पटना के बापू टावर में आयोजित मगही महोत्सव में भाषा, साहित्य, इतिहास और सिनेमा के साथ मगध की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया। महोत्सव में कलाकारों, विद्वानों और उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी रही।
Magahi Festival in Patna Showcases Language, Legacy, and Local Pride
पटना में मगही महोत्सव: सांस्कृतिक चेतना और मातृभाषा का गौरवपूर्ण प्रदर्शन
पटना, 5 अप्रैल 2025 – राजधानी के ऐतिहासिक बापू टावर में शनिवार को मगही महोत्सव 2025 का भव्य आयोजन हुआ। इस एक दिवसीय महोत्सव का उद्देश्य मगही भाषा, साहित्य, इतिहास, लोक कला, और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे हुई और समापन शाम 7 बजे किया गया। इस दौरान कई विशिष्ट अतिथियों और सांस्कृतिक हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
मगही को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
सहकारिता मंत्री प्रेम कुमार ने मंच से कहा कि मगही भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज होने की पात्रता रखती है। उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है। केंद्र सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।




उद्घाटन समारोह में मातृभाषा का सम्मान
मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि ने दीप प्रज्वलन कर महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने भाषण में कहा,
“मगही भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। इसकी समृद्ध विरासत और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे विशिष्ट बनाती है।”
उन्होंने यह भी बताया कि जिस बापू टावर में यह आयोजन हो रहा है, वह चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक यादों से जुड़ा है।
विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में चिकित्सा, शिक्षा और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को नालंदा शील और मगही मगछा सम्मान से सम्मानित किया गया।
गया घराने की ठुमरी से सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जहां राजन सीजुआर की प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।
मगही भाषा और साहित्य पर विचार-विमर्श
पहले सत्र में मगही भाषा और साहित्य पर केंद्रित चर्चा हुई, जिसका संचालन निराला बिदेसिया ने किया। प्रमुख वक्ताओं में रहे:
- इश्तेयाक अहमद – मगध क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता पर प्रकाश डाला
- धनंजय श्रोत्रिय – मगही साहित्य की ऐतिहासिक धारा और अनुवाद कार्यों का उल्लेख
- प्रो. अतीश परासर – मगही की भाषाई विशेषताओं और कार्यकर्ता की जरूरत पर बल
- प्रो. शिवनारायण – मगही भाषा का ऐतिहासिक विकास वैदिक युग से पूर्व तक ले गए
मगध का इतिहास और पुरातत्व
दूसरे सत्र में मगध की इतिहासिक विरासत और पुरातात्विक महत्व पर चर्चा हुई। संचालन रविशंकर उपाध्याय ने किया।
- प्रो. आनंद वर्धन ने मगध को “भारत की आत्मा” बताया
- सुजीत नयन ने बताया कि चंडी में खुदाई से महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं
- कुमार अभिजीत ने मगध की कला और संस्कृति के दस्तावेजीकरण की आवश्यकता बताई
मगध में उद्यमिता की संभावनाएं
तीसरे सत्र में उद्यमिता और युवाओं की भूमिका पर विचार किया गया। संचालन डॉ. उज्ज्वल कुमार ने किया।
- रवि आर कुमार ने कहा कि मगध के युवा रोजगार निर्माता बनें
- डॉ. सत्यजीत ने युवाओं को सकारात्मक दिशा देने की बात कही
मगही सिनेमा पर चर्चा
चौथे सत्र में मगही सिनेमा और इसके भविष्य पर चर्चा की गई। भाग लेने वाले कलाकारों में शामिल रहे:
- अभिनेत्री अस्मिता शर्मा
- अभिनेता विकास और बुल्लू कुमार
- फिल्म समीक्षक बिनोद अनुपम
सभी ने एक स्वर में कहा कि मगही सिनेमा को और गति देने की आवश्यकता है। संचालन विजेता चंदेल ने किया।
समापन में कविता और लोक गायन
अंतिम सत्र में मगही कविता पाठ और लोक गायन प्रस्तुत किया गया। जिन कलाकारों ने भाग लिया, उनमें शामिल थे:
- कवि: संजीव मुकेश, चंदन द्विवेदी, प्रेरणा प्रताप, अनमोल कुमारी
- लोक कलाकार: चंदन तिवारी, जितेंद्र ब्यास, रोशन कुमारी झूमरी
इन प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बना दिया।
- मगही महोत्सव 2025
- पटना बापू टावर कार्यक्रम
- मगही भाषा की मान्यता
- मगध का इतिहास
- मगही सिनेमा और साहित्य
- मगध में उद्यमिता
- मगही कविता और लोक कला
- बिहार की सांस्कृतिक विरासत
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Author: AK
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