अरुणाचल प्रदेश के गोमचु येकर आत्महत्या मामले की पूरी जानकारी, सुसाइड नोट, आरोप, पुलिस जांच और दो अधिकारियों की भूमिका जानें विस्तार से।
Arunachal Twin Suicide Case: Power, Exploitation & the Truth
अरुणाचल प्रदेश आत्महत्या कांड 2025: गोमचु येकर केस की पूरी सच्चाई
परिचय: एक राज्य, दो आत्महत्याएं और कई सवाल
अरुणाचल प्रदेश इन दिनों दो सनसनीखेज आत्महत्याओं की वजह से सुर्खियों में है। यह घटनाएँ न केवल पूरे राज्य को हिला चुकी हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
इटानगर के पास लेखी गांव में 19 वर्षीय गोमचु येकर की आत्महत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। उसके सुसाइड नोट में दो वरिष्ठ अधिकारियों पर यौन और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए। और इसके ठीक कुछ दिनों बाद, उन्हीं में से एक अधिकारी ने भी खुदकुशी कर ली।
यह घटनाक्रम अब सिर्फ आत्महत्या का मामला नहीं, बल्कि सत्ता, शोषण और व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करने वाली एक संवेदनशील सामाजिक त्रासदी बन गया है।
घटना का क्रम: कैसे शुरू हुई ये दर्दनाक कहानी
23 अक्टूबर: जब सब कुछ खत्म हो गया
23 अक्टूबर 2025 की सुबह, इटानगर के पास लेखी गांव से पुलिस को सूचना मिली कि एक युवक अपने किराए के कमरे में मृत पाया गया है। यह युवक था गोमचु येकर, उम्र 19 वर्ष।
जब पुलिस कमरे में पहुंची, तो वहां से एक सुसाइड नोट मिला, जिसने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी।
इस सुसाइड नोट में गोमचु ने लिखा था कि वह लंबे समय से दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों द्वारा यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न का शिकार रहा है। उसने लिखा कि अब उसके पास जीने का कोई रास्ता नहीं बचा।
सुसाइड नोट में क्या लिखा था?
सुसाइड नोट के अनुसार, गोमचु ने दो अफसरों —
- आईएएस तालो पोतों (पूर्व डिप्टी कमिश्नर, वर्तमान में दिल्ली सचिवालय में विशेष सचिव, PWD),
- लिक्वांग लोवांग (ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यकारी इंजीनियर) —
पर गंभीर आरोप लगाए।
उसने कहा कि उसे HIV संक्रमण के बाद छोड़ दिया गया और कई बार ब्लैकमेल किया गया। सुसाइड नोट में लिखा गया कि दोनों अधिकारियों ने उसकी मदद करने का झूठा वादा किया, एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता का भरोसा दिलाया, लेकिन बाद में उसे “जिंदगी बर्बाद करने” की धमकी दी।
पुलिस जांच और FIR का दर्ज होना
गोमचु के पिता टैगम येकर ने पुलिस में FIR दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में निर्जुली थाने ने मामला BNS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 194 के तहत असामान्य मृत्यु के रूप में दर्ज किया।
लेकिन सुसाइड नोट मिलने के बाद इसमें उकसाने, उत्पीड़न और मानसिक शोषण की धाराएँ जोड़ी गईं।
FIR में स्पष्ट रूप से दोनों अधिकारियों के नाम लिखे गए हैं और उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है।
HIV और ब्लैकमेलिंग का आरोप
गोमचु ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उसे HIV संक्रमण के बारे में जानने के बाद दोनों अधिकारियों ने उसका साथ छोड़ दिया और उसे “अकेला मरने” के लिए छोड़ दिया गया।
उसने यह भी लिखा कि जब उसने सहायता मांगी, तो उसे ब्लैकमेल किया गया और धमकियाँ दी गईं कि यदि उसने कुछ कहा, तो उसकी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।
यह हिस्सा समाज में मौजूद भयावह शोषण तंत्र की ओर इशारा करता है, जहाँ एक कमजोर व्यक्ति व्यवस्था के सामने असहाय हो जाता है।
दूसरी आत्महत्या: अभियुक्त इंजीनियर ने भी दी जान
24 अक्टूबर की रात, इस मामले ने और भी गंभीर रूप ले लिया जब ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर लिक्वांग लोवांग ने भी खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह इस मामले के सामने आने के बाद से शर्मिंदगी और मानसिक दबाव में थे।
