बुध, फ़रवरी 25, 2026

Uttarakhand Land Row: उत्तराखंड में जमीन आवंटन विवाद, रामदेव की कंपनी को जमीन देने पर कांग्रेस का आरोप

Uttarakhand Land Row: Ramdev’s Firm Gets Lease, Congress Slams Govt

उत्तराखंड सरकार ने मसूरी की 142 एकड़ जमीन रामदेव की कंपनी को देने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। सीबीआई जांच की मांग और विवाद गहराया।


Uttarakhand Land Row: Ramdev’s Firm Gets Lease, Congress Slams Govt


प्रस्तावना: विवादित जमीन सौदे पर सियासी घमासान

उत्तराखंड में मसूरी स्थित जार्ज एवरेस्ट एस्टेट की 142 एकड़ जमीन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने यह जमीन बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की कंपनी ‘राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड’ को 15 साल के लिए पट्टे पर दी है। आरोप है कि करीब 30 हजार करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली इस भूमि को मात्र एक करोड़ रुपये सालाना किराए पर दिया गया है।

कांग्रेस ने इस फैसले को जनता के हितों के खिलाफ बताया है और सीबीआई जांच या फिर किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।


कांग्रेस के आरोप: सस्ती दर पर दी गई कीमती जमीन

यशपाल आर्य का बयान

उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने शुक्रवार को प्रेस और सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि मसूरी की यह जमीन पर्यटन विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि:

  • इस जमीन को विकसित करने के लिए सरकार ने पहले एशियाई विकास बैंक (ADB) से 23 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
  • अब वही जमीन 15 साल के लिए केवल 15 करोड़ रुपये (1 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष) में पट्टे पर दे दी गई।
  • यह निर्णय सरकार के “विकास मॉडल” पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

निविदा प्रक्रिया पर सवाल

आर्य ने दावा किया कि 2022–23 में इस परियोजना के लिए निविदा निकाली गई थी।

  • टेंडर में तीन कंपनियों ने भाग लिया, लेकिन सभी की मलकीयत बालकृष्ण के पास बताई जा रही है।
  • तीनों कंपनियों के पते भी एक ही कार्यालय से जुड़े हुए हैं।
  • निविदा की शर्तों में अंतिम समय में बदलाव कर अयोग्य कंपनियों को शामिल किया गया।

कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरा मामला उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली 2017 का उल्लंघन है।


मसूरी का जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट: क्यों है खास?

ऐतिहासिक महत्व

जार्ज एवरेस्ट एस्टेट मसूरी का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थल है। इसका नाम ब्रिटिश सर्वेयर जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर पड़ा था।

पर्यटन की दृष्टि से महत्व

  • यह जगह देश-विदेश के हजारों पर्यटकों को आकर्षित करती है।
  • यहां से हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
  • उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने यहां म्यूजियम, ऑब्जर्वेटरी, कैफेटेरिया, स्पोर्ट्स एरिया और पार्किंग जैसी सुविधाओं के विकास की योजना बनाई थी।

इसीलिए इस परियोजना को लेकर उठे विवाद ने और भी महत्व ग्रहण कर लिया है।


सरकार का तर्क: पर्यटन विकास की दिशा में पहल

हालांकि सरकार की ओर से अब तक इस विवाद पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस सौदे को साहसिक पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।

पर्यटन विभाग का मानना है कि निजी कंपनियों के साथ साझेदारी से राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित होंगी।


कांग्रेस की मांग: जांच और जवाबदेही

सीबीआई जांच की मांग

कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के गलत उपयोग से जुड़ा है।
यशपाल आर्य ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाए।

न्यायिक समिति की मांग

यदि सीबीआई जांच संभव न हो तो कांग्रेस चाहती है कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित की जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।


विपक्ष बनाम सरकार: राजनीतिक मायने

कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस इस मुद्दे को जनता से जोड़कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
पार्टी का तर्क है कि जनता के टैक्स के पैसे से विकसित जमीन को औने-पौने दामों में निजी हाथों में सौंपा गया है।

सरकार की मुश्किलें

भाजपा सरकार के लिए यह मामला मुश्किल खड़ा कर सकता है, क्योंकि उत्तराखंड में पर्यटन और पर्यावरण को लेकर जनता पहले ही संवेदनशील है।


आर्थिक सवाल: विकास या नुकसान?

वित्तीय तुलना

  • ADB का 23 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर जिस जमीन को विकसित किया गया, उसे अब 15 साल में केवल 15 करोड़ रुपये की आय पर पट्टे पर देना वित्तीय दृष्टि से घाटे का सौदा माना जा रहा है।
  • विपक्ष पूछ रहा है कि अगर यह भूमि खुली बोली और पारदर्शिता से पट्टे पर दी जाती तो राज्य को अरबों रुपये की आय हो सकती थी।

पर्यटन पर असर

यदि यह परियोजना सही तरीके से संचालित होती है, तो राज्य को रोजगार और राजस्व मिल सकता है। लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह निर्णय जनहित के खिलाफ माना जाएगा।


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Author: AK

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