रवि, अप्रैल 12, 2026

Bihar SIR Draft List: मतदाता सूची में 3 लाख से अधिक संदिग्ध नाम

Bihar SIR Draft List: Over 3 Lakh Doubtful Voters Identified

बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में 3 लाख से अधिक नाम संदिग्ध पाए गए। बीएलओ नोटिस देंगे और ईआरओ करेंगे सुनवाई।


Bihar SIR Draft List: Over 3 Lakh Doubtful Voters Identified


प्रस्तावना

लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची (Voter List) की शुद्धता बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य से चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करता है। बिहार में इस वर्ष हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद जो ड्राफ्ट लिस्ट जारी की गई, उसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ सामने आई हैं। आयोग ने पाया है कि तीन लाख से अधिक लोग संदिग्ध मतदाता की श्रेणी में आते हैं।

अब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) इन लोगों को नोटिस जारी करेंगे और उनके दावे-आपत्तियों पर निर्वाचन निबंधन अधिकारी (ERO) सुनवाई करेंगे।


बिहार में मतदाता सूची की मौजूदा स्थिति

लाखों नाम हटाए जा चुके हैं

चुनाव आयोग ने हाल ही में मतदाता सूची से 65.63 लाख नाम हटा दिए थे। इसमें—

  • 22.34 लाख मृतक मतदाता
  • 7.01 लाख दोहरे पंजीकरण वाले मतदाता
  • 36.28 लाख लोग जो बिहार छोड़कर स्थायी रूप से बाहर चले गए
    शामिल थे। इसके अतिरिक्त 1.2 लाख लोगों के फॉर्म कई बार प्रयास के बावजूद भी जमा नहीं हुए।

नए संदिग्ध नामों की पहचान

अब जारी ड्राफ्ट लिस्ट में आयोग को 3 लाख से अधिक संदिग्ध नाम मिले हैं। इनमें सबसे अधिक नाम सात जिलों—किशनगंज, अररिया, सहरसा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार और पश्चिम चंपारण में पाए गए हैं।


संदिग्ध मतदाताओं की जाँच प्रक्रिया

BLO का नोटिस

बीएलओ (Booth Level Officer) इन संदिग्ध मतदाताओं को नोटिस जारी करेंगे। नोटिस मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति को अपनी पात्रता साबित करनी होगी।

ERO की सुनवाई

निर्वाचन निबंधन अधिकारी (ERO) नोटिस के आधार पर सुनवाई करेंगे। यदि मतदाता अपने दस्तावेज़ और पहचान प्रमाण पेश कर देता है तो उसका नाम सूची में बना रहेगा, अन्यथा हटा दिया जाएगा।


नागरिकता और नाम बचाने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए या नागरिकता प्रमाणित करने के लिए 11 प्रकार के प्रमाणपत्रों में से किसी एक को प्रस्तुत करना होगा।

मान्य प्रमाण पत्रों की सूची

  1. केंद्र/राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रम (PSU) के कर्मचारी या पेंशनभोगी को जारी पहचान पत्र / पेंशन आदेश।
  2. 1 जुलाई 1987 से पहले किसी भी सरकारी निकाय, बैंक, डाकघर, एलआईसी या सार्वजनिक उपक्रम द्वारा जारी दस्तावेज़।
  3. जन्म प्रमाण पत्र।
  4. पासपोर्ट।
  5. मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालय का मैट्रिक या उच्च शिक्षा प्रमाणपत्र।
  6. राज्य प्राधिकरण द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र।
  7. वन अधिकार पत्र।
  8. जाति प्रमाण पत्र (OBC, SC, ST आदि)।
  9. नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (जहां उपलब्ध हो)।
  10. राज्य/स्थानीय निकाय द्वारा तैयार पारिवारिक रजिस्टर।
  11. सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र।

क्यों ज़रूरी है मतदाता सूची का पुनरीक्षण?

लोकतंत्र की पारदर्शिता

मतदाता सूची में गड़बड़ी से चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। यदि मृतक या पलायन कर चुके लोगों के नाम सूची में बने रहें तो फर्जी मतदान की आशंका रहती है।

दोगुना पंजीकरण रोकना

कई लोग अलग-अलग जगहों पर दो-दो मतदाता पहचान पत्र बनवा लेते हैं। इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होती है। पुनरीक्षण के माध्यम से ऐसे नाम हटाए जा सकते हैं।


सात जिलों पर क्यों है सबसे ज्यादा संदेह?

विशेषज्ञों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों में पलायन और पहचान संबंधी गड़बड़ियां सबसे अधिक होती हैं। नेपाल और बंगाल की सीमा से सटे किशनगंज, अररिया और कटिहार जैसे जिलों में बाहरी लोगों की आवाजाही ज्यादा है। यही कारण है कि यहाँ सबसे अधिक संदिग्ध नाम सामने आए।


बिहार चुनाव आयोग की चुनौतियाँ

बड़ी संख्या में पलायन

बिहार से लाखों लोग रोज़गार की तलाश में अन्य राज्यों में चले जाते हैं। स्थायी रूप से बाहर चले गए लोगों का नाम हटाना आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की समस्या

गांवों और दूरदराज़ इलाकों में कई लोगों के पास जरूरी दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में असली नागरिक भी मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।

पारदर्शिता बनाम असंतोष

जहां आयोग पारदर्शिता बनाए रखना चाहता है, वहीं प्रभावित लोगों में असंतोष भी बढ़ सकता है। कई बार राजनीतिक दल इस मुद्दे को चुनावी रंग भी दे देते हैं।


आम नागरिकों को क्या करना चाहिए?

  1. यदि किसी को BLO से नोटिस मिलता है तो समय पर जवाब देना जरूरी है।
  2. अपने दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी और मूल प्रतियां सुरक्षित रखें।
  3. यदि नाम गलती से हटा दिया गया हो तो दावा/आपत्ति फॉर्म भरकर ERO कार्यालय में जमा करें।
  4. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर भी मतदाता सूची में नाम की स्थिति चेक की जा सकती है।

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Author: AK

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