जम्मू-कश्मीर में आतंकी मुठभेड़ में बिहार के नवगछिया निवासी जवान संतोष कुमार शहीद हो गए। गांव में मातम, पूरे देश को गर्व।
Bihar Soldier Santosh Kumar Martyred in Jammu Encounter
शहीद संतोष कुमार: देश के लिए बलिदान, गांव में शोक की लहर
परिचय: एक और बेटा देश पर कुर्बान
भारत मां की गोद एक और वीर सपूत से खाली हो गई। बिहार के नवगछिया क्षेत्र के इस्माइलपुर थाना अंतर्गत भिठा गांव निवासी सेना के जवान संतोष कुमार जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए। यह खबर पूरे गांव ही नहीं, बल्कि राज्यभर में गम और गर्व की मिलीजुली भावना के साथ फैली।
आतंकियों से मुठभेड़ की पूरी घटना
ऑपरेशन नौशेरा: आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई
घटना मंगलवार सुबह की है, जब जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सेना ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही सुरक्षा बलों ने क्षेत्र को घेरा, आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के दौरान संतोष कुमार गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए।
अस्पताल में शहादत
संतोष कुमार को तुरंत सैन्य अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका। वे शहीद हो गए। उनके इस बलिदान की जानकारी मिलते ही उनके गांव में मातम छा गया।
शहीद संतोष कुमार: एक परिचय
2001 में सेना में भर्ती
45 वर्षीय संतोष कुमार वर्ष 2001 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। पिछले 23 वर्षों से वे लगातार देश सेवा में लगे हुए थे। वे एक अनुभवी जवान थे और ऑपरेशन से पहले छुट्टी से लौटे ही थे।
सेवानिवृत्ति की थी योजना
परिजनों के अनुसार, संतोष कुमार ने सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। वे चाहते थे कि अब वे अपने बच्चों की पढ़ाई और माता-पिता की सेवा पर ध्यान दें। लेकिन देश सेवा की अंतिम ड्यूटी ही उनकी अंतिम ड्यूटी बन गई।
शहीद के परिवार का हाल
चार बच्चों के पिता थे संतोष
संतोष कुमार के चार संतानें हैं। उनकी सबसे बड़ी बेटी ने इस वर्ष सीबीएसई की 10वीं परीक्षा पास की है। उनका सबसे छोटा बेटा मात्र 5 वर्ष का है। पत्नी गुड़िया देवी बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी कर रही थीं, तभी उन्हें यह दुखद सूचना मिली।
पूरे परिवार के थे सहारा
संतोष कुमार अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। छोटे भाई अभिनव कुमार ने बताया कि संतोष ही परिवार के आर्थिक और सामाजिक आधार थे। उनके माता-पिता की तबीयत भी खराब रहती है और घर की सारी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी।
गांव में शोक और गर्व का माहौल
शव के पहुंचने पर उमड़ा जनसैलाब
संतोष कुमार के पार्थिव शरीर के गांव में पहुंचते ही हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। भारत माता की जय और संतोष अमर रहें के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। लोग अपनी आंखों में आंसू और दिल में गर्व लिए अंतिम दर्शन करने पहुंचे।
प्रशासन और सेना की उपस्थिति
जिले के अधिकारी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल गांव में उपस्थित रहा। सैन्य सम्मान के साथ संतोष कुमार का अंतिम संस्कार किया गया। पूरे सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई।
बिहार के वीर सपूतों की गौरवशाली परंपरा
बिहार की धरती हमेशा वीर सपूतों को जन्म देती रही है। चाहे वह कारगिल युद्ध हो या आतंकवाद के खिलाफ अभियान, बिहार के जवानों ने हमेशा अपने प्राणों की आहुति देकर देश का मान बढ़ाया है।
अन्य शहीदों की सूची में एक और नाम
संतोष कुमार की शहादत उस लंबी सूची में एक और नाम जोड़ती है जिसमें बिहार के अनेक वीर जवान देश पर बलिदान हुए। यह बलिदान न केवल उनके गांव, बल्कि पूरे राज्य और देश को गौरवान्वित करता है।
सरकार से उम्मीदें
शहीद परिवार को मिले सहायता
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि बिहार सरकार शहीद संतोष कुमार के परिवार को सम्मानजनक सहायता दे। उनके बच्चों की पढ़ाई और परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए।
शहीद स्मारक की मांग
गांव के लोग चाहते हैं कि संतोष की स्मृति में गांव में एक स्मारक बने ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान को याद रखें और प्रेरणा लें।
निष्कर्ष: अमर रहें संतोष कुमार
शहीद संतोष कुमार का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। वे अपने पीछे एक गहरी छाप छोड़ गए हैं, जो न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे देश को प्रेरणा देती है। उनके जैसे वीर जवान ही इस देश की असली शक्ति हैं।
देश को ऐसे शहीदों पर गर्व है। संतोष कुमार को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि – “शहीद कभी मरते नहीं, वे अमर हो जाते हैं।”

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Author: AK
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