डॉक्टर देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ की गिरफ्तारी ने चौंकाया, जिसने 6 साल में 125 किडनी ट्रांसप्लांट और 100 से अधिक हत्याएं की थीं।
Doctor Death: 125 Kidney Transplants and 100+ Murders in 6 Years
छह साल में 125 किडनी ट्रांसप्लांट और 100 से ज़्यादा हत्याएं: डॉक्टर डेथ की खौफनाक कहानी
डॉक्टर बना कातिल: कैसे देवेंद्र शर्मा ने अपराध की दुनिया में कदम रखा?
भारत में कई सीरियल किलर्स की कहानियाँ सुनी जाती रही हैं, लेकिन डॉ. देवेंद्र शर्मा उर्फ ‘डॉक्टर डेथ’ की कहानी कुछ अलग ही डरावनी है। एक पढ़ा-लिखा और लाइसेंस प्राप्त डॉक्टर जिसने मानवता की सेवा करने की शपथ ली थी, वही इंसान एक किडनी रैकेट का सरगना और 100 से ज्यादा हत्याओं का दोषी निकला। उसकी गिरफ्तारी भी किसी फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं थी।
राजस्थान के दौसा जिले में छिपे हुए एक आश्रम से पकड़ा गया यह अपराधी मोबाइल रिचार्ज की एक छोटी सी गलती की वजह से पकड़ा गया। पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस की और एक हफ्ते तक मंदिर के बाहर निगरानी करने के बाद, उसे बाबा के वेश में रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
डॉक्टर से अपराधी तक का सफर
पढ़ाई और शुरुआती जीवन
देवेंद्र शर्मा ने बीएएमएस (आयुर्वेदिक चिकित्सा) की पढ़ाई बिहार से की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह राजस्थान के दौसा में आकर ‘जनता क्लीनिक’ नाम से अस्पताल चलाने लगा। लगभग 11 साल तक वह एक सामान्य डॉक्टर की तरह जीवन जीता रहा।
ठगी से शुरुआत, फिर कत्ल की राह
कहते हैं कि एक हादसा इंसान की सोच बदल देता है। देवेंद्र के साथ भी ऐसा ही हुआ जब मोबाइल टॉवर लगाने के नाम पर उससे 11 लाख रुपये ठग लिए गए। इस धोखाधड़ी के बाद उसका भरोसा सिस्टम से उठ गया और उसने खुद अपराध की राह पकड़ ली।
पहले उसने फर्जी गैस एजेंसी के नाम पर ठगी करना शुरू किया। फिर उसने टैक्सी और ट्रक चालकों को बुक कर हत्या करना और उनके शवों को हजारा नहर में मगरमच्छों के हवाले करना शुरू कर दिया।
125 किडनी ट्रांसप्लांट: मानव अंगों की काली मंडी
डॉक्टर अमित से मुलाकात और रैकेट की शुरुआत
वर्ष 1998 में उसकी मुलाकात डॉ. अमित नामक व्यक्ति से हुई। डॉ. अमित ने उसे किडनी डोनर्स लाने का ऑफर दिया। हर डोनर के बदले में उसे 5 से 7 लाख रुपये तक की पेशकश की गई।
देवेंद्र ने बिहार, बंगाल और नेपाल जैसे क्षेत्रों के गरीब लोगों को लालच देकर डोनर बनाया और उन्हें गैरकानूनी ट्रांसप्लांट के लिए ले जाया गया। 1998 से 2004 तक, कुल 125 किडनी ट्रांसप्लांट किए गए।
गिरफ्तारी और रैकेट का खुलासा
2004 में गुरुग्राम पुलिस ने इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया और डॉ. देवेंद्र और डॉ. अमित दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, देवेंद्र को जमानत मिल गई और वह फिर से फरार हो गया।
हत्या की हैवानियत: गिनती भी भूल गया कातिल
पूछताछ में देवेंद्र ने कबूल किया कि 50 हत्याओं के बाद उसने गिनती बंद कर दी थी। उसका तरीका बेहद सुनियोजित और निर्मम था। वह टैक्सी और ट्रक चालकों को बुक करता, रास्ते में उनकी हत्या कर देता और शवों को कासगंज की हजारा नहर में फेंक देता, जहां मगरमच्छ सबूत मिटा देते।
पुलिस को चकमा देने की चालाकी
देवेंद्र ने बाबा का रूप अपनाकर खुद को छिपाने की कोशिश की थी। उसका मानना था कि ऐसा करने से कोई भी उसे पहचान नहीं पाएगा। लेकिन एक मोबाइल रिचार्ज की चूक ने उसकी पहचान उजागर कर दी। पुलिस टीम ने एक सप्ताह तक आश्रम के बाहर निगरानी की और फिर सही समय पर उसे पकड़ लिया।
परिवार ने तोड़ा नाता, बच्चे भी विदेश में
देवेंद्र की पत्नी ने 2004 में ही उसे छोड़ दिया था और बच्चों को लेकर मुंबई चली गई। उसका एक बेटा स्विट्जरलैंड में और दूसरा केरल में नौकरी कर रहा है। देवेंद्र अपने किसी रिश्तेदार या जान-पहचान वालों से संपर्क में नहीं था, जिससे उसकी पहचान और मुश्किल हो गई थी।
अपराध की दुनिया में डॉक्टर डेथ की पहचान
‘डॉक्टर डेथ’ की उपाधि क्यों?
देवेंद्र शर्मा को मीडिया और पुलिस ने ‘डॉक्टर डेथ’ का नाम इसलिए दिया क्योंकि उसने एक डॉक्टर होते हुए भी सबसे ज्यादा लोगों की जान ली। उसने मेडिकल पेशे का दुरुपयोग करते हुए मानव अंगों की तस्करी की, मासूम लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया और अपने लालच की खातिर इंसानियत को शर्मसार किया।
कानून की गिरफ्त में दरिंदा
अब क्या होगा डॉक्टर डेथ का?
गिरफ्तारी के बाद देवेंद्र को दिल्ली लाकर जेल प्रशासन के हवाले कर दिया गया है। उस पर कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें हत्या, अंग तस्करी, धोखाधड़ी, और ठगी शामिल हैं।
अब उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है और उम्मीद की जा रही है कि वह अपने किए की सजा जरूर पाएगा।
निष्कर्ष: अपराध के लिए कोई बहाना नहीं
डॉ. देवेंद्र शर्मा की कहानी एक भयावह उदाहरण है कि किस तरह लालच और धोखे की भावना एक पढ़े-लिखे इंसान को दरिंदा बना सकती है। उसकी करतूतें यह सिखाती हैं कि पेशा चाहे कोई भी हो, अगर इंसान का ज़मीर मर जाए तो वह राक्षस बन जाता है।
सवाल यह भी उठता है कि समाज और सिस्टम में ऐसी दरारें कहां हैं, जिससे अपराधी बच निकलते हैं। जरूरी है कि ऐसे मामलों से सबक लेकर, सख्त निगरानी, पारदर्शिता और जनजागरूकता को बढ़ावा दिया जाए, ताकि कोई दूसरा ‘डॉक्टर डेथ’ ना बन सके।
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Author: AK
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