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Bihar MLC Election 2026: 8 सीटों पर किसका होगा कब्जा?

बिहार MLC Election 2026 में 8 सीटों पर चुनाव होना है। 30 जिलों के मतदाता 8 विधान पार्षद चुनेंगे। प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला रोचक होगा। Bihar MLC Election 2026: 8 Seats, Big Fight बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद अब विधान परिषद चुनाव की आहट ने सियासी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। … Read more

Bihar MLC Election 2026: 8 Seats, Big Fight

बिहार MLC Election 2026 में 8 सीटों पर चुनाव होना है। 30 जिलों के मतदाता 8 विधान पार्षद चुनेंगे। प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला रोचक होगा।

Bihar MLC Election 2026: 8 Seats, Big Fight

बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद अब विधान परिषद चुनाव की आहट ने सियासी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। Bihar MLC Election 2026 में विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों पर चुनाव होना है। खास बात यह है कि चुनाव सिर्फ आठ सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। इन सीटों के निर्वाचन क्षेत्रों में शामिल करीब 30 जिलों के मतदाता अपने प्रतिनिधियों को चुनेंगे। इन जिलों में लगभग 150 विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

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वर्तमान विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग की ओर से अगले कुछ सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की संभावना है। चुनाव की तारीख सामने आने से पहले ही राजनीतिक दलों ने संभावित उम्मीदवारों और समीकरणों पर काम शुरू कर दिया है।

इस बार मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रशांत किशोर और जन सुराज की सक्रियता ने बिहार की चुनावी राजनीति में एक नया कोण जोड़ दिया है। दूसरी ओर, राजद की ओर से छह सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा और एनडीए के भीतर कुछ सीटों पर दिख रही अलग-अलग दावेदारी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

8 सीटों पर होना है विधान परिषद चुनाव

बिहार विधान परिषद में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग तरीके से होता है। इन क्षेत्रों में संबंधित श्रेणी के पात्र मतदाता मतदान करते हैं।

2026 में जिन आठ सीटों पर चुनाव प्रस्तावित है, उनमें चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र

  • पटना: प्रो. नवल किशोर यादव, भाजपा
  • दरभंगा: डॉ. मदन मोहन झा, कांग्रेस
  • सारण: आफाक अहमद, निर्दलीय
  • तिरहुत: संजय कुमार सिंह, भाकपा

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र

  • पटना: नीरज कुमार, जदयू
  • दरभंगा: सर्वेश कुमार, निर्दलीय
  • कोसी: एनके यादव, भाजपा
  • तिरहुत: बंशीधर व्रजवासी, निर्दलीय

इन आठ सीटों पर मौजूदा सदस्यों का प्रदर्शन, स्थानीय संगठन और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

30 जिलों के मतदाता करेंगे फैसला

Bihar Legislative Council Election की खासियत यह है कि इसमें सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह सभी मतदाता सीधे मतदान नहीं करते। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग मतदाता सूची होती है।

2026 के चुनाव में करीब 30 जिलों के मतदाता आठ विधान पार्षद चुनेंगे। इन निर्वाचन क्षेत्रों का विस्तार कई विधानसभा क्षेत्रों तक है। यही वजह है कि सीटों की संख्या भले ही आठ हो, लेकिन राजनीतिक असर इससे काफी बड़ा हो सकता है।

विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों की भौगोलिक सीमा भी अलग-अलग है। पटना स्नातक क्षेत्र में जहां तीन जिले आते हैं, वहीं कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र 14 जिलों तक फैला हुआ है।

पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की नजर हैट्रिक पर

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र इस बार सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो सकता है। यहां जदयू के नीरज कुमार लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में उन्होंने राजद के आजाद गांधी को हराया था।

अब उनके सामने चौथी बार जीत दर्ज करने की चुनौती होगी। अगर वह फिर जीतते हैं तो यह उनके राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत करेगा।

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पटना के अलावा नालंदा और नवादा जिले शामिल हैं। इसके दायरे में कुल 25 विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

