
घोसी प्रखंड में 6 परियोजनाओं का चयन
रतनी फरीदपुर में 8 परियोजनाएँ चयनित
जहानाबाद, 23 नवंबर: साइंस फॉर सोसायटी, बिहार के तत्वावधान में बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम 2024 के अंतर्गत घोसी प्रखंड का प्रखंड स्तरीय परियोजना प्रस्तुतिकरण महंत केशव दास प्लस टू उच्च विद्यालय, भारथु में आयोजित किया गया। इस आयोजन में कुल 51 परियोजनाएँ प्रस्तुत की गईं, जिनमें से 6 को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित किया गया। उद्घाटन समारोह में बीईओ नागेंद्र कुमार, पीपीपीएस के निदेशक अभिराम शर्मा, कायनात इंटरनेशनल के निदेशक शकील अहमद काकवी, और विद्यालय के प्राचार्य दुर्गेश कुमार, पंकज कुमार उपस्थित रहे। निर्णायक मंडल में पवन कुमार, शशि कुमार, तेज प्रताप, रश्मि श्रीवास्तव, और वेंकटेश कुमार शामिल थे। चयनित परियोजनाओं में बाल वैज्ञानिकों ने उत्कृष्ट वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचारी विचार प्रस्तुत किए।







बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम 2024 के घोसी प्रखंड स्तरीय परियोजना प्रस्तुतिकरण में चयनित विद्यार्थियों की सूची
1-सृष्टि कुमारी महंथ केशव दास उच्च विद्यालय भारथु
2-सुषुम कुमारी मध्य विद्यालय अलीगंज
3-आदित्य कुमार महंथ केशव दास उच्च विद्यालय भारथु
4-आयुष राज उत्क्रमित उच्च विद्यालय शाहपुर
5-अराधना कुमारी कामेश्वर उच्च विद्यालय अलीगंज
6-कोमल राज राजकीय उच्च विद्यालय सोनवां
ये सभी विद्यार्थी 6 दिसंबर को जिला स्तरीय परियोजना प्रस्तुतिकरण में एस. एस. कॉलेज जहानाबाद में अपने प्रखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे।
रतनी फरीदपुर प्रखंड का आयोजन शकुराबाद हाई स्कूल में संपन्न हुआ। यहाँ कुल जिनमें से 8 को जिला स्तरीय मंच पर ले जाने के लिए चुना गया। जो इस प्रकार है।
1- खुशी कुमारी
2- अंशुल कुमारी
3- रौशन कुमार
4- चांदनी कुमारी
उद्घाटन समारोह में बीईओ सर्वजीत सिन्हा, कुर्मा संस्कृति हाई स्कूल की प्राचार्या अपर्णा सिंह, शकुराबाद हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक रामविनोद शर्मा, और साइंस फॉर सोसायटी के जिला समन्वयक श्रीकांत शर्मा ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत परियोजनाएँ गुणवत्तापूर्ण और नवाचारी रहीं। बच्चों की रचनात्मकता और विज्ञान के प्रति उनका समर्पण निर्णायक मंडल को प्रभावित करने वाला था। जिला संयोजक ललित शंकर ने बताया कि चयनित बाल वैज्ञानिक जिला स्तर परियोजना प्रस्तुतिकरण में अपने शोध प्रस्तुत करेंगे।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान कौशल को बढ़ावा देना और नवाचार को बढ़ाना था।
Author: AK
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