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दिल्ली महिला आयोग, दिल्ली में महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न और अन्य समस्याओं का समाधान करता है। इसकी अध्यक्षता इस समय स्वाति मालीवाल हैं जो हमेशा सुर्खियों में बनी रहती हैं। कभी अपने बयान को लेकर तो कभी किसी जांच को लेकर। भाजपा भी उनके ऊपर केजरीवाल के लिए काम करने वाली कर्मचारी का आरोप लगा चुकी है। लेकिन फिलहाल स्वाति मालीवाल ने जो किया है, उससे वे एक बार फिर से वे चर्चा में हैं।
स्वाति मालीवाल ने दिल्ली के अस्पतालों में यौन उत्पीड़न से बचे लोगों की चिकित्सा जांच कराने में लंबी देरी को लेकर स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में यौन उत्पीड़न की पीड़िता की मेडिकल जांच करने में लगभग 15 घंटे, लोक नायक अस्पताल में 12 घंटे और सफदरजंग अस्पताल में 8.5 घंटे लगे जो कि होना नहीं चाहिए। आज स्थिति यह है कि राजधानी के अस्पतालों में औसतन एक बलात्कार पीड़िता को उसकी मेडिकल जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है
स्वाती मालिवाल का कहना है कि मेडिकल टेस्ट में बेवजह देरी हो रही है जबकि पीड़िता पहले से ही खराब मानसिक हालात से गुजर रही होती है। स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए नोटिस में आयोग ने देरी के पीछे कारण के बारे में पूछा है। आयोग ने डेटा मांगा है कि क्या बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन दोनों संसाधनों को विशेष रूप से बलात्कार पीड़ितों की चिकित्सा जांच के उद्देश्य से आवंटित किया गया है या अन्य शाखाओं के लिए तैयार किया गया है। आयोग ने अपने नोटिस में कहा है कि यदि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में एसओपी का मसौदा तैयार नहीं किया गया है, तो इसे तत्काल तैयार किया जाना चाहिए
मालीवाल ने कहा कि यह बहुत ही दुखद है क्योंकि इस तरह की लंबी देरी उत्तरजीवी को अत्यधिक उत्पीड़न और आघात का कारण बनती है और उनके दुख को कई गुना बढ़ा देती है। हमने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी किया है और यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेंगे कि बलात्कार पीड़िताओं के प्रति इस उदासीन रवैये को तत्काल ठीक किया जाए।
Author: AK
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