिम्मेदारी का महत्व भी याद दिलाती है।
निष्कर्ष
शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन श्रद्धालु दूध से बनी मिठाइयां, खीर, मखाने की खीर, मिश्री, बताशा और शहद जैसे भोग अपनी परंपरा के अनुसार अर्पित कर सकते हैं। पूजा में फूल, रोली, अक्षत और मंत्र-जप का भी विशेष स्थान है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना साहस, धैर्य और आत्मविश्वास की प्रेरणा देती है। पूजा का उद्देश्य केवल मनोकामना करना ही नहीं, बल्कि देवी के गुणों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना भी है। श्रद्धा, स्वच्छता और सादगी के साथ की गई पूजा नवरात्रि के इस पावन दिन को विशेष बना सकती है।
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !



















