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Vat Savitri Vrat 2026 Date: मई में पड़ेगा वट सावित्री व्रत, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और क्या करें- क्या नहीं

वट सावित्री व्रत 2026 की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व जानें। पति की लंबी उम्र के लिए कैसे करें यह पावन व्रत। Vat Savitri Vrat 2026 Date, Puja Vidhi & Muhurat वट सावित्री व्रत 2026: कब रखा जाएगा सुहाग का सबसे पवित्र व्रत? जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व प्रस्तावना … Read more

Vat Savitri Vrat 2026 Date, Puja Vidhi & Muhurat

वट सावित्री व्रत 2026 की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व जानें। पति की लंबी उम्र के लिए कैसे करें यह पावन व्रत।

Vat Savitri Vrat 2026 Date, Puja Vidhi & Muhurat

Vat Savitri Vrat 2026 Date, Puja Vidhi & Muhurat

वट सावित्री व्रत 2026: कब रखा जाएगा सुहाग का सबसे पवित्र व्रत? जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

प्रस्तावना

हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व माना गया है। इनमें कुछ व्रत ऐसे होते हैं जो केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली से भी जुड़े होते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण व्रत है वट सावित्री व्रत। यह व्रत खासतौर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं।

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सनातन परंपरा में यह व्रत सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि सावित्री ने अपनी बुद्धिमत्ता और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत मई महीने में पड़ रहा है। ऐसे में कई महिलाएं यह जानना चाहती हैं कि वट सावित्री व्रत 2026 कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और पूजा कैसे करनी चाहिए। आइए विस्तार से जानते हैं।


वट सावित्री व्रत 2026 कब है?

ज्येष्ठ अमावस्या पर रखा जाएगा व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे शुरू होगी और 17 मई 2026 को दोपहर 01:30 बजे तक रहेगी।

उदयातिथि के अनुसार वट सावित्री व्रत शनिवार, 16 मई 2026 को मनाया जाएगा।

यह दिन विवाहित महिलाओं के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है क्योंकि इस दिन सौभाग्य योग और शोभन योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन योगों में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

Vat Savitri Vrat 2026 Date, Puja Vidhi & Muhurat

वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त

पूजा के लिए शुभ समय

पंचांग के अनुसार 16 मई 2026 को सुबह 10:26 बजे तक सौभाग्य योग रहेगा। इसके बाद शोभन योग प्रारंभ हो जाएगा।

ज्योतिष शास्त्र में दोनों योगों को अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसे में महिलाएं सुबह स्नान और पूजा की तैयारी के बाद शुभ समय में वट वृक्ष की पूजा कर सकती हैं।

शुभ योग का महत्व

  • सौभाग्य योग वैवाहिक सुख और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।
  • शोभन योग जीवन में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला योग माना जाता है।

इसलिए इस दिन की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है।


वट सावित्री व्रत की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर करें तैयारी

वट सावित्री व्रत करने वाली महिलाओं को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ और पवित्र वस्त्र पहनने चाहिए।

परंपरा के अनुसार महिलाएं लाल, पीले या सुहाग के रंग के कपड़े पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं।

पूजा सामग्री में क्या रखें?

पूजा के लिए निम्न चीजें तैयार रखें:

  • रोली
  • अक्षत
  • धूप और दीप
  • फूल और माला
  • मिठाई
  • फल
  • कच्चा सूत
  • भिगोए हुए काले चने
  • सावित्री-सत्यवान की तस्वीर
  • जल से भरा लोटा
  • पूजा की टोकरी

वट वृक्ष की पूजा कैसे करें?

वट वृक्ष का विशेष महत्व

वट वृक्ष को हिंदू धर्म में अक्षय और अमरता का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है।

पूजा की प्रक्रिया

  1. सबसे पहले वट वृक्ष के पास साफ स्थान पर पूजा करें।
  2. वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें।
  3. रोली और अक्षत चढ़ाएं।
  4. पुष्प और मिठाई अर्पित करें।
  5. दीपक जलाकर आरती करें।
  6. इसके बाद कच्चे सूत को वट वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए परिक्रमा करें।

महिलाएं अपनी श्रद्धा के अनुसार 7, 21 या 108 परिक्रमा कर सकती हैं।


वट सावित्री व्रत कथा का महत्व

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सावित्री और सत्यवान की कहानी

वट सावित्री व्रत की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा इसकी कथा सुनना है।

पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री एक अत्यंत बुद्धिमान और पतिव्रता महिला थीं। उन्होंने सत्यवान को अपना पति चुना, जबकि उन्हें पहले ही बताया गया था कि सत्यवान की आयु बहुत कम है।

जब सत्यवान की मृत्यु का समय आया, तब यमराज उनके प्राण लेने पहुंचे। सावित्री ने अपने तप, बुद्धिमत्ता और समर्पण से यमराज को प्रसन्न कर लिया। अंत में यमराज ने सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान किया।

इसी घटना के कारण यह व्रत पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है।


वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व

अखंड सौभाग्य का प्रतीक

वट सावित्री व्रत को हिंदू धर्म में अखंड सौभाग्य का व्रत कहा जाता है। मान्यता है कि जो महिला श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत करती है, उसके वैवाहिक जीवन में सुख बना रहता है।

इस व्रत से मिलने वाले लाभ

  • पति की लंबी आयु की कामना पूरी होती है।
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • वैवाहिक संबंध मजबूत होते हैं।
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
  • दुख और संकट दूर होते हैं।

वट वृक्ष का वैज्ञानिक महत्व

पर्यावरण से भी जुड़ा है यह पर्व

धार्मिक महत्व के साथ-साथ वट वृक्ष का पर्यावरणीय महत्व भी बहुत बड़ा है।

बरगद का पेड़ लंबे समय तक जीवित रहता है और अधिक मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में इसे जीवन और स्थिरता का प्रतीक माना गया है।

आज के समय में जब पर्यावरण संरक्षण की जरूरत बढ़ रही है, तब ऐसे पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देते हैं।


किन बातों का रखें ध्यान?

व्रत के दौरान जरूरी सावधानियां

  • पूजा से पहले मन को शांत रखें।
  • किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहें।
  • व्रत में सात्विक भोजन करें।
  • वट वृक्ष को नुकसान न पहुंचाएं।
  • पूजा के बाद जरूरतमंदों को दान करें।

दान का विशेष महत्व माना गया है। अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र और फल का दान करना शुभ माना जाता है।


उत्तर भारत और दक्षिण भारत में अलग परंपरा

अलग-अलग क्षेत्रों में अलग मान्यता

उत्तर भारत में यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को रखा जाता है, जबकि कई दक्षिण भारतीय राज्यों में इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

हालांकि दोनों का उद्देश्य एक ही होता है — पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना।


निष्कर्ष

वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समर्पण, विश्वास और वैवाहिक प्रेम का प्रतीक भी है।

वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 16 मई, शनिवार को रखा जाएगा। शुभ योगों के कारण इस बार का व्रत और भी विशेष माना जा रहा है।

अगर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा की जाए तो यह व्रत सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करता है। साथ ही यह पर्व हमें प्रकृति और परिवार दोनों के महत्व को समझने का संदेश भी देता है।

Abhishek Kumar
Author: Abhishek Kumar

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