बिहार चुनाव 2025 से पहले भाजपा-जदयू में सीट बंटवारे पर सहमति बनती दिख रही है, वहीं महागठबंधन में भी सीटों पर जोर-आजमाइश तेज हो गई है।
Bihar Election 2025: BJP-JDU Seat Sharing Talks, Mahagathbandhan in Action
प्रस्तावना
बिहार की राजनीति में एक बार फिर से गर्माहट बढ़ गई है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सीट बंटवारे की रणनीति पर जोर-शोर से चर्चा चल रही है। राजधानी पटना से लेकर दिल्ली तक बैठकों का सिलसिला जारी है। भाजपा-जदयू गठबंधन (NDA) के भीतर सीटों को लेकर जल्द ही सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर महागठबंधन में भी सीटों को लेकर तनातनी तेज हो गई है। ऐसे में यह साफ है कि इस बार का चुनावी समर सिर्फ मतदाताओं के बीच नहीं, बल्कि दलों के बीच भी सीटों की खींचतान से और रोचक बनने वाला है।
भाजपा-जदयू गठबंधन में सीट बंटवारे की चर्चा
दिल्ली और पटना में बैठकें
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इसके बाद नीतीश कुमार दिल्ली रवाना हुए, जहां भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ लंबी बैठकों का दौर जारी है।
संभावित फॉर्मूला
- बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से भाजपा और जदयू को लगभग बराबर हिस्सेदारी मिलने की संभावना है।
- दोनों दलों को 100 से 105 सीटें दी जा सकती हैं।
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 20 सीटें मिलने के संकेत हैं।
- शेष सीटें जीतन राम मांझी की हम (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को दी जा सकती हैं।
जदयू की “भाई बड़ा” भूमिका
इस बार समीकरण ऐसे बनाए जा रहे हैं कि जदयू को भाजपा के बराबर या उससे कुछ अधिक सीटें मिल सकती हैं। यानी गठबंधन में नीतीश कुमार की पार्टी को बड़ी भूमिका दी जा रही है।
पिछली बार का अनुभव: 2020 का चुनाव
- 2020 के चुनाव में भाजपा ने 74 सीटें, जदयू ने 43 सीटें जीती थीं।
- गठबंधन को कुल 125 सीटें मिलीं और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने।
- उस समय भाजपा ने ज्यादा सीटें जीतकर बड़ी पार्टी का दर्जा पाया था।
- इस बार समीकरण बदल सकते हैं और भाजपा की हिस्सेदारी थोड़ी कम हो सकती है।
राजग की रणनीति: सम्मेलन और संगठन
कार्यकर्ताओं की तैयारी
राजग 14 सितंबर तक बिहार में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इन बैठकों को सीट बंटवारे और चुनावी तैयारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक संतुलन
भाजपा और जदयू दोनों ही यह समझते हैं कि यदि गठबंधन को मजबूत रखना है तो सीटों पर संतुलन जरूरी है। यही कारण है कि भाजपा अपनी हिस्सेदारी घटाने पर भी विचार कर सकती है।
महागठबंधन के भीतर भी बढ़ी हलचल
राजद का बड़ा दावा
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस बार 135 से 140 सीटों पर दावा ठोका है।
कांग्रेस की स्थिति
कांग्रेस को लगभग 58 से 60 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कांग्रेस अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए दबाव बना रही है।
छोटे दलों की भूमिका
राजद यह चाह रहा है कि गठबंधन के छोटे दलों को सीमित सीटें दी जाएं ताकि उसकी स्थिति मजबूत बनी रहे।
2020 के चुनाव की तुलना
- 2020 में राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।
- कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं।
- महागठबंधन उस समय सत्ता में नहीं आ पाया, लेकिन राजद ने अपनी ताकत साबित की।
- अब 2025 में राजद और कांग्रेस दोनों अपने हिस्से को लेकर आक्रामक हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सीट बंटवारा?
चुनावी रणनीति का आधार
बिहार जैसे बड़े राज्य में चुनाव की रणनीति पूरी तरह सीट बंटवारे पर निर्भर होती है।
- सही गणित होने पर गठबंधन को बढ़त मिल सकती है।
- अगर मतभेद गहराए तो विरोधी दल इसका फायदा उठा सकते हैं।
उम्मीदवारों की घोषणा
सीट बंटवारे पर सहमति बनने के बाद ही उम्मीदवारों की घोषणा होगी। यही वजह है कि सभी दल इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द निपटाने की कोशिश में हैं।
चिराग पासवान की सक्रियता
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान भी सक्रिय हो गए हैं। माना जा रहा है कि उन्हें इस बार लगभग 20 सीटों का ऑफर मिल सकता है।
- चिराग पासवान ने हाल के दिनों में भाजपा नेताओं से कई बार मुलाकात की है।
- उनका मकसद पार्टी की पकड़ बनाए रखना और बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना है।
चुनावी प्रचार की दिशा
सीट बंटवारे के बाद दोनों गठबंधन अपने-अपने चुनावी प्रचार पर फोकस करेंगे।
- भाजपा-जदयू विकास और स्थिर सरकार का मुद्दा उठाएंगे।
- महागठबंधन बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगा।
- युवाओं और महिलाओं को साधने की रणनीति दोनों गठबंधनों की प्राथमिकता होगी।
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Author: AK
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