
नई दिल्ली, 19 फरवरी: दक्षिण एशिया के नौ देशों के प्रतिनिधियों, सरकारों, नीति-निर्माताओं और गैर-सरकारी संगठनों ने मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के खिलाफ आवाज उठाने और सुरक्षित प्रवासन को बढ़ावा देने के लिए एक साझा मंच पर भाग लिया। इस दक्षिण एशियाई संगोष्ठी का आयोजन एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन द्वारा किया गया, जिसमें “जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन” तकनीकी भागीदार के रूप में शामिल रहा।
ट्रैफिकिंग: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध
विशेषज्ञों के अनुसार, मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी के बाद, मानव तस्करी 32 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अवैध कमाई के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध बन चुका है। बाल अधिकारों और सुरक्षा के लिए कार्यरत “जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन” संगठन दुनिया के 39 देशों में काम कर रहा है और इस गंभीर मुद्दे पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
बहुआयामी रणनीति अपनाने की जरूरत
“जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन” के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा,
“मानव तस्करी एक संगठित अपराध है, जो बच्चों और मजबूर युवाओं के शोषण के जरिए फल-फूल रहा है। इससे निपटने के लिए हमें बहुआयामी रणनीति अपनानी होगी।”
उन्होंने सुझाया कि:
- ट्रैफिकिंग के आर्थिक ढांचे को तोड़ा जाए।
- संगठित अपराध गिरोहों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- वैश्विक स्तर पर खुफिया समन्वय और डेटा साझा करने के लिए एक रजिस्टर बनाया जाए।
- भारत, अमेरिका और अन्य प्रभावित देशों के बीच समन्वित प्रयास किए जाएं।
हाल ही में भारत भेजे गए ट्रैफिकिंग पीड़ितों की भयावह स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह अपराध वैश्विक प्रतिक्रिया की तात्कालिक आवश्यकता को दर्शाता है।
जागरूकता और प्रवासियों की सुरक्षा पर जोर
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के पूर्व अध्यक्ष प्रियंका कानूनगो ने कहा,
“सबसे पहले पीड़ितों को यह समझना होगा कि वे शोषण का शिकार हो रहे हैं। जागरूकता को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि कमजोर तबकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।”
संगोष्ठी में प्रमुख विषय और सिफारिशें
संगोष्ठी में ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर माइग्रेशन (GCM) के कुछ महत्वपूर्ण उद्देश्यों पर चर्चा हुई:
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग की रोकथाम और प्रवासियों की सुरक्षा।
- प्रवासियों को बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- प्रवासी समुदायों को सामाजिक रूप से सशक्त बनाना।
संगोष्ठी में सरकारों, नागरिक समाज संगठनों और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन एजेंसियों के बीच मजबूत साझेदारी, सामुदायिक निगरानी प्रणाली, स्कूल पाठ्यक्रम में ट्रैफिकिंग जागरूकता शामिल करने, तथा डिजिटल पहचान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर बल दिया गया।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
संगोष्ठी में शामिल महत्वपूर्ण प्रतिनिधियों में शामिल थे:
- भारतीय पुलिस फाउंडेशन के अध्यक्ष ओ.पी. सिंह
- नेपाल के मानवाधिकार एवं अंतरराष्ट्रीय संधि समझौता प्रभाग के संयुक्त सचिव राजेंद्र थापा
- श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. एम.एम.एस.एस.बी. यालेगामा
- श्रीलंका इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी रिसर्च की प्रमुख डॉ. बिलेशा वीरारत्ने
- भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सलाहकार ओंकार शर्मा
- महाराष्ट्र पुलिस की विशेष पुलिस महानिरीक्षक अश्वती दोरजे
इस संगोष्ठी ने दक्षिण एशिया में मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षित प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया।
Author: AK
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