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महाराष्ट्र और झारखंड चुनावी रण में भाजपा ने “बंटेंगे तो कटेंगे” के नारे को बनाया ढाल, विपक्ष के साथ सहयोगी भी संतुष्ट नहीं

महाराष्ट्र और झारखंड चुनावी रण में भाजपा ने "बंटेंगे तो कटेंगे" के नारे को बनाया ढाल, विपक्ष के साथ सहयोगी भी संतुष्ट नहीं
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BJP intensifies Maharashtra and Jharkhand campaign with ‘Batenge Toh Katenge’ slogan

देश की राजनीति में इन दिनों महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनावी शोर आखिरी चरण है। झारखंड में एक चरण का चुनाव खत्म हो चुका है । अब बुधवार, 20 नवंबर को महाराष्ट्र में एक चरण के लिए और झारखंड में दूसरे चरण के लिए वोट डाले जाएंगे। इन दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक ऐसा “नारा” दिया जिससे समूचा विपक्ष तिलमिलाया हुआ है। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की धीरे-धीरे करते-करते यह पूरे देश के सियासी गलियारों में पहुंच गया। बात को आगे बढ़ने से पहले हम आपके करीब पौने तीन महीने पहले लिए चलते हैं। तारीख थी 26 अगस्त साल 2024 । उस दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी थी। उस दौरान बांग्लादेश में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्ता पलट भी हुआ था। इसके बाद बांग्लादेश में कई हिंदुओं को मौत के घाट उतारा गया और उनके घर जला दिए गए। जिसका असर भारत में भी देखा गया। भाजपा सरकार और हिंदू संगठनों ने बांग्लादेश में हुए हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर कड़ा ऐतराज जताया। 26 अगस्त जन्माष्टमी के दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगरा होकर मथुरा पहुंचे। आगरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से बांग्लादेश के संदर्भ में हिंदुत्व पर एक ऐसा नारा दिया पूरे राजनीति के बाजार में सुर्खियों में बना हुआ है। आगरा में भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी अपने पुराने दिनों की तरह मुखर हो गए और कहा कि “बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे”। आगरा में सीएम योगी के हिंदुओं को एक करने के लिए दिए गए बयान बंटेंगे तो कटेंगे, पूरे देश भर में चर्चा में आ गया। बटेंगे तो कटेंगे देश की सियासत में एक मुद्दा बना हुआ है। सीएम योगी का यह नारा बंटेंगे तो कटेंगे सोशल मीडिया पर भी खूब ट्रेंड होना शुरू हो गया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार मुख्यमंत्री योगी के इस नारे को खूब उछाला। 5 अक्टूबर साल 2024 को महाराष्ट्र दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने भी इस नारे को मंच से खूब जोर-शोर से शुरू किया। पीएम मोदी ने ठाणे और वाशिम में रैलियों को संबोधित किया। उन्होंने ठाणे में कहा, ‘कांग्रेस और उनके सहयोगियों का एक ही मिशन है- बांटो और सत्ता में रहो। वह जानती है उसका वोट बैंक एक रहेगा। “हम बंटेंगे तो बांटने वाले महफिल सजाएंगे, जश्न मनाएंगे”। प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के इस नारे को कई भाजपा नेताओं ने बोलना शुरू कर दिया। गृहमंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विस्व सरमा ने भी चुनावी कैंपेन में शामिल किया। भाजपा का यह नारा समूचे विपक्ष को पसंद नहीं आया। कांग्रेस, एनसीपी अजित गुट और समाजवादी पार्टी के साथ कई विपक्षी दल भाजपा पर हमलावर हो गए और देश बांटने और हिंदू, मुस्लिमों के बीच दरार बढ़ाने वाला बताया । लेकिन भाजपा नेताओं को विपक्ष के इस आरोप को दरकिनार करते हुए बंटेंगे तो कटेंगे को और मजबूती दी।उसके बाद 15 अक्टूबर को केंद्रीय चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया। फिर क्या था भाजपा ने दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व में अलख जगाने के लिए बंटेंगे तो कटेंगे को मुख्य नारा बना दिया। भाजपा हर रैली में बटेंगे तो कटेंगे और वोट जिहाद का मुकाबला धर्मयुद्ध टैगलाइन को बोल रही है। हालांकि इस पर भाजपा के कुछ सहयोगी दल भी सहमत नहीं हैं । महाराष्ट्र और झारखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की चुनावी रैली की। दोनों राज्यों में पीएम मोदी और सीएम योगी ने इसी नारे को ढाल बनाते हुए कई चुनावी सभाओं में खूब जोर-शोर से उठाया। दोनों में राज्यों पीएम मोदी ने “एक रहेंगे सेफ रहेंगे” और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंटेंगे तो कटेंगे नारे को चुनावी कैंपेन बना डाला। वहीं दूसरी और पीएम मोदी और सीएम योगी के इस नारे को लेकर विपक्ष का “पारा” बढ़ता चला गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कई चुनावी सभाओं में यही नारा दिया। योगी आदित्यनाथ के बटेंगे तो कटेंगे नारे का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समर्थन किया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ के सरकार्यवाह दतात्रेय होसबाले ने कहा कि समुदाय को जोड़ने की जरूरत है, नहीं तो बांग्लादेश जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने बटेंगे तो कटेंगे नारे का भी समर्थन किया था।

