गुरु, अप्रैल 2, 2026

Delhi Classroom Construction scam: मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पर एसीबी की कार्रवाई

Classroom Scam: ACB Summons Sisodia and Satyendar Jain

दिल्ली स्कूल घोटाले में ACB ने मनीष सिसोदिया व सत्येंद्र जैन को समन भेजा, 2000 करोड़ के कथित भ्रष्टाचार की जांच में नया मोड़।

Classroom Scam: ACB Summons Sisodia and Satyendar Jain


क्लासरूम घोटाले में फंसे आप के बड़े नेता: जानें पूरा मामला

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे सिसोदिया और जैन की मुश्किलें फिर बढ़ीं

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आया है। आम आदमी पार्टी के दो बड़े चेहरे—पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन—एक नए भ्रष्टाचार मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के निशाने पर हैं।

सरकारी स्कूलों में क्लासरूम निर्माण के मामले में ACB ने इन दोनों नेताओं को समन जारी किया है। सतेंद्र जैन को 6 जून और मनीष सिसोदिया को 9 जून को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

इस नई जांच ने दिल्ली की सियासत को फिर से गर्मा दिया है। आइए जानते हैं आखिर क्या है यह पूरा मामला, कब शुरू हुआ था विवाद, और अब तक जांच में क्या-क्या सामने आया है।


क्या है दिल्ली का क्लासरूम निर्माण घोटाला?

2,000 करोड़ का बड़ा आरोप

यह मामला सरकारी स्कूलों में क्लासरूम और सेमी-परमानेंट स्ट्रक्चर (SPS) के निर्माण से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि 2015 से 2019 के बीच दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे तो किए, लेकिन इसी दौरान करीब 2,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ।

2019 में सामने आए थे आरोप

सबसे पहले 2019 में भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, हरीश खुराना और नीलकांत बख्शी ने इस घोटाले का मुद्दा उठाया था। इन्होंने दावा किया कि दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए क्लासरूम की प्रति यूनिट लागत ₹24.86 लाख बताई गई, जबकि आमतौर पर एक क्लासरूम ₹5 लाख में बन सकता था।


केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की रिपोर्ट ने खोले राज

रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि

2020 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की जिसमें टेंडर प्रक्रिया, CPWD गाइडलाइंस, और खर्च की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • SPS निर्माण के लिए ₹8800 प्रति वर्ग फुट खर्च दिखाया गया
  • यह दर सामान्य लागत से पांच गुना अधिक थी
  • टेंडर में प्रतिस्पर्धा नहीं के बराबर रही
  • कई प्रोजेक्ट्स को एक ही ठेकेदार को सौंपा गया

किसकी जिम्मेदारी में थे ये विभाग?

सिसोदिया और जैन के पास थे अहम मंत्रालय

इस परियोजना के दौरान मनीष सिसोदिया के पास शिक्षा और वित्त विभाग थे, जबकि सत्येंद्र जैन के पास PWD (लोक निर्माण विभाग), शहरी विकास, बिजली और स्वास्थ्य जैसे विभाग थे। यही वजह है कि इन दोनों नेताओं से इस मामले में सवाल पूछे जा रहे हैं।


एसीबी की ताजा कार्रवाई

दर्ज हुई FIR, भेजा गया समन

ACB ने 30 अप्रैल 2025 को इस मामले में FIR दर्ज की थी। जांच के दौरान कई दस्तावेज खंगाले गए और अधिकारियों से पूछताछ की गई। इसके बाद 3 जून को सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया को समन जारी किया गया।

  • सत्येंद्र जैन को 6 जून को ACB मुख्यालय में पेश होने को कहा गया है
  • मनीष सिसोदिया को 9 जून को बुलाया गया है

पहले भी रहे हैं विवादों में

आबकारी नीति घोटाले में जेल गए सिसोदिया

इससे पहले मनीष सिसोदिया को दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई और ईडी दोनों इस मामले की जांच कर चुके हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे थे जैन

सत्येंद्र जैन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में मई 2022 में गिरफ्तार किया था। उन पर कथित रूप से बेनामी कंपनियों के जरिए काले धन को सफेद करने का आरोप है।


आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया

आप का आरोप – राजनीतिक साजिश

आप के प्रवक्ता ने इन समनों को “राजनीतिक बदले की भावना” करार दिया है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार की एजेंसियां आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता से घबराई हुई हैं और इसी कारण बार-बार इनके नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

हालांकि, बीजेपी का कहना है कि आप पारदर्शिता की बात करती है लेकिन जब जांच शुरू होती है तो वह पीछे हट जाती है।


सवाल जो उठते हैं

क्या जांच निष्पक्ष होगी?

विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा है कि इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

क्या शिक्षा मॉडल पर पड़ेगा असर?

मनीष सिसोदिया को दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल का जनक माना जाता है। यदि ये आरोप साबित होते हैं, तो यह पूरे ‘दिल्ली मॉडल’ की साख पर सवाल खड़े कर सकते हैं।


निष्कर्ष

दिल्ली के क्लासरूम निर्माण घोटाले में मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को ACB की ओर से भेजे गए समन ने एक बार फिर आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अब देखना यह है कि जांच में आगे क्या-क्या सामने आता है और इन नेताओं की राजनीतिक भविष्य पर इसका क्या असर पड़ेगा।

राजनीति और शिक्षा जैसे दो अहम क्षेत्र जब भ्रष्टाचार से जुड़ जाते हैं, तो सवाल सिर्फ पैसों का नहीं, जनता के विश्वास का भी होता है।


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Author: AK

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