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नीतीश सरकार का राज्य टीईटी परीक्षा ना कराने का फैसला कितना सही कितना गलत?

नई दिल्ली, 15 जून। बिहार के युवाओं को सरकार किस मापदंड में रखकर माप रही है। पहले बीपीएससी का पेपर लीक हुआ और फिर उसे रद्द करना पड़ा। उसके बाद अब बिहार टेट की परीक्षा को कराने से मना कर दिया है। बिहार सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि शिक्षक भर्ती … Read more

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Bihar TET Exam 2022
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नई दिल्ली, 15 जून। बिहार के युवाओं को सरकार किस मापदंड में रखकर माप रही है। पहले बीपीएससी का पेपर लीक हुआ और फिर उसे रद्द करना पड़ा। उसके बाद अब बिहार टेट की परीक्षा को कराने से मना कर दिया है। बिहार सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल हो रहे ज्यादातर उम्मीदवार स्टेट टीईटी और सीटीईटी (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) दोनों की तैयारी करते हैं। इसलिए बिहार सरकार ने फैसला किया है कि राज्य में टीईटी परीक्षा नहीं होगी।

बिहार सरकार अपने इस फैसले को युवाओं के हित में बता रही है लेकिन इसकी एक सबसे बड़ी कमी है कि सीटीईटी में भोजपुरी या मैथलि के सवाल नहीं पूछे जाते हैं और अगर कोई छात्र भोजपूरी और मैथलि की जानकारी रखता हो तो फिर उसका क्या होगा। बिहार की नीतिश सरकार ने दलील दी है कि जब भारत सरकार नियमित रूप से केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) का साल में दो बार आयोजित करती है. इसलिए फिलहाल बिहार शिक्षा विभाग ने टीईटी नहीं कराने का निर्णय लिया है।

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प्राथमिक शिक्षा निदेशक रवि प्रकाश ने शिक्षा विभाग के इस निर्णय की जानकारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को दे दी है। अब बोर्ड इस पर अंतिम निर्णय लेकर पटना हाईकोर्ट को इसकी जानकारी देगा। बिहार में शिक्षक पात्रता परीक्षा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा ली जाती है। भविष्य में बिहार शिक्षक पात्रता परीक्षा को फिर से शुरू किया जा सकता है क्योंकि शिक्षा विभाग ने विशेष टीईटी आयोजित करने की संभावना फिलहाल रखी हुई है। प्राथमिक निदेशक ने बिहार बोर्ड को बताया है कि भविष्य में विभाग आवश्यकता आधारित शिक्षक पात्रता (टीईटी) आयोजित करने का विचार कर सकता है।

इसका मतलब साफ है कि नीतीश कुमार की सरकार पहले बिहार टीईटी परीक्षा को हटाकर चेक करना चाहती है कि इस पर पूरे बिहार से किस प्रकार का रिएक्शन आता है और फिर अगर इस पर रिएक्शन सही रहा तो परीक्षा खत्म कर दिया जाएगा और अगर कुछ गलत होता है तो उसे फिर से आयोजित कर दिया जाएगा। बिहार सरकार का यह फैसला कई विद्यार्थियों की उम्मीद को कूचलने का कर सकता है। अगर इस पर हाईकोर्ट द्वारा अंतिम मोहर लग गई तो बिहार के बच्चों का स्टेट टीईटी की परीक्षा उत्रीर्ण कर शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह जाएगा।

AK
Author: AK

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