लोकसभा कसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की एक और लिस्ट जारी कर दी है। कांग्रेस ने इस लिस्ट में 10 उम्मीदवारों के नामों का एलान किया है। इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम कन्हैया कुमार का है जिन्हें नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से कांग्रेस से चुनावी मैदान में उतार दिया है, वे बीजेपी के मनोज तिवारी के खिलाफ ताल ठोकने वाले हैं। कन्हैया कुमार भी पूर्वांचल चेहरा हैं। पीएम मोदी सरकार के खिलाफ बेबाकी से बोलने के लिए चर्चित युवा नेता कन्हैया कुमार से राहुल गांधी खासे प्रभावित हैं। बता दें कि कन्हैया कुमार बिहार की बेगूसराय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन वह सीट गठबंधन में कांग्रेस के हाथ नहीं आई। राहुल गांधी की दोनों ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में कन्हैया कुमार काफी सक्रिय रहे। लगातार उन यात्राओं की योजना बनाना और युवाओं को साथ जोड़ने में उनकी अहम भूमिका रही है। कभी कम्युनिस्ट रहे कन्हैया कुमार अब राहुल गांधी के सबसे सक्रिय सिपहसालारों में से एक हैं।

अब कन्हैया कुमार जो पिछले काफी सालों से बिहार की राजनीति में ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रहे थे, एक बार फिर राजधानी दिल्ली में उनकी वापसी हुई है। पिछले कई दिनों से ऐसी अटकालें लगाई जा रही थी कि कांग्रेस कन्हैया को एक बार दिल्ली की किसी सीट से मैदान में उतर सकती है, अब इस बात पर मुहर लग चुकी है और मनोज तिवारी के खिलाफ कन्हैया कुमार सियासी संघर्ष करने जा रहे हैं। कन्हैया कुमार जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं। हमलावर तेवर के लिए देश की राजनीति में कांग्रेस के युवा चेहरा के तौर पर जाने जाते हैं। वर्ष 2019 में कन्हैया कुमार बेगूसराय लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के गिरिराज सिंह ने उन्हें हरा दिया था। बता दें कि उस चुनाव में कन्हैया कुमार सीपीआई के टिकट से लड़े थे। 8 साल पहले जेएनयू में लगे देश विरोधी नारे को लेकर वो काफी चर्चा में थे। वर्ष 2021 में वह कांग्रेस से जुड़ गए। इस समय वह कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के प्रभारी भी हैं।

वहीं कन्हैया कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मामले अभी भी कोर्ट में है। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में पूर्वांचली या भोजपुरी भाषी लोगों की आबादी काफी ज्यादा है। यह पूरे देश का सबसे सघन आबादी वाला इलाका है। यहां पर अनधिकृत कॉलिनियों में अलग-अलग राज्यों से प्रवासी या माइग्रेट जनसंख्या सबसे ज्यादा है। इसी इलाके में बुराड़ी, करावल नगर, सीमापुरी, गोकुलपुरी जैसे क्षेत्र आते हैं, जहां सैकड़ों की तादाद में अनऑथराइज्ड कॉलोनियां हैं। इन कॉलोनियों में बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आकर काम करने वाली बड़ी आबादी रहती है। ऐसे में उन सबका वोट किस तरफ जाएगा, यह भी यहां का चुनावी समीकरण तय करेगा। दिल्ली में साल 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में धार्मिक ध्रुवीकरण बहुत ज्यादा देखने को मिला। इस लोकसभा क्षेत्र में सीलमपुर, मुस्तफाबाद, बाबरपुर और करावल नगर जैसे क्षेत्र आते हैं, जहां मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है। पूरे लोकसभा क्षेत्र में वोटरों के लिहाज से 21 फीसदी वोटर मुस्लिम समुदाय से आते हैं। इसलिए संभावना यही है कि इस बार के चुनाव में भी धार्मिक ध्रुवीकरण का मुद्दा काफी जोर पकड़ सकता है।
कांग्रेस अभी तक शरायबरेली और अमेठी से नहीं उतार सकी है प्रत्याशी:
कांग्रेस ने अपने 10 उम्मीदवारों की सूची रविवार रात जारी की थी। पार्टी ने सूची में पंजाब की छह लोकसभा सीट के अलावा, दिल्ली की तीन और एक यूपी की सीट पर उम्मीदवारों का एलान किया है। कन्हैया कुमार के अलावा दिल्ली के चांदनी चौक से जेपी अग्रवाल, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से उदित राज, अमृतसर से गुरजीत सिंह औजला, जालांधर से पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, फतेहगढ़ साहिब से अमर सिंह, बठिंडा से जीत मोहिंदर सिंह सिद्धू, संगरूर से सुखपाल सिंह खेरा, पटियाला से धर्मवीर गांधी और इलाहाबाद से उज्जवल रेवती रमण सिंह को टिकट दिया है। कांग्रेस को यूपी में गठबंधन में मिली 17 सीटों में रायबरेली और अमेठी छोड़कर अन्य सभी पर उम्मीदवार उतारे जा चुके हैं। ऐसे में अब लोगों की निगाह इन दोनों सीटों पर लगी हैं। देखना यह है कि इन दोनों सीटों पर परिवार का कोई सदस्य मैदान में उतरता है अथवा पार्टी के दूसरे नेताओं को मौका मिलता है।
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Author: AK
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