गुरु, मार्च 26, 2026

Air India New Fitness Policy: एअर इंडिया का बड़ा फैसला, ओवरवेट केबिन क्रू होंगे ग्राउंड

Air India New Fitness Policy for Cabin Crew

एअर इंडिया की नई फिटनेस नीति में केबिन क्रू के BMI की जांच अनिवार्य होगी। नियम तोड़ने पर फ्लाइट से हटाना और वेतन कटौती संभव।

Air India New Fitness Policy for Cabin Crew

एअर इंडिया की नई फिटनेस नीति: केबिन क्रू पर सख्ती

Air India New Fitness Policy for Cabin Crew

एअर इंडिया ने एक बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए अपने केबिन क्रू के लिए नई स्वास्थ्य और फिटनेस नीति लागू करने की घोषणा की है, जो 1 मई 2026 से प्रभावी होगी। इस नीति के तहत अब केवल सेवा कौशल ही नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस भी नौकरी का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। इस कदम ने जहां एयरलाइन इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है, वहीं कर्मचारियों और यात्रियों दोनों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।


एअर इंडिया की नई फिटनेस नीति क्या है?

एअर इंडिया की यह नई नीति केबिन क्रू की फिटनेस सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। इसके तहत हर क्रू सदस्य का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) नियमित रूप से जांचा जाएगा। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

एयरलाइन का मानना है कि केबिन क्रू केवल सेवा देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे फ्लाइट के दौरान सुरक्षा प्रबंधन का भी अहम हिस्सा होते हैं। इसलिए उनका शारीरिक रूप से फिट होना बेहद जरूरी है।


किन कर्मचारियों पर लागू होंगे ये नियम?

यह नीति सभी केबिन क्रू सदस्यों पर लागू होगी, चाहे वे स्थायी कर्मचारी हों या फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हों। यानी एयर इंडिया में काम करने वाले हर फ्लाइट अटेंडेंट को इन नियमों का पालन करना होगा।


BMI के आधार पर तय होंगी श्रेणियां

नई नीति के अनुसार, केबिन क्रू को उनके BMI के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है।

सामान्य श्रेणी (18 से 24.9) को आदर्श माना गया है। इस श्रेणी में आने वाले कर्मचारी बिना किसी अतिरिक्त जांच के अपनी ड्यूटी कर सकते हैं।

कम वजन (18 से कम) वाले कर्मचारियों को मेडिकल जांच और फंक्शनल असेसमेंट पास करना होगा, तभी वे दोबारा उड़ान भर सकेंगे।

ज्यादा वजन (25 से 29.9) वाले कर्मचारियों को भी फंक्शनल असेसमेंट पास करना जरूरी होगा। अगर वे इसमें असफल रहते हैं, तो उन्हें फ्लाइट ड्यूटी से हटाया जा सकता है।

मोटापा (30 या उससे अधिक) की श्रेणी को पूरी तरह अस्वीकार्य माना गया है। इस स्थिति में कर्मचारी को तुरंत ड्यूटी से हटाया जाएगा और उनकी सैलरी में कटौती की जाएगी।


फंक्शनल असेसमेंट टेस्ट क्या होता है?

फंक्शनल असेसमेंट एक विशेष परीक्षण है, जो एअर इंडिया की ट्रेनिंग अकादमी में आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि केबिन क्रू आपातकालीन परिस्थितियों में कितनी तेजी और कुशलता से काम कर सकते हैं।

इस टेस्ट में शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और सुरक्षा प्रक्रियाओं के पालन की जांच की जाती है। कर्मचारियों को इस टेस्ट को पास करने के लिए तीन मौके दिए जाते हैं और अंतिम प्रयास से पहले विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।


अचानक जांच और सख्त निगरानी

नई नीति के तहत एयरलाइन अब बिना किसी पूर्व सूचना के जांच कर सकती है। यह जांच फ्लाइट से पहले, बाद में, ट्रेनिंग के दौरान या अकादमी में कभी भी हो सकती है।

अगर कोई कर्मचारी निर्धारित सीमा से बाहर पाया जाता है, तो उसे तुरंत ड्यूटी से हटाया जा सकता है।


वेतन कटौती और मेडिकल जांच के नियम

मोटापे की श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों को न केवल ड्यूटी से हटाया जाएगा, बल्कि उनकी सैलरी में कटौती भी की जाएगी।

इसके अलावा उन्हें 7 दिनों के भीतर ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल जैसे मेडिकल टेस्ट कराने होंगे, जिसका खर्च उन्हें खुद उठाना होगा। जब तक वे दोबारा फिट नहीं हो जाते और टेस्ट पास नहीं करते, तब तक वे ड्यूटी पर वापस नहीं आ सकते।


नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई होगी?

यदि कोई कर्मचारी बार-बार इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे चेतावनी पत्र दिया जाएगा। गंभीर मामलों में यह मामला एचआर विभाग तक पहुंच सकता है और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

यह नीति कर्मचारियों को अनुशासन और जिम्मेदारी का पालन करने के लिए प्रेरित करती है।


पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है जब एअर इंडिया ने फिटनेस को लेकर सख्ती दिखाई है।

2015 में बड़ी संख्या में केबिन क्रू को ओवरवेट होने के कारण ग्राउंड किया गया था। 2022 में भी इस मुद्दे को लेकर विवाद सामने आया था, खासकर टाटा ग्रुप के अधिग्रहण से पहले।

हालांकि इस बार की नीति ज्यादा स्पष्ट और व्यवस्थित मानी जा रही है, जिससे कर्मचारियों को पहले से नियमों की जानकारी होगी।


इस नीति का उद्देश्य क्या है?

एअर इंडिया के अनुसार, इस नीति का मुख्य उद्देश्य केबिन क्रू की फिटनेस को सुधारना, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया देना है।

यह नीति विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों पर आधारित है, जिससे इसकी विश्वसनीयता और बढ़ जाती है।


क्या यह नीति विवादास्पद है?

जहां एयरलाइन इसे एक सकारात्मक कदम बता रही है, वहीं कुछ कर्मचारी और यूनियन इसे कठोर मान रहे हैं।

उनका कहना है कि BMI हमेशा स्वास्थ्य का सही मापदंड नहीं होता और इस तरह के नियम कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं।

दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है और इसके लिए फिटनेस जरूरी है।


यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?

इस नीति का असर यात्रियों पर भी दिखाई देगा।

फिट और प्रशिक्षित केबिन क्रू से सेवा की गुणवत्ता बेहतर होगी और आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। हालांकि शुरुआती समय में कुछ कर्मचारियों के हटने से संचालन पर थोड़ा असर पड़ सकता है।


निष्कर्ष

एअर इंडिया की नई फिटनेस नीति एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। यह नीति जहां यात्रियों की सुरक्षा और सेवा गुणवत्ता को प्राथमिकता देती है, वहीं कर्मचारियों के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी करती है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नीति कितनी सफल होती है और क्या अन्य एयरलाइंस भी इसे अपनाती हैं।


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Author: AK

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