फल्गु नदी में उफान से जहानाबाद के तीन प्रखंडों के दर्जनों गांव जलमग्न। एनएच-33 पर आवागमन ठप, फसलों व सब्जियों को भारी नुकसान।
Flood in Falgu River Jehanabad: Villages Submerged, NH-33 Closed
जहानाबाद में फिर आया बाढ़ का कहर

जहानाबाद जिला एक बार फिर बाढ़ की चपेट में है। फल्गु नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि से जिले के घोसी, मोदनगंज और काको प्रखंड के दर्जनों गांव पानी में डूब गए हैं। गांवों में खेतों से लेकर गलियों तक पानी भर गया है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जहानाबाद-नालंदा NH-33 पर मिल्की गांव के पास सड़क पर पानी आ जाने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।
स्थानीय लोग प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि महज एक महीने के भीतर यह दूसरी बार है जब नदी का पानी तटबंध तोड़कर गांवों में घुस आया है।
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— DW Samachar (@dwsamachar) August 23, 2025
कैसे टूटा तटबंध, क्यों बढ़ी मुश्किलें
जुलाई में भी टूटा था तटबंध
पिछले महीने 16 जुलाई को भी फल्गु नदी के जलस्तर बढ़ने से भारथु, नन्दना और खिरौंटी इलाके के पास तटबंध टूट गए थे। प्रशासन ने मरम्मत तो कराई, लेकिन यह केवल खानापूर्ति साबित हुई।
जैसे ही नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ा, तटबंध फिर टूट गए और नदी का पानी तेजी से गांवों और खेतों की ओर बढ़ गया।
गांवों में बढ़ा संकट
भारथु गांव पूरी तरह पानी से घिर चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि अब गांव से निकलना लगभग नामुमकिन हो गया है। लोग नाव या अस्थायी साधनों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
गांव-गांव पानी की चपेट में
फल्गु नदी का पानी कई और पंचायतों में फैल गया है।
- मेटरा तुलसीपुर, बिजलीपुर और मोकम बिगहा गांव पानी में डूबे।
- शाहपुर पंचायत के अधिकांश गांव जलमग्न हो गए हैं।
- खिरौंटी गढ़ गांव में करीब 50 घरों में पानी घुस चुका है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस बार पानी का स्तर इतना ज्यादा है कि लोगों को अपने घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया है।
सड़क और यातायात पर असर
जहानाबाद-नालंदा NH-33 का परिचालन पूरी तरह बंद हो चुका है।
- मिल्की गांव के पास सड़क पर नदी का पानी चढ़ गया है।
- छोटे वाहन ही नहीं, बल्कि बड़े ट्रक और बसें भी फंसी हुई हैं।
- कई लोग अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन ने यातायात को दूसरे रास्तों से डायवर्ट किया है, लेकिन लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।
फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान
खेत जलमग्न, किसानों की चिंता
बाढ़ का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है।
- धान की फसल पानी में डूब गई है।
- सब्जियों के खेतों में नदी का पानी भर गया है।
- किसान बताते हैं कि एक महीने में दूसरी बार खेत डूबने से इस सीजन की पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।
ग्रामीणों की राय
खिरौंटी गढ़ गांव के बुजुर्ग किसान का कहना है –
“फल्गु नदी में इस तरह का उफान हमने पहली बार देखा है। सब्जी और धान की फसल दोनों बर्बाद हो गई। अब घर चलाना मुश्किल होगा।”
राहत और बचाव कार्य की स्थिति
प्रशासन की ओर से राहत कार्य शुरू किया गया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह नाकाफी है।
- कई गांवों में नाव की व्यवस्था की गई है, लेकिन उनकी संख्या सीमित है।
- कई लोग अब भी अपने घरों में फंसे हुए हैं।
- बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है और पीने के पानी की किल्लत शुरू हो गई है।
एनडीआरएफ की तैनाती की मांग
ग्रामीण संगठनों ने मांग की है कि जल्द से जल्द एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात की जाएं।
बाढ़ से जुड़े बड़े सवाल
क्या प्रशासन जिम्मेदार है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर तटबंध की मरम्मत सही ढंग से होती, तो यह स्थिति नहीं बनती।
- मरम्मत केवल दिखावे के लिए की गई।
- कई जगह मिट्टी डालकर तटबंध को मजबूत दिखाया गया, लेकिन पानी आते ही यह ध्वस्त हो गया।
क्या यह हर साल की समस्या है?
विशेषज्ञ बताते हैं कि जहानाबाद और आसपास के इलाकों में फल्गु नदी का उफान हर साल भारी परेशानी खड़ा करता है।
- मानसून के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है।
- प्रशासन की लापरवाही और कमजोर तटबंध स्थिति को और बिगाड़ देते हैं।
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Author: AK
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