
पुष्पांजलि सभा, विशेष यज्ञ हवन, सत्संग, गौसेवा, पेंटिंग तथा निबंध लेखन प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन
जहानाबाद महान समाज सुधारक, आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 201वीं जयंती को डीएवी पब्लिक स्कूल, जहानाबाद में बुधवार को श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य श्री के.के. पांडेय द्वारा महर्षि दयानंद सरस्वती जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद सभी शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और छात्र-प्रतिनिधियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। प्रार्थना सभा में प्राचार्य श्री के.के. पांडेय ने स्वामी जी के जीवन दर्शन, उनके समाज सुधारक कार्यों, शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधार और राष्ट्रहित में दिए गए योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को बताया कि स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने ‘वेदों की ओर लौटो’ का संदेश देकर भारतीय समाज को अंधविश्वास और कुरीतियों से मुक्ति दिलाने का प्रयास किया। विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक श्री एस.बी. साहू ने विद्यार्थियों को स्वामी दयानंद के जीवन की प्रमुख घटनाओं से अवगत कराते हुए बताया कि कैसे उन्होंने सत्य की खोज में अपने जीवन का बलिदान दिया और वैदिक परंपरा को पुनः स्थापित किया। इस विशेष अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने घरों से रोटियाँ लाकर स्थानीय श्रीकृष्ण गौशाला में गायों को अपने हाथों से खिलाया। इस गौसेवा में प्राचार्य, शिक्षकगण और अन्य कर्मचारियों ने भी भाग लिया। विद्यालय की ओर से गौशाला को आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य श्री के.के. पांडेय ने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। महर्षि दयानंद जी का जीवन ही सेवा, ज्ञान और सत्य की साधना का संदेश देता है।हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज और राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिये। वहीं इस अवसर पर विशेष यज्ञ हवन एवं सत्संग का आयोजन भी किया गया। विद्यार्थियों को वैदिक मंत्रोच्चारण के लाभों और उनके अर्थों के बारे में बताया गया। यज्ञ और वेद मंत्रों का उच्चारण मानसिक शांति प्रदान करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। महर्षि दयानंद जी के विचारों पर आधारित चित्रकला एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी कला और लेखनी के माध्यम से स्वामी जी के आदर्शों को प्रस्तुत किया।
Author: AK
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