कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ गया है। बीजेपी के पाकिस्तान से फॉलोअर्स वाले आरोपों पर संस्थापक ने आंकड़ों के साथ जवाब दिया।
Cockroach Janta Party Follower Row
कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, फॉलोअर्स के आंकड़ों पर आमने-सामने बीजेपी और संस्थापक
सोशल मीडिया के दौर में कई बार एक ऑनलाइन अभियान अचानक इतनी तेजी से चर्चा में आ जाता है कि वह सीधे राजनीति के केंद्र में पहुंच जाता है। पिछले कुछ दिनों में ऐसा ही देखने को मिला है “कॉकरोच जनता पार्टी” के नाम से चल रहे ऑनलाइन कैंपेन के साथ। बेरोजगारी, शिक्षा, परीक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर वायरल हुए इस अभियान ने इंटरनेट पर बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान खींचा। लेकिन इसकी बढ़ती लोकप्रियता के साथ अब इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
सबसे ज्यादा चर्चा उस दावे पर हो रही है जिसमें भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि इस कैंपेन से जुड़े करीब 49 फीसदी फॉलोअर्स पाकिस्तान से हैं। इस आरोप के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई। इसके जवाब में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके सामने आए और उन्होंने दावा किया कि उनके प्लेटफॉर्म से जुड़े ज्यादातर लोग भारत से हैं। उन्होंने ऑडियंस डेटा का हवाला देते हुए कहा कि 94 फीसदी से ज्यादा दर्शक भारतीय हैं।

अब यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड तक सीमित नहीं है। यह राजनीति, डिजिटल कैंपेन, युवा भागीदारी और ऑनलाइन नैरेटिव की बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है।
क्या है कॉकरोच जनता पार्टी और क्यों हुई वायरल?
Cockroach Janta Party बीते दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से सामने आई। इस अभियान ने खास तौर पर युवाओं को अपने कंटेंट के जरिए जोड़ा।
इसके पोस्ट और मीम्स में जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा बात हुई, उनमें शामिल रहे—
- बेरोजगारी
- शिक्षा नीति
- प्रतियोगी परीक्षाएं
- पेपर लीक के आरोप
- युवाओं के करियर से जुड़ी परेशानियां
- सरकारी नीतियों पर सवाल
यही वजह रही कि कई युवा यूजर्स ने इसे तेजी से शेयर किया और यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड करने लगा।
आज के दौर में किसी भी सोशल मीडिया कैंपेन की ताकत उसकी पहुंच और लोगों की भागीदारी से तय होती है। कॉकरोच जनता पार्टी के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
बीजेपी ने क्या आरोप लगाए?
फॉलोअर्स में पाकिस्तान की हिस्सेदारी का दावा
विवाद तब बढ़ा जब बीजेपी के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर इस अभियान पर सवाल उठाए।
Kiren Rijiju ने सोशल मीडिया पोस्ट में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे फॉलोअर्स ढूंढ रहे हैं जिनका जुड़ाव भारत से बाहर तक है।
इसके बाद Sukanta Majumdar की तरफ से भी दावा सामने आया कि कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया फॉलोअर्स में पाकिस्तान से बड़ी भागीदारी दिखाई दे रही है।
इस बयान के बाद इंटरनेट पर चर्चा और तेज हो गई।
राजनीतिक समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस शुरू हो गई कि क्या यह सिर्फ डिजिटल लोकप्रियता है या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है।
अभिजीत दीपके ने कैसे दिया जवाब?
ऑडियंस डेटा साझा कर रखा अपना पक्ष
This is the screen recording of our audience demographic which we have shared with media before our account was hacked.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) May 23, 2026
More than 94% of the audience is from India.
Why is a Union Minister @KirenRijiju labelling Indian youth as Pakistani? https://t.co/av0WnxIOui pic.twitter.com/W4YY1LL1IJ
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक Abhijeet Deepke ने इन आरोपों को सीधे तौर पर गलत बताया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों से जुड़े आंकड़े साझा किए और कहा कि उनके प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी ऑडियंस भारत से है।
उनका दावा था—
- 94 फीसदी से ज्यादा दर्शक भारत से
- युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा
- कैंपेन का मुख्य फोकस घरेलू मुद्दे
- बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़े सवाल प्रमुख
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर दर्शकों का बड़ा हिस्सा भारत से है, तो भारतीय युवाओं को विदेशी बताना सही कैसे माना जा सकता है।
यही बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ गया मामला?
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर असर ज्यादा तेज होता है
आज सोशल मीडिया पर कोई भी ट्रेंड कुछ ही घंटों में राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन सकता है।
क्योंकि यहां तीन बातें तेजी से होती हैं—
- पोस्ट वायरल होना
- प्रतिक्रिया आना
- फिर राजनीतिक बयान जुड़ जाना
कॉकरोच जनता पार्टी का मामला भी इसी वजह से बड़ा हुआ।
पहले यह युवाओं से जुड़ा ऑनलाइन कैंपेन था।
फिर इसके मीम्स और पोस्ट वायरल हुए।
इसके बाद राजनीतिक आरोप आए।
फिर जवाब में आंकड़े सामने रखे गए।
और अब यह डिजिटल चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
केरल बीजेपी अध्यक्ष ने क्या कहा?
