
चलो विवेकानंद बन जाएं
आत्म साक्षरता को बढ़ाएं
प्रेरित होकर काम करें
यूं न जीवन बेकार करें ।
दार्शनिक, आध्यात्मिक, समाज सुधारक
आप हो हमारे प्रेरणा दायक,
सामाजिक न्याय, समानता लाना
सिखा मैंने आप से अपनाना।
आत्म चेतना होता है क्या,
क्यूं जरूरी है अपनाना ?
लक्ष्य को अगर पाना है तो
फिर क्यूं नहीं; मन को भटकाना?
आत्म बोध विस्तार हो,
जिससे जीवन साकार हो
जीवन का उद्देश्य सफ़ल हो
और हमारा लक्ष्य संधान हो।
राष्ट्र के लिए काम किया
आपने अपना पहचान दिया
शेष से विशेष हों कैसे?
कृत्यों से पहचान दिया।
स्वदेशी होता है क्या ?
आपने सबको समझाया।
विश्व में राष्ट्र का नाम हो कैसे?
दूर दृष्टि दिखलाया।
जीवन हरदम समतल नहीं
चुनौतियां स्वीकारना सिखलाया
आत्मविश्वास क्या चीज है
विश्वासी होना सिखलाया।
ये चंद पंक्तियां हैं श्रीमान
आपके मनोभाव, मेरी वाणी
अद्भुत, अद्वितीय…विवेकानंद जी के
अनंत उपकार अनंत कहानी…..…🙏🙏✍️✍️
कुमारी मानसी (अनुसंधायिका)
हिंदी विभाग
मगध विश्वविद्यालय बोधगया, (बिहार).
Author: AK
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