भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील में जीरो टैरिफ, MSMEs, किसानों और रोजगार पर असर, जानें किन उत्पादों को मिलेगा फायदा।
India-US Trade Deal: Zero Tariff Items and Key Benefits
परिचय: भारत-अमेरिका ट्रेड डील क्यों है बड़ी खबर
बीते कई महीनों से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। अब इन चर्चाओं ने ठोस रूप ले लिया है। भारत और अमेरिका एक अंतरिम ट्रेड डील पर सहमत हो गए हैं, जिसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है, जबकि कई उत्पादों पर जीरो टैरिफ लागू होगा।
यह डील सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर भारतीय MSMEs, किसानों, मछुआरों, महिलाओं और युवाओं के रोजगार पर पड़ेगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में क्या-क्या तय हुआ है और यह भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करेगी।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील क्या है
अंतरिम व्यापार समझौते का मतलब
यह समझौता एक इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट है, यानी यह पूरी तरह से अंतिम नहीं है, लेकिन भविष्य के व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की नींव रखता है। दोनों देशों ने एक साझा बयान जारी कर यह स्पष्ट किया है कि वे व्यापार को आसान, सस्ता और पारदर्शी बनाना चाहते हैं।
टैरिफ में बड़ी कटौती
इस डील का सबसे बड़ा आकर्षण अमेरिकी टैरिफ में भारी कमी है।
- पहले भारतीय उत्पादों पर औसतन 50% तक टैरिफ लगता था
- अब इसे घटाकर 18% कर दिया गया है
- कई महत्वपूर्ण सेक्टर में टैरिफ पूरी तरह जीरो होगा
किन उत्पादों पर रहेगा जीरो टैरिफ
जेनेरिक दवाएं और फार्मा सेक्टर
भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का बड़ा निर्यातक है। इस डील के तहत:
- जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ जीरो किया जाएगा
- इससे भारतीय फार्मा कंपनियों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी
- दवाएं सस्ती होंगी और निर्यात बढ़ेगा
रत्न, हीरे और ज्वेलरी
- कटे-पॉलिश्ड हीरे
- कीमती रत्न
- ज्वेलरी से जुड़े कुछ उत्पाद
इन पर टैरिफ खत्म होने से सूरत और मुंबई जैसे ज्वेलरी हब को फायदा होगा।
एयरक्राफ्ट और एयरक्राफ्ट पार्ट्स
- एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर सेक्शन 232 के तहत छूट
- एविएशन सेक्टर में भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर
किन सेक्टरों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग
भारत का टेक्सटाइल सेक्टर लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर निर्भर है।
- कपड़े और रेडीमेड गारमेंट्स
- होम टेक्सटाइल और फैब्रिक्स
इन पर टैरिफ घटने से भारत का निर्यात तेजी से बढ़ सकता है।
चमड़ा और फुटवियर
- लेदर प्रोडक्ट्स
- फुटवियर और एक्सेसरीज़
ये सेक्टर रोजगार के लिहाज से बेहद अहम हैं, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में।
रसायन और ऑर्गेनिक केमिकल्स
- ऑर्गेनिक केमिकल्स
- प्लास्टिक और रबर उत्पाद
इन क्षेत्रों में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी।
MSMEs, किसानों और मछुआरों को कैसे होगा फायदा
MSMEs के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार
इस ट्रेड डील से भारतीय MSMEs को करीब 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
- एक्सपोर्ट प्रक्रिया आसान होगी
- लागत घटेगी
- छोटे उद्योग वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ेंगे
किसानों और मछुआरों के अवसर
- कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा
- प्रोसेस्ड फूड और समुद्री उत्पादों की मांग बढ़ेगी
- ग्रामीण आय में इजाफा होगा
भारत ने किन कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखा
संवेदनशील सेक्टर पर कोई समझौता नहीं
भारत ने इस डील में अपने किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है।
पूरी तरह सुरक्षित रखे गए उत्पादों में शामिल हैं:
- मक्का, गेहूं, चावल
- सोया और पोल्ट्री
- दूध, पनीर और डेयरी उत्पाद
- इथेनॉल, तंबाकू
- कुछ सब्जियां और मांस
इसका मतलब है कि इन उत्पादों पर भारत कोई रियायत नहीं देगा।
भारत अमेरिकी उत्पादों पर क्या रियायत देगा
इंडस्ट्रियल और कृषि उत्पादों पर टैरिफ में कटौती
भारत ने अमेरिका के कई उत्पादों पर टैरिफ खत्म या कम करने पर सहमति जताई है, जैसे:
- सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन
- जानवरों के चारे के लिए लाल ज्वार
- ट्री नट्स
- ताजे और प्रोसेस्ड फल
- सोयाबीन तेल
- वाइन और स्पिरिट्स
नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी होगी बात
व्यापार में आने वाली रुकावटें होंगी कम
दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि:
- नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम किया जाएगा
- डिजिटल ट्रेड में आने वाली दिक्कतें दूर होंगी
- मेडिकल डिवाइस और ICT प्रोडक्ट्स के इंपोर्ट में देरी खत्म होगी
सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी सहयोग
आर्थिक सुरक्षा और इनोवेशन पर फोकस
भारत और अमेरिका ने:
- सप्लाई चेन को मजबूत करने
- तीसरे देशों की गैर-बाजार नीतियों से निपटने
- इनोवेशन और टेक्नोलॉजी सहयोग बढ़ाने
पर सहमति जताई है।
टेक्नोलॉजी ट्रेड में बढ़ोतरी
- GPU और डेटा सेंटर उपकरण
- एडवांस टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स
- जॉइंट टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट
अगले पांच सालों की बड़ी योजना
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के:
- एनर्जी प्रोडक्ट्स
- एयरक्राफ्ट और पार्ट्स
- कीमती धातुएं
- टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स
- कोकिंग कोल
खरीदने का इरादा जताया है।
निष्कर्ष: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने
भारत-अमेरिका ट्रेड डील सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि यह भारत की निर्यात क्षमता, रोजगार सृजन और वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का जरिया है। टैरिफ में कटौती, जीरो टैरिफ उत्पाद, MSMEs और किसानों को मिलने वाला फायदा इस डील को ऐतिहासिक बनाता है। आने वाले समय में जब यह अंतरिम समझौता पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते में बदलेगा, तब भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकते हैं।
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Author: AK
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