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जहानाबाद के ‘मालवीय’ के रूप में प्रसिद्ध, शिक्षाविद डॉ चन्दिका प्रसाद यादव का निधन

Dr Chandika Prasad Yadav famously known as ‘Malviya of Jehanabad’ passed away

Dr Chandika Prasad Yadav famously known as ‘Malviya of Jehanabad’ passed away

जहानाबाद: मगध क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और समाजसेवी डॉ चंद्रिका प्रसाद यादव का आकस्मिक निधन मंगलवार देर शाम पटना में हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे जहानाबाद जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के कारण उन्हें “जहानाबाद के मालवीय” के नाम से जाना जाता था।

डॉ. यादव (Dr Chandrika Prasad Yadav) ने अपने जीवन में शिक्षा के प्रचार-प्रसार को ही अपना ध्येय बनाया था। उन्होंने रामलखन सिंह यादव कॉलेज, माँ कमला चंद्रिका जी टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, सिद्धार्थ टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, साई एजुकेशनल टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, माँ कमला चंद्रिका जी विद्यापीठ जैसे कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की स्थापना की। उनके मार्गदर्शन में हजारों छात्र-छात्राओं ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर सरकारी और निजी क्षेत्रों में प्रतिष्ठित पदों पर अपनी जगह बनाई। करीब दस हजार छात्र- छात्रा आज सरकारी नौकरी में हैं।

प्रो० डॉ० चंद्रिका प्रसाद यादव केवल शिक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे एक सक्रिय कांग्रेसी नेता भी रहे। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी के रूप में जाना जाता था। उन्होंने जहानाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, जहाँ वह कम अंतर से पराजित हुए थे। राजनीति से जुड़े रहने के बावजूद, उनका मुख्य फोकस समाज सेवा और शिक्षा का विकास रहा। डॉ. यादव धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी विशेष रुचि रखते थे। उन्होंने अपने निजी खर्च से पाँच करोड़ की लागत से टेंपल सिटी मीरा बिगहा में एक भव्य मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू किया था, जिसे जगन्नाथ पुरी मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। यह उनकी धार्मिक आस्था और समाज के प्रति उनकी समर्पित सोच को दर्शाता है।

डॉ. यादव के आकस्मिक निधन से शिक्षा, राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। उनके योगदान को याद करते हुए जिले भर के शिक्षाविदों, राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की और श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका जीवन शिक्षा और समाज सेवा के लिए एक प्रेरणा स्रोत था। उनके विचार, उनका संघर्ष और उनके द्वारा किए गए कार्यों की गूंज सैंकड़ों वर्षों तक सुनाई देगी।

AK
Author: AK

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