भाजपा नेताओं के बंटेंगे तो कटेंगे नारे का विपक्षी नेताओं ने कड़ा विरोध किया–

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BJP intensifies Maharashtra and Jharkhand campaign with ‘Batenge Toh Katenge’ slogan

भाजपा नेताओं के बंटेंगे तो कटेंगे नारे का कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और महाराष्ट्र सरकार में शामिल और भाजपा के सहयोगी अजित पवार ने आपत्ति जताई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का शोर चरम पर है। राज्य में मतदान को तीन दिन बचे हैं। 20 नवंबर को यहां वोटिंग होगी, इससे पहले सभी पार्टियां अपने-अपने पक्ष में महौल बनाने में जुटी हुई हैं। इस बीच एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या महायुति में सब ठीक है? दरअसल, महायुति में शामिल अजित पवार के नेतृत्व वाली शिवसेना चुनाव प्रचार में अलग-थलग दिख रही है। गुरुवार को अजित पवार गुट वाली एनसीपी ने मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भी हिस्सा नहीं लिया, जिससे यह सवाल और भी पुख्ता हो गया। बड़ी बात यह है कि न तो अजित पवार इस रैली में शामिल हुए और न ही एनसीपी का कोई अन्य नेता मंच पर दिखाई दिया। हालांकि, इस रैली में शिंदे गुट की शिवसेना और अठावले की पार्टी के वरिष्ठ नेता जरूर दिखाई दिए। वहीं बंटेंगे को कटेंगे के नारे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सीएम ने ये नारा अंग्रेजों से सीखा है। भाजपा वाले अंग्रेजों के वचनवंशी और विचारवंशी हैं। भाजपा बांटकर राजनीति करना चाहती है, जबकि सपा पीडीए से जोड़कर राजनीति करना चाहती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का परिणाम आने के बाद उत्तर प्रदेश की कुर्सी से भी बदलाव होना शुरू हो जाएगा।
महाराष्ट्र में महायुति और अजित पवार के बीच मनमुटाव की पहली आहट तब सुनाई दी जब भारतीय जनता पार्टी और देवेंद्र फडणवीस के ऐतराज के बावजूद अजित पवार ने नवाब मलिक को टिकट दे दिया। इतना ही नहीं अजित पवार ने नवाब मलिक के लिए प्रचार भी किया। इसके अलावा उन्होंने बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी, सना मलिक जैसे कई मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया। भाजपा ने इस पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, मुस्लिम वोटरों के खिसक जाने के डर से अजित पवार ने उनकी एक न सुनी। इससे पहले अजित पवार ने सीएम योगी और भजापा के ‘बटेंगे तो कटेंगे’ जैसे नारे का खुलकर विरोध किया था। महाराष्ट्र में सीएम योगी ने भी मंच से इस नारे का एलान किया। इसके बाद अजित पवार ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, दूसरे राज्यों के नेता आकर महाराष्ट्र में इस तरह के बयान देते हैं, जबकि ये सब यहां नहीं चलता। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और भाजपा-शिवसेना गठबंधन महायुति में शामिल अजित पवार ने कहा कि बटेंगे तो कटेंगे का नारा उत्तर प्रदेश और झारखंड में चलता होगा, महाराष्ट्र में नहीं चलेगा। मैं इसका समर्थन नहीं करता। हमारा नारा है- सबका साथ सबका विकास। वहीं महाराष्ट्र से भाजपा की एमएलसी पंकजा मुंडे ने भी कहा था कि नेता का काम है कि इस धरती पर रहने वाले हर व्यक्ति को अपना समझे। हमें महाराष्ट्र में इस तरह के विषय नहीं लाने चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने