
पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार, 20 जून को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के आरक्षण सीमा बढ़ाए जाने के फैसले को आज खारिज कर दिया है। राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में एससी-एसटी, ओबीसी और ईबीसी को 50 फीसदी से बढ़ाकर 65 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया था। गौरतलब है कि राज्य में जातिगत जनगणना के बाद सरकार ने विधानमंडल में कानून में संशोधन कर सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में इन वंचित वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा को बढ़ा दिया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 7 नवंबर 2023 को विधानसभा में इसकी घोषणा की थी कि सरकार बिहार में आरक्षण के दायरे को बढ़ाएगी। 50 फीसदी से इसे 65 या उसके ऊपर ले जाएंगे। सरकार कुल आरक्षण 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करेगी। मुख्यमंत्री के एलान के तुरंत बाद कैबिनेट की मीटिंग बुलाई गई थी। ढाई घंटे के अंदर कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी थी। इसके बाद इसे शीतकालीन सत्र के चौथे दिन 9 नवंबर को विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित भी कर दिया गया था। उस समय नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 20%, अनुसूचित जनजाति के लिए 2%, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 25% और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 18% तक कर दिया था। इस लिहाज से राज्य सरकार की तरफ से 65 फीसदी आरक्षण वंचित वर्ग को और 10 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों को मिल गया और कुल आरक्षण का आंकड़ा 75 फीसदी पहुंच गया। कोर्ट ने बिहार पदों और सेवाओं में रिक्तियों का आरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2023 और बिहार (शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश में) आरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2023 को संविधान के दायरे से बाहर और संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत समानता खंड का उल्लंघन बताते हुए रद कर दिया। मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रन और जस्टिस हरीश कुमार की बेंच ने उन याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुनाया, जिन्होंने रोजगार और शिक्षा के मामलों में नागरिकों के लिए समान अवसर के उल्लंघन के रूप में अधिनियमों को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह संशोधन इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के मामले में पारित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है। इस केस में सुप्रीम ने 1992 को फैसला सुनाते हुए आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% तय की थी। बता दें कि इंदिरा गांधी बनाम भारत संघ को मंडल कमीशन केस के नाम भी जाना जाता है।
Author: AK
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