हैदराबाद। डिजिटल शिक्षा, समावेशी शिक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में भारतीय शोध की बढ़ती भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर पहचान मिली है। अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (EFLU), हैदराबाद और हैदराबाद विश्वविद्यालय से जुड़े शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने श्रीलंका में आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय सतत शिक्षा सम्मेलन (ICSE 2026) में अपने शोध प्रस्तुत किए। इनमें जहानाबाद निवासी अभिषेक कुमार और साक्षी भी शामिल रहे। 5 अगस्त को श्रीलंका के इन्फॉर्मेटिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में आयोजित सम्मेलन में अभिषेक कुमार और डॉ. रेपुडी विजयलता ने डिजिटल युग में गेम-आधारित शिक्षण वातावरण में मेटाकॉग्निटिव कौशल और शैक्षणिक सहभागिता के संबंध पर अपना शोध प्रस्तुत किया। वहीं, जहानाबाद निवासी शोधार्थी साक्षी ने अपने मार्गदर्शक डॉ. रावुला कृष्णैया के साथ समावेशी एवं सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शिक्षा तथा सतत विकास में इसकी भूमिका विषय पर शोध प्रस्तुत किया।

सम्मेलन का आयोजन INTI International University, Malaysia द्वारा किया गया, जबकि इसकी मेजबानी इन्फॉर्मेटिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT), श्रीलंका ने की। सम्मेलन में विभिन्न देशों के शोधार्थियों, शिक्षकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया तथा शिक्षा के बदलते स्वरूप, डिजिटल तकनीक और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। शोधार्थियों को भारत सरकार की ओर से 1.5 लाख रुपये का शोध अनुदान भी प्राप्त हुआ, जिससे उनके शोध कार्य और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सहभागिता को सहयोग मिला। अंतरराष्ट्रीय मंच पर अभिषेक कुमार और साक्षी की शोध प्रस्तुति से जहानाबाद का नाम भी गौरवान्वित हुआ है। उनकी उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि छोटे शहरों और जिलों से निकलने वाले युवा शोधार्थी भी वैश्विक शैक्षणिक मंच पर अपनी प्रतिभा और शोध क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन कर सकते हैं।
Abhishek and Sakshi from Jehanabad presented their research at the International Conference on Continuing Education.



