ये उत्तर प्रदेश के संदर्भ में कहा था, जहां अलग तरह की राजनीतिक परिस्थितियां हैं। उनकी बात का वही अर्थ नहीं जो समझा जा रहा है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने विशेष रूप से नारे की निंदा करते हुए कहा है कि यह एक धर्म को दूसरे धर्म के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास है। महाराष्ट्र चुनाव से पहले देवेंद्र फडणवीस ने महायुति के अंदर आंतरिक विरोध की बात भी स्वीकार की है। उन्होंने कहा, ये चुनाव अजीब हैं। हमें नतीजों के बाद ही पता चलेगा कि कौन किसके साथ है। महायुति के भीतर भी आंतरिक विरोधाभास है। फडणवीस ने कहा कि उनकी पार्टी का नारा बंटेंगे तो कटेंगे विपक्षी महाविकास आघाडी (एमवीए) के चुनाव प्रचार अभियान के जवाब में गढ़ा गया है। भाजपा नेता ने दावा किया कि उनके सहयोगियों अशोक चव्हाण और पंकजा मुंडे के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री अजित पवार इसके मूल अर्थ को समझने में विफल रहे। ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारे पर डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को कहा कि यह नारा महाविकास अघाड़ी के चुनावी कैंपेन का जवाब है। हमारे सहयोगी इस नारे का असल मतलब नहीं समझ पाएं हैं। उन्होंने कहा कि ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का असली मतलब है कि हमें साथ रहना है। पीएम मोदी ने संक्षेप में कहा है- एक हैं तो सेफ हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हम मुसलमानों के खिलाफ हैं। फडणवीस ने यह बात भाजपा नेता अशोक चव्हाण और पंकजा मुंडे के उस बयान के बाद कही, जिसमें दोनों ने कहा था कि ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का नारा महाराष्ट्र की जनता पसंद नहीं करेगी। इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है। फडणवीस ने कहा कि ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारा कांग्रेस और महा विकास अघाडी की तुष्टीकरण की राजनीति का जवाब है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान वोट जिहाद किया और मस्जिदों पर पोस्टर्स लगाकर लोगों से एक पार्टी विशेष को वोट डालने को कहा। ये किस तरीके का सेक्युलरिज्म है।कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ पर हमला बोला है। महाराष्ट्र और झारखंड में एक जनसभा में शामिल होने के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पीएम मोदी कह रहे हैं एक हैं तो सुरक्षित हैं। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं बंटेंगे तो कटेंगे। उन्हें तय करने दीजिए कि कौन सा नारा चलेगा। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीएम योगी को नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि एक सच्चा योगी बटेंगे तो कटेंगे जैसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता। ऐसी भाषा आतंकवादी इस्तेमाल करते हैं।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- योगी के मुंह में राम है और बगल में छुरी है। योगी साधु के कपड़े में आते हैं और फिर बोलते हैं कि बटेंगे तो कटेंगे। बांटने वाले भी वो ही हैं और काटने वाले भी वो ही हैं।

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Author: AK

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