
सिविल सर्जन ने दी जानकारी, 10 लाख से अधिक लोगों को खिलाई जाएगी दवा
जहानाबाद जिले में 10 फरवरी से फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन – MDA) अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत जिले की 10 लाख 68 हजार 30 की लक्षित आबादी को अल्बेंडाजोल और डीईसी दवा का सेवन कराया जाएगा।
स्वास्थ्यकर्मियों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका
अभियान को सफल बनाने के लिए 899 आशा कार्यकर्ता और 28 आंगनबाड़ी सेविकाएं तैनात की गई हैं। अभियान की निगरानी के लिए 52 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। जिले के 890 स्कूलों में छात्र-छात्राओं को भी यह दवा दी जाएगी। यह अभियान हुलासगंज, जहानाबाद सिकरिया, जहानाबाद शहरी क्षेत्र, काको, मखदूमपुर, ओकरी और रतनी फरीदपुर में संचालित किया जाएगा।
स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में कराना होगा दवा सेवन
सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र प्रसाद ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बताया कि दवा का सेवन खाली पेट नहीं कराना चाहिए। इसे नाश्ते या भोजन के बाद लेना आवश्यक है। अल्बेंडाजोल की गोली चबाकर खानी होती है। दवा के बाद चक्कर या उल्टी आना शरीर में माइक्रोफाइलेरिया की मौजूदगी का संकेत हो सकता है, लेकिन दवा पूरी तरह सुरक्षित है।
जागरूकता रथ को हरी झंडी, मरीजों को किट वितरण
फाइलेरिया उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों ने जनजागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर सात फाइलेरिया मरीजों को हाथीपांव की देखरेख के लिए एमएमडीपी किट का वितरण किया गया।
फाइलेरिया मरीजों की अपील
फाइलेरिया मरीजों द्वारा गठित मरीज हितधारक मंच के माध्यम से शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, डीलर, पंचायती राज प्रतिनिधि और समाजसेवियों को जोड़कर लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मरीज अपने हाथीपांव को दिखाकर लोगों को दवा खाने के लिए अपील कर रहे हैं ताकि इस बीमारी के प्रसार को रोका जा सके।
दवा सेवन से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें
डीवीबीडीसीओ डॉ. विनोद ने बताया कि सरकार फाइलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में हर साल यह अभियान चलाती है। जहां नाइट ब्लड सर्वे में माइक्रोफाइलेरिया दर 1% से अधिक होती है, वहां यह दवा अनिवार्य रूप से दी जाती है।
किन्हें दवा नहीं खानी चाहिए?
- दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति
फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा सेवन जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, फाइलेरिया का असर 5 से 10 साल बाद दिखता है। एक बार हाथीपांव हो जाने पर इसे ठीक नहीं किया जा सकता, इसलिए समय पर दवा खाना ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।
कार्यशाला में शामिल अधिकारी
इस मौके पर डीपीएम मोहम्मद खालिद हुसैन, डीआईओ डॉ. प्रमोद, वीबीडीसी दीक्षा, पीरामल से रविरंजन, सीफार से शिकोह व पल्लवी सहित अन्य अधिकारी एवं फाइलेरिया मरीज उपस्थित रहे।
Author: AK
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