उनकी आत्महत्या ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। अब जांच एजेंसियाँ यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह दोष भावना का परिणाम था या किसी और दबाव का नतीजा।
आईएएस तालो पोतों पर बढ़ा दबाव
दूसरे आरोपी आईएएस तालो पोतों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है। सूत्रों के अनुसार, वे फिलहाल फरार हैं।
दिल्ली सचिवालय में विशेष सचिव (PWD) के पद पर कार्यरत इस अधिकारी पर गिरफ्तारी वारंट जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
पुलिस ने उनके खिलाफ यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराएँ लगाई हैं।
जनता में आक्रोश और विरोध
इटानगर और आसपास के इलाकों में स्थानीय संगठनों और छात्र यूनियनों ने इस घटना को लेकर न्याय की मांग उठाई है।
कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से यह भी पूछा है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों को पहले क्यों नहीं निलंबित किया गया।
सोशल मीडिया पर भी #JusticeForGomchu ट्रेंड कर रहा है। कई लोगों ने यह सवाल उठाया है कि जब कोई युवा अपने ऊपर अत्याचार की शिकायत करता है, तो उसे सुरक्षा और मानसिक सहायता क्यों नहीं मिलती?
यौन उत्पीड़न और मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा
समाज में मौन की संस्कृति
भारत के कई राज्यों की तरह, अरुणाचल प्रदेश में भी यौन उत्पीड़न पर खुलकर बात करना सामाजिक रूप से कठिन माना जाता है। पीड़ित अक्सर समाज की प्रतिक्रिया के डर से चुप रहते हैं।
गोमचु येकर का मामला इस मौन को तोड़ने का प्रतीक बन सकता है, अगर समाज इससे सीख ले।
मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी
यह भी सच है कि मानसिक तनाव, ब्लैकमेलिंग और अपमान झेलने के बाद कई लोग अवसाद का शिकार हो जाते हैं।
सरकार और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि हर पीड़ित को काउंसलिंग, कानूनी सहायता और सामाजिक सहयोग मिले, ताकि कोई भी व्यक्ति खुद को इतना अकेला महसूस न करे कि उसे आत्महत्या ही एकमात्र रास्ता लगे।
कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा
पुलिस ने दोनों आत्महत्याओं की संयुक्त जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की सिफारिश की है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी बयान जारी कर कहा है कि,
“किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।”
हालांकि, अब तक तालो पोतों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे जनाक्रोश और बढ़ गया है।
अरुणाचल की छवि पर सवाल
यह मामला केवल दो व्यक्तियों की त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता और पारदर्शिता पर गहरा धब्बा है।
अरुणाचल प्रदेश, जो अब तक अपनी शांतिपूर्ण छवि के लिए जाना जाता था, अचानक भ्रष्टाचार और शोषण के आरोपों की चपेट में आ गया है।
यह जरूरी है कि राज्य सरकार इस मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच करे ताकि जनता का विश्वास दोबारा कायम हो सके।
निष्कर्ष: सवाल जो अब भी बाकी हैं
गोमचु येकर और लिक्वांग लोवांग – दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं। पर उनकी मौतें एक बड़ा सामाजिक आईना छोड़ गई हैं।
क्या कोई व्यवस्था इतनी निष्ठुर हो सकती है कि एक युवा अपने जीवन से हार जाए?
क्या हमारे संस्थानों में जवाबदेही और नैतिकता की जगह अभी भी बची है?
यह घटनाक्रम बताता है कि यौन उत्पीड़न, मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर तत्काल और गंभीर सुधार की आवश्यकता है।
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Author: AK
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