बिहार विधानसभा चुनाव में आदर्श आचार संहिता लागू। चुनाव आयोग ने सरकारी सुविधाओं और प्रचार पर सख्त नियम जारी किए।
Election Commission Tightens Rules in Bihar Polls
बिहार चुनाव में नेताओं पर चुनाव आयोग का शिकंजा
बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो गई है और इसके तहत नेताओं और राजनीतिक दलों पर कई पाबंदियां लगाई गई हैं। अब कोई भी मंत्री या उम्मीदवार सरकारी सुविधाओं का उपयोग अपने निजी या चुनावी प्रचार में नहीं कर सकेगा।
आदर्श आचार संहिता क्या है और कब लागू होती है?
आदर्श आचार संहिता (MCC) चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए ऐसे नियमों का समूह है जो यह सुनिश्चित करते हैं कि चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और समान अवसर वाले हों। यह कोड चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही प्रभावी हो जाता है और परिणाम घोषित होने तक लागू रहता है।
इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि सत्तारूढ़ दल या मंत्री अपने पद और सरकारी संसाधनों का उपयोग चुनावी लाभ के लिए न कर सकें।
सरकारी सुविधाओं के उपयोग पर रोक
मंत्री और नेताओं पर सख्त नियंत्रण
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी मंत्री अब सरकारी हेलीकॉप्टर, वाहन, गेस्ट हाउस या कार्यालय का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए नहीं करेगा। प्रचार यात्रा के लिए केवल निजी या किराए के वाहन की अनुमति होगी, जिसका खर्च चुनाव व्यय में गिना जाएगा।
सरकारी वेबसाइटों से हटेंगी नेताओं की तस्वीरें
घोषणा के 48 घंटे के भीतर सभी सरकारी वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल से नेताओं के फोटो और प्रचार सामग्री हटानी अनिवार्य होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी मंचों का उपयोग किसी भी पार्टी विशेष के प्रचार के लिए न किया जाए।
नई योजनाओं पर लगेगी रोक
चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि चुनावी अवधि में नई योजनाओं की घोषणा या पुराने कार्यों का उद्घाटन नहीं किया जा सकेगा। ऐसा इसलिए ताकि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग न हो।
भड़काऊ भाषण और जातीय अपील पर प्रतिबंध
नीतियों पर ही होगी आलोचना
सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को चेतावनी दी गई है कि वे किसी व्यक्ति, धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी से बचें। प्रचार अभियान केवल नीतियों, कार्यक्रमों और पिछले कार्यों की आलोचना तक सीमित रहना चाहिए।
चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि व्यक्तिगत आरोप, सांप्रदायिक अपील या जाति आधारित भावनाओं को भड़काना गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और दोषी उम्मीदवार पर कार्रवाई की जाएगी।
दीवार लेखन, पोस्टर और बैनर पर नियंत्रण
संपत्ति को क्षति पहुंचाने पर सख्ती
बिहार में बिहार प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1985 के तहत सरकारी या सार्वजनिक भवनों की दीवारों पर पेंटिंग, पोस्टर या बैनर लगाना प्रतिबंधित है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो भी सामग्री पहले से लगी है, उसे 24 से 48 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।
इस नियम का उद्देश्य है कि शहरों की सार्वजनिक संपत्तियों को राजनीतिक प्रचार से नुकसान न पहुंचे।
सभाओं और जुलूसों के लिए जरूरी होगी अनुमति
सार्वजनिक कार्यक्रमों में नियमों का पालन
राजनीतिक दलों को अब किसी भी सभा, जुलूस या रोड शो के लिए पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा। बिना अनुमति के आयोजित कार्यक्रमों पर कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, यह भी अनिवार्य किया गया है कि ऐसे आयोजनों से शोर-शराबा या यातायात बाधा नहीं होनी चाहिए। स्कूल, कॉलेज या शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा।
वाहनों की संख्या सीमित
चुनाव आयोग ने जुलूसों में शामिल वाहनों की संख्या 10 से अधिक न रखने के निर्देश दिए हैं। इससे भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
लाउडस्पीकर और प्रचार समय की सीमा
रात में लाउडस्पीकर बंद
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा मतदान से 48 घंटे पहले पूर्ण प्रचार प्रतिबंध लागू होगा ताकि मतदाता बिना दबाव के निर्णय ले सकें।
मतदान केंद्रों के आसपास रहेगा प्रतिबंध
प्रचार और भीड़ पर रोक
मतदान केंद्रों के 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का प्रचार, नारेबाजी या भीड़ जुटाना सख्ती से वर्जित होगा। मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किसी भी प्रकार की भोजन, शराब या परिवहन सुविधा देना भी निषिद्ध रहेगा।
वाहनों पर निगरानी
हर प्रत्याशी को मतदान दिवस पर केवल 1 से 3 वाहन उपयोग करने की अनुमति होगी। अनधिकृत वाहनों को जब्त किया जा सकता है। मतदान अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं करने पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
विज्ञापनों और मीडिया प्रचार पर नियम
पूर्व प्रमाणीकरण अनिवार्य
चुनावी विज्ञापनों के लिए अब पूर्व प्रमाणीकरण (pre-certification) जरूरी होगा। बिना अनुमति के टीवी, रेडियो या सोशल मीडिया पर कोई भी विज्ञापन प्रसारित नहीं किया जा सकेगा।
इससे फर्जी समाचार या भ्रामक प्रचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। आयोग ने सभी दलों को याद दिलाया है कि मीडिया प्रचार में पारदर्शिता बनाए रखें।
मतदाताओं को निष्पक्ष वातावरण देने की तैयारी
चुनाव आयोग का उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर मतदाता को मतदान का निष्पक्ष, सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण मिले।
राज्य प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे सुरक्षा व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और यातायात नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें। साथ ही, मतगणना केंद्रों पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार चुनाव आयोग ने सख्त आचार संहिता लागू करके यह स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र की गरिमा से समझौता नहीं होगा। सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर रोक, जातीय और सांप्रदायिक अपीलों पर प्रतिबंध तथा प्रचार पर नियंत्रण जैसे कदम पारदर्शिता और समानता को बढ़ावा देंगे।
ऐसे कदमों से न केवल मतदाताओं का भरोसा बढ़ेगा बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि बिहार में होने वाला यह चुनाव देशभर के लिए स्वच्छ, निष्पक्ष और अनुशासित चुनाव का उदाहरण बने।
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Author: AK
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