जहानाबाद हौसलों की उड़ान कैसी होती है, इसका जीता-जागता उदाहरण हैं घोसी प्रखंड के गोड़सर गांव की बहू लालती देवी। कभी दो वक्त की रोटी को तरसने वाली लालती देवी आज न सिर्फ इलाके की पहली स्नातक महिला बनीं, बल्कि अपनी मेहनत और लगन से 156 महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रही हैं। गांव में लोग उन्हें स्नेह से “दीदी” कहकर पुकारते हैं।
लालती देवी का सफर 2007 में शुरू हुआ, जब वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और इंटरमीडिएट के साथ-साथ स्नातक (BA) की पढ़ाई भी पूरी की। उस समय वह अपने 150 घरों वाले टोले की अकेली महिला थीं, जिनके पास स्नातक की डिग्री थी। महादलित टोले की इस उपलब्धि ने पूरे इलाके में उन्हें मिसाल बना दिया।
आज लालती देवी ने अपने गांव में 14 महिला समूहों का निर्माण किया है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही हैं। जीविका से जुड़कर उन्होंने महिलाओं को रोजगार का रास्ता दिखाया और खुद भी श्रृंगार की दुकान खोलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की।
लालती देवी बताती हैं कि कभी परिवार खाने को मोहताज था, लेकिन मेहनत, लगन और पति के सहयोग ने जिंदगी बदल दी। अब वह अपनी कमाई से न सिर्फ घर चलाती हैं बल्कि अपने दो बेटों और दो बेटियों की पढ़ाई का खर्च भी उठाती हैं। बेटों में से एक सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है।
उनकी लगन और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें आज सामुदायिक समन्वयक (CM) की जिम्मेदारी भी मिली हुई है।
गांव के लोग कहते हैं कि लालती देवी का जीवन संघर्ष और सफलता का ऐसा उदाहरण है, जिससे प्रेरणा लेकर हर महिला अपनी राह बना सकती है।
Jehanabad News: From struggle to success: Lalti Devi became the first graduate woman of the area, made 156 women self-reliant
Author: AK
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