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जहानाबाद के मशहूर कवित्री के द्वारा लिखा गई कविता: जाति नहीं जनहित

Poem written by the famous poetess of Jehanabad: Public interest not caste

जाति नहीं जनहित

करते हैं करबद्ध निवेदन जाति में उलझाओ ना……
कुर्सी के लालच में श्रीमान जनता को टकराओ ना ….

उधर चली जातिगत सर्वे और इधर सम्मेलन जाती है….
तुम ही तेज़ नहीं श्रीमान सबकी अपनी तैयारी है….

सीधे सीधे जान ले यूं टकराने की तैयारी है….
तेरी इस चिंगारी से अब राष्ट्र झुलसना बाकी है….

करते हैं करबद्ध निवेदन जाति में उलझाओ ना….
कुर्सी लालच में श्रीमान जनता को टकराओ ना….

लगता है अब इंसां नहीं जाति ही सबपे भारी है….
तभी आरक्षण जाति पर और तभी गरीबी जारी है….

ना शांति की चिंता श्रीमान ना सुव्यवस्था लानी है….
जब राष्ट्रहित से बड़ी है कुर्सी फिर क्या शेष बतानी है….

थोड़ी चिंतन अगर कर ले तो ख़ुद पे शर्म ही आनी है….
तू भी जान हे श्रीमान क्यूंकि राष्ट्रहित ही न्यारी है….

अरे करते हैं करबद्ध निवेदन जनता को उलझाओ ना….
कुर्सी के लालच में श्रीमान जनता को टकराओ ना….

अनुसंधायिक: कुमारी मानसी
हिंदी विभाग
मगध विश्वविद्यालय बोध गया

AK
Author: AK

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