
जहानाबाद के अब्दुल बारी नगर भवन में फिर एक बार सजा कला का मंच। जहानाबाद के कला मर्मज्ञ, आज संध्या के समय, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजई रचना, रश्मिरथी के नाट्य मंचन के साक्षी बने। इससे पहले माननीय विधायक घोसी रामबली सिंह यादव एवं जिला पदाधिकारी अलंकृता पांडे के द्वारा दीप प्रज्वलित कर इस कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई।
इसके पश्चात कला मंच धनबाद के कलाकारों के द्वारा रश्मिरथी के सातों सर्गो के नाटक रूपांतरण की प्रस्तुति दी गई। एक-एक सर्ग एक के बाद एक मंच पर उद्धरित होते गए,
पहला सर्ग: कर्ण और दुर्योधन की मित्रता।
दूसरा सर्ग: कर्ण की गुरुभक्ति और परशुराम का श्राप।
तीसरा सर्ग: श्री कृष्ण का शांति प्रस्ताव और कर्ण को उसके अस्तित्व का ज्ञान।
चौथा सर्ग: देवराज इंद्र का कर्ण से कवच-कुंडल का दान मांगना और बदले में कर्ण को अभेद शक्ति देना।

पांचवां सर्ग: कर्ण और कुंती का मिलाप।
छठा सर्ग: भीष्म पितामह के बाणों की शैया पर लेटने के बाद कर्ण का भीष्म से आशीर्वाद मांगना।
सातवां और अंतिम सर्ग:* कर्ण का वध मंच के सामने बैठे दर्शकगण कर्ण की दुविधा,उसकी दानवीरता, मित्र के प्रति आस्था, त्याग, सभी भावो से दो-चार होते रहे एवम् साथ भाव विहवल भी। माननीय से लेकर जिला पदाधिकारी एवं जिला प्रशासन के अन्य पदाधिकारी एवं जिला के अन्य कला मर्मज्ञों की बात करें तो सब ने आज के इस मंचन/प्रस्तुति को भरपूर सराहा। कार्यक्रम के अंत में माननीय विधायक घोसी रामबली सिंह यादव एवं जिला पदाधिकारी अलंकृता पांडे के द्वारा रश्मिरथी के नाट्य प्रस्तुति के निदेशक एवं कलाकारों सहित कला निकेतन , धनबाद की पूरी टीम को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कला ,संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आज का यह कला को समर्पित आयोजन, जहानाबाद जिला के कला प्रेमियों के स्मृति चिन्ह पर लंबे समय तक अपनी छाप बनाए रखेगा।
Author: AK
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