जहानाबाद जिले में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध एक ऐतिहासिक पहल देखने को मिली। जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल विवाह की रोकथाम के लिए कार्यरत सामाजिक संगठन तटवासी समाज न्यास ने धर्मगुरुओं के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाते हुए उन्हें बाल विवाह न कराने की शपथ दिलाई।
संगठन के निदेशक कन्हैया कुमार सिंह ने बताया कि इस अभियान को जिलेभर के पंडितों, मौलवियों और अन्य धर्मगुरुओं का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि कोई भी बाल विवाह धार्मिक रीति-रिवाजों के बिना नहीं होता, ऐसे में यदि पुरोहित वर्ग इसमें भाग न ले तो इस सामाजिक अपराध पर रोक संभव है।
संगठन ने यह कदम देश के सबसे बड़े नागरिक समाज नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC)’ के सहयोग से उठाया है, जो 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने के मिशन पर काम कर रहा है। कन्हैया कुमार सिंह ने कहा कि आज जिले के कई धार्मिक स्थलों जैसे मंडेश्वरी दरबार, लाल मंदिरा, भदसेरी ठाकुरबाड़ी, चातर ठाकुरबाड़ी, गरेडिया खंड मस्जिद, जामा मस्जिद काको और मदरसा अरबिया जहानाबाद में बोर्ड लगाए गए हैं जिन पर स्पष्ट लिखा है – “यहां बाल विवाह की अनुमति नहीं है।”
उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA), 2006 और पॉक्सो एक्ट के तहत बाल विवाह करवाना न सिर्फ अपराध है, बल्कि इसमें शामिल हर व्यक्ति—चाहे वह बाराती हो, हलवाई, मैरिज हॉल मालिक या पुरोहित—सभी सजा के पात्र हैं।
अभियान के अंतर्गत धर्मगुरुओं को यह समझाया गया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की से विवाह और यौन संबंध पोक्सो कानून के तहत बलात्कार माना जाएगा। इस जानकारी से प्रभावित होकर कई पंडितों और मौलवियों ने बाल विवाह से तौबा कर इसे रोकने का संकल्प लिया।
तटवासी समाज न्यास की इस अनूठी पहल से प्रेरित होकर जिले में एक भी बाल विवाह न होने देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्थानीय प्रशासन का भी इस अभियान में सक्रिय सहयोग मिला है।
तटवासी समाज न्यास का यह प्रयास बाल विवाह मुक्त जहानाबाद की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।
Jehanabad News: On Akshaya Tritiya, religious leaders were sworn in against child marriage, a unique effort by the Coastal Society Trust
Author: AK
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