The #CockroachParty gambit is yet another classic cross border "influence operation" targetting India and PM @narendramodi govt – designed by vested interests to destabilize India – helped along by elements in our "opposition"
— Rajeev Chandrasekhar 🇮🇳 (@RajeevRC_X) May 23, 2026
In the age of social media, bots, AI and its…
इस पूरे विवाद के बीच Rajeev Chandrasekhar का बयान भी चर्चा में आया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि आधुनिक दौर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, बॉट्स और एआई के जरिए किसी देश के खिलाफ नैरेटिव बनाना संभव है।
उनका कहना था कि ऐसे डिजिटल अभियान कई बार राजनीतिक असर पैदा करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के विकास और राजनीतिक दिशा को लेकर कई तरह की बहसें लगातार चल रही हैं और सोशल मीडिया अब इस बहस का बड़ा मंच बन चुका है।
उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
युवाओं के बीच CJP की चर्चा क्यों बढ़ी?
बेरोजगारी और परीक्षा से जुड़े मुद्दे बने वजह
युवाओं के बीच इस कैंपेन की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह उसके मुद्दे भी बताए जा रहे हैं।
खास तौर पर—
- सरकारी नौकरियों को लेकर चिंता
- भर्ती प्रक्रिया में देरी
- परीक्षा पेपर लीक की खबरें
- करियर से जुड़ी अनिश्चितता
- शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
इन विषयों पर सोशल मीडिया पर पहले से चर्चा होती रही है।
जब किसी कैंपेन में यही बातें आसान भाषा, व्यंग्य और छोटे वीडियो के जरिए सामने आती हैं, तो उसका असर तेजी से बढ़ जाता है।
कॉकरोच जनता पार्टी के साथ भी यही देखने को मिला।
डिजिटल राजनीति का नया दौर
भारत में सोशल मीडिया अब सिर्फ मनोरंजन का प्लेटफॉर्म नहीं रहा।
यह अब—
- राजनीतिक बहस का मंच
- चुनावी संवाद का जरिया
- युवाओं की राय का माध्यम
- नीति पर प्रतिक्रिया देने का स्थान
बन चुका है।
यही वजह है कि किसी भी वायरल अभियान को अब राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाता है।
एक पोस्ट या वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच सकता है।
और फिर उस पर प्रतिक्रिया भी उतनी ही तेजी से आती है।
आंकड़ों की लड़ाई क्यों अहम है?
फॉलोअर्स की संख्या अब सिर्फ संख्या नहीं
सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स का मतलब सिर्फ लोकप्रियता नहीं माना जाता।
उससे यह भी समझने की कोशिश होती है—
- कौन लोग जुड़े हैं
- किस क्षेत्र से हैं
- किस उम्र के हैं
- कौन सा मुद्दा ज्यादा असर कर रहा है
इसी वजह से CJP followers India और पाकिस्तान से जुड़े दावे चर्चा का बड़ा हिस्सा बन गए।
एक पक्ष राजनीतिक सवाल उठा रहा है।
दूसरा पक्ष डेटा दिखाकर अपना पक्ष रख रहा है।
और जनता दोनों बातों को देखकर अपनी राय बना रही है।
आगे क्या हो सकता है?
यह विवाद अभी कुछ समय तक चर्चा में बना रह सकता है।
संभावनाएं कई हैं—
- और बयान सामने आ सकते हैं
- सोशल मीडिया डेटा पर और बहस हो सकती है
- नए स्क्रीनशॉट और एनालिटिक्स साझा हो सकते हैं
- राजनीतिक दल प्रतिक्रिया जारी रख सकते हैं
लेकिन इससे एक बात साफ है—
डिजिटल कैंपेन अब सीधे राष्ट्रीय बहस को प्रभावित कर सकते हैं।
और सोशल मीडिया पर उठे मुद्दे राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लेते।
निष्कर्ष
कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर शुरू हुआ सोशल मीडिया ट्रेंड अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। बीजेपी की तरफ से पाकिस्तान से जुड़े फॉलोअर्स का दावा सामने आया, तो दूसरी ओर संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंकड़े दिखाकर कहा कि उनका मुख्य दर्शक वर्ग भारत से है।
इस पूरे मामले ने यह दिखा दिया कि डिजिटल दौर में सोशल मीडिया कैंपेन कितनी तेजी से असर डाल सकते हैं।
एक तरफ युवाओं के मुद्दे हैं।
दूसरी तरफ राजनीतिक बयान हैं।
और तीसरी तरफ डेटा और ऑनलाइन पहुंच की बहस है।
फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीति दोनों जगह चर्चा में बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बहस किस दिशा में जाती है, लेकिन इतना तय है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब देश की सार्वजनिक बातचीत का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं।
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Author: AK
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