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Jehanabad News: सदर अस्पताल में डॉक्टर की गैरहाजिरी पर सवाल, इलाज के अभाव में बच्ची की मौत का आरोप

Jehanabad News: सदर अस्पताल में डॉक्टर की गैरहाजिरी पर सवाल, इलाज के अभाव में बच्ची की मौत का आरोप
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इमरजेंसी में डेढ़ घंटे तक ड्यूटी डॉक्टर के नहीं पहुंचने का दावा, अधीक्षक चंद्रशेखर आजाद ने कार्रवाई का दिया आश्वासन; सिविल सर्जन की कार्यशैली पर भी उठे सवाल

जहानाबाद सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के समय पर उपस्थित नहीं रहने का मामला सामने आया है। आरोप है कि डॉक्टर के इंतजार में मरीजों को काफी देर तक परेशानी झेलनी पड़ती है। मंगलवार को भी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के करीब डेढ़ घंटे तक नहीं पहुंचने की बात सामने आई। इसी दौरान छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल एक बच्ची की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज मिल जाता तो शायद बच्ची की जान बच सकती थी।

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परिजनों के अनुसार, बच्ची किसी कारणवश छत से गिर गई थी, जिससे उसे गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद वे उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते डॉक्टर उपलब्ध होते और बच्ची का समुचित इलाज शुरू हो जाता, तो उसकी जान बचने की उम्मीद हो सकती थी। उनका यह भी कहना है कि यदि बच्ची की स्थिति गंभीर थी, तो प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया जा सकता था। हालांकि, बच्ची की मौत का वास्तविक कारण और समय पर इलाज मिलने की स्थिति में उसकी जान बचने की संभावना की पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

इमरजेंसी में दो डॉक्टरों की ड्यूटी, मौजूदगी पर सवाल

सदर अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों के बेहतर और त्वरित उपचार के लिए दो डॉक्टरों की ड्यूटी रहने की बात कही जाती है। इसके बावजूद, आरोप है कि कई बार इमरजेंसी में केवल एक ही डॉक्टर मौजूद रहते हैं। ऐसे में मरीजों की लंबी कतार लग जाती है और गंभीर मरीजों के उपचार में परेशानी होती है। ड्यूटी रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित नहीं होने से अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जाता रहा है कि जब किसी अधिकारी या मंत्री का निरीक्षण होता है, तब डॉक्टरों की पूरी टीम निर्धारित वेशभूषा में मौजूद दिखाई देती है। लेकिन आम दिनों में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है।

अधीक्षक ने कहा- संबंधित डॉक्टर पर होगी कार्रवाई

मामले को लेकर सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के समय पर उपस्थित नहीं रहने की शिकायत पहले भी की गई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सिविल सर्जन को कई बार लिखित रूप से जानकारी दी जा चुकी है। मंगलवार को भी जब निर्धारित समय तक डॉक्टर नहीं पहुंचे, तो उन्हें स्वयं इमरजेंसी की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी।

अधीक्षक ने कहा कि संबंधित डॉक्टर से जवाब मांगा जाएगा और ड्यूटी लगाने वाले जिम्मेदार कर्मियों से भी पूछा जाएगा कि किस आधार पर ड्यूटी निर्धारित की गई थी तथा डॉक्टर समय पर उपस्थित क्यों नहीं हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय प्रक्रिया के तहत मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

सिविल सर्जन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल

इस पूरे मामले में अस्पताल की व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की भूमिका भी चर्चा में है। जिलाधिकारी की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए पहले भी निर्देश दिए जाने की बात कही गई है। इसके बावजूद यदि ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो निर्देशों के अनुपालन और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।

आरोप है कि सिविल सर्जन के स्तर पर समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण डॉक्टरों की ड्यूटी और उपस्थिति को लेकर शिकायतें बनी हुई हैं। हालांकि, इस संबंध में सिविल सर्जन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। अस्पताल अधीक्षक द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने की बात कहे जाने के बाद यह सवाल उठता है कि शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए।

कहीं न कहीं, यदि जिलाधिकारी के निर्देशों और अस्पताल अधीक्षक की शिकायतों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ड्यूटी में लापरवाही की शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

कब तक मरीजों को उठानी पड़ेगी परेशानी?

सदर अस्पताल जिले के हजारों लोगों के लिए इलाज का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीण क्षेत्रों से गंभीर हालत में मरीज यहां पहुंचते हैं और उन्हें उम्मीद रहती है कि इमरजेंसी में तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलेगी। ऐसे में डॉक्टर की गैरहाजिरी की शिकायतें मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ाती हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्ची की मौत के मामले में क्या जांच होगी, ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की अनुपस्थिति की जिम्मेदारी किसकी तय होगी और अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल अधीक्षक ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि विभागीय स्तर पर जांच कितनी तेजी से होती है और भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था बनाई जाती है।

Jehanabad News: Questions raised over doctor’s absence at Sadar Hospital; girl’s death alleged due to lack of medical treatment

Barun Kumar
Author: Barun Kumar

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