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Jehanabad News: नहीं सुधर रही जहानाबाद सदर अस्पताल की व्यवस्था, डीएम के आदेश की खुलेआम उड़ रही धज्जियां

Jehanabad News Jehanabad Sadar Hospital in Disarray, DM's Orders Openly Ignored
Jehanabad News Jehanabad Sadar Hospital in Disarray, DM's Orders Openly Ignored
Jehanabad News: Jehanabad Sadar Hospital in Disarray, DM’s Orders Openly Ignored

जहानाबाद सदर अस्पताल में डयूटी से नदारद रहते हैं डॉक्टर, जिलाधिकारी के आदेश का भी नहीं हो रहा कोई असर बिहार के जहानाबाद जिले की सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था एक बार फिर उजागर हुई है। रविवार को अस्पताल के पीकू वार्ड से दोनो डॉक्टर नदारद रहे, जिसके कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिलाधिकारी के लाख प्रयासों और सख्त आदेश के बावजूद अस्पताल की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।

आपको ज्ञात हो कि सदर अस्पताल में एक समय में दो डॉक्टरों की ड्यूटी रहती है, ठीक उसी प्रकार अस्पताल में लगी रोस्टर में डॉ मदनजीत कुमार एवं डॉ जयकिशोर प्रसाद की ड्यूटी लगी थी, लेकिन जनाब डॉक्टर साहब नदारत दिखे। वहीं नहीं सदर अस्पताल स्तिथ पिकु वार्ड पर भी ताला लटका रहा। आपको बता दें कि छोटे बच्चों के इलाज के लिए एक अलग तरह की खास वार्ड बनाई जाती है जिसे पीकू (PIKU – Provides Specialized Care for Children and Adolescents) कहा जाता है। सदर अस्पताल के पीकू वार्ड में ताल लगे रहने के कारण अपने बच्चे को दिखाने माता-पिता काफी परेशान दिखे। नदारक डॉक्टर और बंद पड़े पीकू से नाराज पिता ने सीधे फ़ोन कर इसकी शिकायत जहानाबाद जिलाधिकारी अलंकृता पांडे को की। जिलाधिकारी ने फ़ोन उठाया और आश्वस्थ किया कि डॉक्टर तुरंत वहां पहुंच रहे हैं, सुनिये उनकी बातें

बहरहाल जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद राजाबाजार निवासी अनंत कुमार लव तकरीबन एक घंटे तक डॉक्टर साहेब का इंतज़ार करते रहे, लेकिन जब कोई नहीं पहुंचा तो नाराज होकर और हतोशाहीत होकर अस्पताल से लौट गए। देखिये हमारे संवाददाता बरुन कुमार की पूरी रिपोर्ट

डॉक्टर नहीं मिलने के कारण कई अन्य मरीजों को इंतजार करना पड़ा। कुछ मरीजों के परिजनों ने नाम न बताने की शर्त पर का बताया कि “हम गरीब लोग घंटों खड़े रहते हैं, लेकिन डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते। शिकायत करने के बावजूद कोई सुधार नहीं होता।” अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की लापरवाही पर बार-बार जिलाधिकारी द्वारा निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। पहले भी कई मरीजों ने इमरजेंसी में डॉक्टर न होने के शिकायत की है। कई बार सदर अस्पताल की लापरवाही की खबरों को कवर करने पहुंचने वाले पत्रकारों को भी खबर कवर करने से रोकने की भरपूर कोशिश करता है। 

जिलाधिकारी ने कई बार ऑन कैमरा अस्पताल में प्रबंधन ठीक करने के आदेश दिए है उसके बाद भी हाल यथास्थिति बनी हुई है। जिले की एक मात्र बड़े सरकारी अस्पताल की जिम्मेदारी बहुत ज्यादा है और ऐसे में इस तरह की लापरवाही बार बार सामने आना कहीं न कहीं प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठता है। आखिर क्या वजह रह गयी है कि जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी कानों पर जूं नहीं रेंग रहा और खुलेआम अवहेलना हो रही है?

AK
Author: AK

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