इस सीट पर जदयू के सामने अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने की चुनौती होगी। विपक्ष के लिए भी यह सीट महत्वपूर्ण होगी क्योंकि यहां मजबूत उम्मीदवार उतारकर सत्तारूढ़ गठबंधन को चुनौती देने की कोशिश की जा सकती है।

तिरहुत स्नातक सीट पर बंशीधर व्रजवासी फिर मैदान में

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भी खास नजरों में रहेगा। यह सीट देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी। इसके बाद 2024 में हुए उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर व्रजवासी ने जीत हासिल की थी।

अब उनके सामने अपनी सीट को दोबारा बचाने की चुनौती होगी।

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिले शामिल हैं। यहां कुल 28 विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

बंशीधर व्रजवासी के लिए चुनौती इसलिए भी बढ़ सकती है क्योंकि इस बार राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पहले चुनाव में जीत हासिल करना अलग बात है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच सीट बचाना बड़ी परीक्षा होगी।

कोसी स्नातक सीट सबसे बड़े क्षेत्र में

कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र भौगोलिक विस्तार के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण सीटों में से एक है। इसके अंतर्गत 14 जिले आते हैं।

इनमें सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, भागलपुर और बांका शामिल हैं।

इस क्षेत्र में कुल 64 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। भाजपा के एनके यादव वर्तमान विधान पार्षद हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने राजद के नितेश कुमार को हराया था।

भाजपा के लिए इस सीट को दोबारा जीतना महत्वपूर्ण होगा। वहीं विपक्षी दल इतने बड़े निर्वाचन क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अलग रणनीति बना सकते हैं।

इतने बड़े क्षेत्र में चुनाव अभियान चलाना भी उम्मीदवारों के लिए चुनौती होगा। मतदाताओं तक पहुंचने, अलग-अलग जिलों में संगठन तैयार करने और स्थानीय मुद्दों को समझने की क्षमता यहां निर्णायक बन सकती है।

दरभंगा स्नातक सीट पर निर्दलीय सर्वेश कुमार की परीक्षा

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सर्वेश कुमार वर्तमान विधान पार्षद हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने जदयू के दिलीप कुमार चौधरी को हराकर जीत हासिल की थी।

इस निर्वाचन क्षेत्र में दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले शामिल हैं। कुल 37 विधानसभा क्षेत्र इसके दायरे में आते हैं।

सर्वेश कुमार के सामने इस बार चुनौती पहले से अलग होगी। एक तरफ उनके पास मौजूदा विधायक परिषद सदस्य के रूप में अनुभव और पहचान है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के जरिए मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी आसान नहीं होगी राह

चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में भी राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा दांव पर होगी।

पटना शिक्षक सीट

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के प्रो. नवल किशोर यादव लंबे समय से पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस सीट पर भाजपा का प्रभाव करीब तीन दशक से बताया जाता है।

ऐसे में भाजपा के लिए इस सीट को बरकरार रखना महत्वपूर्ण होगा। शिक्षक मतदाताओं के बीच स्थानीय शैक्षणिक मुद्दे, सेवा शर्तें और संगठनात्मक संपर्क चुनावी अभियान के प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं।

दरभंगा शिक्षक सीट

दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा वर्तमान विधान पार्षद हैं। कांग्रेस के लिए यह सीट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महागठबंधन की व्यापक रणनीति का हिस्सा बन सकती है।

सारण शिक्षक सीट

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आफाक अहमद निर्दलीय विधान पार्षद हैं। यहां राजनीतिक दलों के उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

तिरहुत शिक्षक सीट

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाकपा के संजय कुमार सिंह वर्तमान सदस्य हैं। वाम दलों के लिए इस सीट को बचाना महत्वपूर्ण होगा।

प्रशांत किशोर की एंट्री से बदल सकता है चुनावी गणित

इस Bihar MLC Election 2026 में सबसे बड़ा नया राजनीतिक सवाल जन सुराज की भूमिका को लेकर है। प्रशांत किशोर की सक्रियता ने पहले ही बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है।

विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों पर उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय नेटवर्क और मतदाताओं से सीधा संपर्क काफी मायने रखता है। ऐसे में अगर जन सुराज इन सीटों पर सक्रिय रूप से चुनाव लड़ता है, तो कई जगह मुकाबले का समीकरण बदल सकता है।

हालांकि किसी पार्टी या संगठन की वास्तविक ताकत का आकलन चुनाव कार्यक्रम और उम्मीदवारों की अंतिम घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

राजद ने छह सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए

राजद की ओर से छह सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाने के बाद चुनावी गतिविधियां तेज हुई हैं। इससे महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और सहयोगी दलों की रणनीति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

खास तौर पर कांग्रेस के साथ संभावित तालमेल महत्वपूर्ण होगा। विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार का व्यक्तिगत प्रभाव और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में संगठन की ताकत कई बार पार्टी के सामान्य वोट आधार से ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

इसलिए उम्मीदवार चयन के बाद हर सीट पर स्थानीय समीकरणों को अलग-अलग देखना होगा।

एनडीए में भी दावेदारी ने बढ़ाई हलचल

एनडीए के भीतर भी कुछ सीटों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। मोकामा विधायक अनंत सिंह की ओर से अनुज सिंह के समर्थन की घोषणा ने संबंधित सीट को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा और जदयू सहित एनडीए के घटक दल उम्मीदवारों के चयन और सीटों के समीकरण को किस तरह अंतिम रूप देते हैं।

2020 में सितंबर में घोषित हुआ था चुनाव कार्यक्रम

पिछले चुनाव के कार्यक्रम पर नजर डालें तो वर्ष 2020 में इन विधान परिषद सीटों के चुनाव की घोषणा 25 सितंबर को की गई थी। इसके बाद 28 सितंबर से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 5 अक्टूबर थी। 6 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच हुई और 8 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तारीख थी।

इसके बाद 22 अक्टूबर को मतदान हुआ और 12 नवंबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए गए।

2026 में भी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद नामांकन, जांच, नाम वापसी और मतदान के लिए आयोग की ओर से अलग-अलग तारीखें तय की जाएंगी। इसलिए अंतिम कार्यक्रम सामने आने के बाद ही उम्मीदवारों और प्रचार अभियान की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।

चुनाव में किन मुद्दों की रहेगी अहम भूमिका?

स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग मुद्दे प्रमुख होते हैं। शिक्षकों के लिए सेवा शर्तें, वेतन, स्थानांतरण, पदोन्नति, पेंशन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

वहीं स्नातक मतदाताओं के बीच रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और युवाओं के लिए अवसर जैसे मुद्दे प्रभाव डाल सकते हैं।

इसके अलावा उम्मीदवार की व्यक्तिगत उपलब्धता और मतदाताओं के साथ संपर्क भी महत्वपूर्ण है। विधान परिषद चुनावों में मतदाताओं का दायरा सीमित होने के कारण उम्मीदवार अक्सर व्यक्तिगत स्तर पर ज्यादा संपर्क अभियान चलाते हैं।

आगे क्या होगा?

अब सबसे बड़ा इंतजार चुनाव आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम का है। वर्तमान विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त होना है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी करने के लिए जल्द कार्यक्रम सामने आने की उम्मीद है।

कार्यक्रम घोषित होते ही नामांकन, उम्मीदवारों की अंतिम सूची और प्रचार अभियान के साथ तस्वीर तेजी से बदल सकती है।

आठ सीटों का यह चुनाव संख्या में छोटा जरूर है, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत बड़े हो सकते हैं। प्रशांत किशोर की सक्रियता, राजद की उम्मीदवार घोषणा, कांग्रेस और महागठबंधन के समीकरण तथा एनडीए के भीतर दावेदारियों ने मुकाबले को पहले ही रोचक बना दिया है।

अब देखना होगा कि पुराने चेहरों में कौन अपनी सीट बचा पाता है और कौन नए उम्मीदवार विधान परिषद में जगह बनाने में सफल होते हैं। खासकर पटना, तिरहुत और कोसी जैसी सीटों पर नतीजे बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।

AK
Author: AK

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